किसी भी खिलाड़ी के जीवन में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो वह ताउम्र कभी भी नहीं भुला सकता. और कुछ ऐसा ही सचिन तेंदुलकर के करियर में तब हुआ, जब वह सिर्फ 16 साल के थे और पाकिस्तान दौरे से ठीक पहले टीम इंडिया में चयन के मुहाने पर खड़े थे. सचिन 'उस इतिहास' के मुहाने पर खडे़ थे, जो आज तक भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सिर्फ वही रच सके हैं हैं. लेकिन अगर भारतीय पूर्व क्रिकेटर गुरुशरण सिंह का 'ऐतिहासिक उपकार' नहीं ही होता, तो सचिन कभी यह इतिहास नहीं ही रच पाते. लेकिन जब गुरशरण सिंह ने बड़ा फैसला लिया, तो सचिन तेंदुलकर ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ही ली. और यह ऐसा कारनामा है, जो लगता है शायद ही कोई खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट में अगले 50 साल भी शायद ही बना सके. यह बहुत ही रोचक कहानी है. चलिए इस ऐतिहासिक कहानी की एक-एक करके परत खोलते हैं.
3-7 नवंबर, साल 1989
इन तारीखों के वानखेड़े स्टेडियम में ईरानी ट्ऱॉफी का फाइनल खेला जा रहा था. कई खिलाड़ी टीम इंडिया के लिए अपना दावा मजबूत करने उतरे थे, लेकिन सचिन तेंदुलकर का बल्ला एक अलग ही कहानी रचने जा रहा था. दिल्ली के पहली पारी में 461 रनों के जवाब में शेष भारत के लिए खेल रहे सचिन के पास मौका था पहली पारी में इतिहास रचने का, लेकिन वह 39 रन ही बना सके. दूसरी पारी में नंबर-4 पर उतरे तो एक समय उनकी पारी 85 के आस-पास जाकर अटक गई. अब विकेट आखिरी था और शतक के लिए चाहिए थे 4 रन, लेकिन पेंच यहीं फंसा था.
किनारे पर फंसा सचिन का 'इतिहास !'
दरअसल हुआ यह कि दूसरी पारी में नंबर पांच पर बैटिंग करने आए गुरुशरण सिंह तेज गेंदबाज संजीव शर्मा की गेंद पर चोटिल हो गए थे. उनकी दाएं हाथ की उंगली टूट चूकी थी और अगले दिन तक दाएं हाथ पर पक्का प्लास्टर चढ़ चुका था. तब सचिन तेंदुलकर 85 रनों पर बैटिंग कर रहे थे और जब वह इस स्कोर पर थे, तो शेष भारत ने अपना नौवां विकेट स्पिनर वेंकटपथि राजू के रूप में गंवा दिया. अब आखिरी बल्लेबाज बचा था और वह थे दाएं हाथ पर पक्का प्लास्टर लिए बैठे गुरुशरण सिंह. ऐसा लग रहा था कि सचिन इतिहास नहीं ही रच पाएंगे.
गुरुशरण का बड़ा फैसला, सचिन ने रच दिया इतिहास, आज भी कायम
ऐसे में गुरुशरण सिंह नंबर-11 पर हाथ पर प्लास्टर के साथ बैटिंग करने उतरे और उन्होंने सिर्फ एक हाथ (उल्टे) से बैटिंग की. सिर्फ सचिन के शतक से ऊपर इतिहास रचने के लिए. गुरुशरण मैदान पर उतरे, तो विरोधी खिलाड़ियों ने भी उनका ताली बजाकर स्वागत किया. गुरशरण सिंह ने मैदान पर आते ही सचिन से कहा था, 'सचिन, तेरा 100 कराके जाएंगे.' उन्होंने टूटे हाथ से करीब 30-40 गेंदें खेलीं और सचिन तेंदुलकर को उनका शतक (103 रन नाबाद) पूरा करने में मदद की. और इस शतक के साथ ही सचिन ने वह कारनामा कर दिखाया, जो भारत के घरेलू इतिहास में सिर्फ वही कर सके हैं. "शतक की गोल्डन हैट्रिक" का. पहले रणजी, पहले दलीप ट्रॉफी और पहले ईरानी ट्रॉफी में शतक बनाने का बड़ा कारनामा जिस पर सचिन के अलावा कोई 'मुहर' नहीं लगा सका है.

