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This Article is From Feb 26, 2026

INX मीडिया केस: पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ ED ने अब ऐसा क्या किया, जिससे बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ INX मीडिया केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गुरुवार को ED ने स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन पेश किया.

INX मीडिया केस: पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ ED ने अब ऐसा क्या किया, जिससे बढ़ सकती हैं मुश्किलें?
  • ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पी. चिदंबरम के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन स्पेशल कोर्ट के सामने रखा है
  • INX मीडिया को विदेशी निवेश की मंजूरी के दौरान कथित रिश्वत लेने का आरोप पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति पर है
  • जांच में पाया गया कि अवैध रकम शेल कंपनियों के जरिए घुमाकर कई गुना बढ़ाई गई और कंपनियों में निवेश किया गया
नई दिल्ली:

पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एयरसेल-मैक्सिस और INX मीडिया केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चिदंबरम के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन को स्पेशल कोर्ट के सामने रखा है. प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन असल में किसी सक्षम अथॉरिटी की ओर से मुकदमा चलाने की मंजूरी देने वाला आदेश होता है. इस मामले में ED ने ट्रायल तेज करने के लिए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के सामने इसे पेश किया है. 

यह मामला INX मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को दी गई FIPB मंजूरी से जुड़ा है. आरोप है कि जब पी. चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे, तब INX मीडिया को विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई थी. जांच में सामने आया था कि इस मंजूरी के बदले में कथित तौर पर रिश्वत ली गई थी. ये रिश्वत सीधे तौर पर नहीं, बल्कि उनके बेटे कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनियों की जरिए ली गई थी.

शेल कंपनियों के जरिए पैसे का खेल

जांच में सामने आया है कि कथित अवैध रकम शेल कंपनियों के जरिए घुमाई गई. इसमें एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (ASCPL) जैसी कंपनियों का नाम सामने आया है, जो कार्ति चिदंबरम के नियंत्रण में बताई गई हैं. 

ED का कहना है कि इन पैसों को अलग-अलग कंपनियों में निवेश दिखाकर, शेयर खरीद-बिक्री के जरिए और विदेशों में निवेश करके कई गुना बढ़ाया गया. खासतौर पर वसन हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड और AGS हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में निवेश का जिक्र जांच में किया गया है.

एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा पैसा कई देशों और अलग-अलग खातों के जरिए घुमाया गया ताकि असली सोर्स छुपाया जा सके. बाद में इन पैसों का इस्तेमाल भारत और विदेशों में चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया.

कितनी रकम की हुई हेराफेरी?

ED ने इस मामले में कुल करीब 65.88 करोड़ रुपये को प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी आपराधिक कमाई माना है. अक्टूबर 2018 में ED ने 53.93 करोड़ रुपये अटैच किए थे. इसके बाद मार्च 2023 में 11.04 करोड़ रुपये अटैच किए.

पी. चिंदंबरम और कार्ति हैं आरोपी

ED ने 1 जून 2020 को राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. 24 मार्च 2021 को अदालत ने मामले का संज्ञान लिया. इस केस में पी. चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम समेत 10 लोगों और पार्टियों को आरोपी बनाया गया है. 16 दिसंबर 2024 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई थी.

प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन क्यों दिया गया?

6 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ED बनाम बिभू प्रसाद आचार्य के मामले में फैसला दिया था. कोर्ट ने साफ किया कि अगर आरोपी लोक सेवक है, तो PMLA केस में भी ट्रायल शुरू करने से पहले CrPC की धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी यानी प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन जरूरी होगा. इसी फैसले के बाद ED ने पी. चिदंबरम के खिलाफ सक्षम प्राधिकरण से मंजूरी मांगी. 10 फरवरी 2026 को यह मंजूरी मिल गई. ED ने यह अभियोजन मंजूरी आदेश राउज एवेन्यू की स्पेशल कोर्ट में पेश कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि इससे ट्रायल में आ रही कानूनी रुकावटें दूर होंगी और केस की सुनवाई तेज हो सकेगी.

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