- ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गैंगस्टर इंद्रजीत सिंह यादव की 90.4 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं
- जांच हरियाणा और यूपी पुलिस की दर्ज 15 से अधिक एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर PMLA के तहत की गई
- गैंगस्टर Gems Tunes चलाने वाली कंपनी का मालिक है, हत्या, रंगदारी और ज़मीन कब्ज़े जैसे अपराधों में शामिल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में गैंगस्टर इंद्रजीत सिंह यादव की 90.04 करोड़ की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं. ईडी की तरफ से यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है. अटैच की गई संपत्तियां गैंगस्टर यादव और उनकी पत्नी रीना कुमारी के नाम पर हैं, जिनमें प्लॉट, ज़मीन, रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टी शामिल हैं.
जांच का आधार और केस का बैकग्राउंड
ईडी ने जांच की शुरुआत हरियाणा और यूपी पुलिस द्वारा दर्ज 15 से अधिक एफआईआर और दाखिल चार्जशीट के आधार पर की. ये मामले आर्म्स एक्ट, 1959, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और आईपीसी, 1860 की अनेक धाराओं के तहत दर्ज हैं. जांच में सामने आया कि इंद्रजीत सिंह यादव, जो Gem Records Entertainment Pvt. Ltd. (जिसके तहत Gems Tunes चलाया जा रहा है), उसका मालिक और कंट्रोलर है. एक कथित दबंग प्रकृति का व्यक्ति है और हत्या, रंगदारी, धोखाधड़ी, ज़मीन कब्ज़ा तथा निजी फाइनेंसरों के कर्ज की जबरन वसूली जैसे मामलों में शामिल रहा है. वह हरियाणा पुलिस के कई मामलों में वांछित है और वर्तमान में दुबई में है.
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कर्ज विवादों में भूमिका और दबंगई का नेटवर्क
जां में यह भी सामने आया कि कुछ कॉरपोरेट कंपनियों, जिनमें Apollo Green Energy Ltd भी शामिल है. उसने झज्जर (डीघल) स्थित निजी फाइनेंसरों से भारी-भरकम निजी कर्ज लिया था और सुरक्षा के तौर पर पोस्ट‑डेटेड चेक दिए थे. आरोप है कि गैंगस्टर यादव इन कर्ज विवादों में दबंग की भूमिका निभाता था और सैकड़ों करोड़ रुपये के मामलों में धमकी, डराने‑धमकाने और हथियारबंद साथियों की मदद से जबरन समझौते करवाता था. यह भी सामने आया कि वह डीघल निवासी एक फाइनेंसर की हत्या के मामले में नैम्ड‑एक्यूज़्ड है और उसी केस में फरार चल रहा है.
अपराध से अर्जित संपत्ति और लाइफस्टाइल
ईडी की जांच में अब तक 110 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) का पता चला है, जिसमें जमीन‑जायदाद, लग्जरी गाड़ियों और आलीशान जीवनशैली पर खर्च किया गया, जबकि आयकर रिटर्न में बहुत कम आय दिखाई गई थी. कई बार समन/नोटिस देने के बावजूद गैंगस्टर यादव जांच में शामिल नहीं हुआ और यूएई में रहकर कानून की प्रक्रिया से बचता रहा.
पहले की रेड और बरामदगी
इससे पहले, ईडी ने इस मामले में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें 6.41 करोड़ नकद, लगभग 17.4 करोड़ के गहने, 5 लग्ज़री वाहन, कई चेकबुक, करीब 35 करोड़ की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, अन्य आपत्तिजनक काग़जात और डिजिटल डेटा जब्त किया गया था. पूरे मामले में आगे की जांच जारी है.
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