(यह साल 1988 में विंडीज तौरे से पहले की तस्वीर है. तब तक सचिन टीम इंडिया के लिए नहीं खेले थे. तस्वीर में मांजरेकर के के पीछे गुरुशरण सिंह हैं फोटो: फेसबुक)
तेंदुलकर ने ऐसे चुकाया "ऐतिहासिक ऋण"
इस घटना के बाद जब 1990 में दोनों खिलाड़ी न्यूजीलैंड दौरे पर थे, तब सचिन ने गुरशरण से वादा किया था, "जब भी तुम रिटायर होगे, मैं तुम्हारे बेनिफिट मैच में खेलने जरूर आऊंगा.' और साल 2006 में जब दिल्ली फिरोजशाह कोटला (अब अरुण जेटली स्टेडियम) में गुरुशरण के बेनिफिट के लिए मैच हुआ, तो गुरुशरण की फोन कॉल पर सचिन 15 साल पुराना वादा निभाने दिल्ली चले आए. और मास्टर ब्लास्टर ने एक और उदाहरण दुनिया के सामने पेश किया कि वह अपने वादों का कितना ध्यान रखते हैं.
सिर्फ 48 गेंद ही चला अंतरराष्ट्रीय करियर
गुरुशरण सिंह ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 104 मैच खेले. उनका बेस्ट स्कोर नाबाद 298 रन था. लेकिन भारत के लिए उन्हें एक टेस्ट और 1 वनडे ही खेलना नसीब हुआ. और दोनों में मिलाकर वह सिर्फ 48 ही गेंद खेल सके. टेस्ट में 38 और वनडे में सिर्फ 10 गेंद. टेस्ट में उन्होंने 18 और वनडे में 4 ही रन बनाए. और आज भी गुरुशरण को कट्टर फैंस सचिन के बनाए गए इतिहास में मदद के लिए याद करते हैं.
F & Q= Frequently Asked Questions
प्र.1: 1989 के ईरानी ट्रॉफी मैच में गुरुशरण सिंह ने किस तरह सचिन तेंदुलकर की मदद की थी?
उ.: उंगली टूटने और हाथ पर पक्का प्लास्टर चढ़ने के बावजूद, गुरुशरण सिंह 11वें नंबर पर एक हाथ से बैटिंग करने मैदान पर उतरे. उन्होंने 30-40 गेंदें खेलकर सचिन का साथ निभाया और उनका शतक (103* रन) पूरा कराया.
प्र.2: गुरुशरण सिंह की मदद से सचिन तेंदुलकर ने घरेलू क्रिकेट में कौन सा ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया?
उ.: सचिन ने भारतीय घरेलू क्रिकेट में "शतक की गोल्डन हैट्रिक" पूरी की. वह अपने पहले रणजी, पहले दलीप ट्रॉफी और पहले ईरानी ट्रॉफी मैच में शतक बनाने वाले भारत के एकमात्र बल्लेबाज बने.
प्र.3: सचिन तेंदुलकर ने गुरुशरण सिंह से क्या वादा किया था और उसे कैसे निभाया?
उ.: सचिन ने 1990 के न्यूजीलैंड दौरे पर गुरुशरण से वादा किया था कि वे उनके बेनिफिट मैच में जरूर खेलने आएंगे. 15 साल बाद, 2006 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में हुए बेनिफिट मैच में सचिन सिर्फ एक फोन कॉल पर खेलने पहुंच गए.
प्र.4: गुरुशरण सिंह का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर कैसा रहा?
उ.: गुरुशरण सिंह ने भारत के लिए केवल 1 टेस्ट और 1 वनडे मैच खेला. अपने पूरे अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने कुल 48 गेंदें (टेस्ट में 38 और वनडे में 10) खेलीं और कुल 22 रन (टेस्ट में 18, वनडे में 4) बनाए.
प्र.5: गुरुशरण सिंह का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में प्रदर्शन कैसा रहा?
उ.: उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कुल 104 मैच खेले, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नाबाद 298 रन था.
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