- उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं
- सपा ने दो उम्मीदवार उतारे हैं, माना जा रहा था तीसरा उम्मीदवार भी उतारेगी
- भाजपा ने 8 उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में चुनाव बिना मुकाबले के ही हो जाएगा
समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारा. पहले माना जा रहा था कि पार्टी तीसरा उम्मीदवार भी उतारेगी, लेकिन अखिलेश यादव की पोस्ट से साफ हो गया है कि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारने नहीं जा रही है. राजनीतिक जानकारी इसे आंतरिक दरारों को रोकने और संभावित अपमान से बचने के मकसद के एक रणनीतिक फैसले के रूप में देख रहे हैं.
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. भाजपा ने 8 और सपा ने 2 उम्मीदवारों को उतारा है. इसका मतलब हुआ कि अब दोनों ही पार्टियों बिना मुकाबले के अपने-अपने उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती हैं.
रणनीतिक फैसला कैसे?
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम पार्टी को क्रॉस-वोटिंग से बचाने के लिए उठाया गया है. यदि एसपी ने तीसरा उम्मीदवार उतारा होता तो, तो उसके कुछ विधायकों का एनडीए की तरफ झुकाव सामने आ सकता था, जिससे कार्यकर्ताओं के मनोबल को झटका लगता और पार्टी रैंकों में कमजोरी का प्रदर्शन होता और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि यह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपने सहयोगी कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे की वार्ताओं में उसे बैकफुट पर आना पड़ता.
तीसरी उम्मीदवारी से बाहर रहकर, एसपी ने ऐसा रास्ता चुना प्रतीत होता है जो उसे सिर ऊंचा करके प्रक्रिया से बाहर निकलने की अनुमति देता है, ऐसी स्थिति से बचते हुए जो किसी भी आंतरिक विभाजन को सामने ला सकती थी और उसके कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास को कमजोर कर सकती थी.
राजनीतिक हलकों में कहा जाता है कि यह गणनापूर्ण संयम अतिरिक्त सीट के लिए अनिश्चित लड़ाई की तुलना में संगठनात्मक स्थिरता को प्राथमिकता देता है, जो राज्य विधानसभा की जमीनी हकीकतों के व्यावहारिक आकलन को दर्शाता है.
फरवरी 2024 की परिचित स्क्रिप्ट से बचना
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनावों में, विधानसभा की ताकत के आधार पर भाजपा से सात सीटें और एसपी से तीन सीटें जीतने की उम्मीद थी. हालांकि, भाजपा ने आश्चर्यजनक रूप से आठवां उम्मीदवार उतारा और मुकाबला कराया. अंत में, भाजपा के सभी आठ उम्मीदवार जीत गए, जबकि एसपी के केवल दो उम्मीदवार सफल हुए. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लगभग सात एसपी विधायकों ने भाजपा के लिए वोट किया था.
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यूपी राज्यसभा चुनाव उतना सरल नहीं है जितना दिखता है
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (सितंबर-अक्टूबर 2026) ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया है, जहां राजनीतिक अंकगणित क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं और अंतिम समय की चालों की हकीकतों से टकरा रहा है. एनडीटीवी रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने 9वां नामांकन फॉर्म हासिल किया, जो आक्रामक इरादे का संकेत देता है.
समाजवादी पार्टी (एसपी) ने दो उम्मीदवार नामित किए हैं और कथित तौर पर तीसरे उम्मीदवार पर अंतिम निर्णय लेने के चरण में थी. 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों के मुकाबले में चुनाव जरूर होना था.
लेकिन, नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन यानी 6 अक्टूबर के बाद, भाजपा ने 8 उम्मीदवार उतारे हैं, और एसपी ने केवल 2 उम्मीदवार खड़े किए हैं. इससे चुनाव की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, क्योंकि 10 सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवार हैं. हालांकि, इसे नामांकनों की जांच से गुजरना होगा.
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राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष चुनाव नहीं है
जनता की जगह, जनता के प्रतिनिधि यानी राज्य विधानसभा के विधायक राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करते हैं, यदि चुनाव होता है.
राज्यसभा चुनाव के लिए कोटा की गणना कैसे की जाती है-
एक सीट हासिल करने के लिए आवश्यक प्रथम-वरीयता वोटों की संख्या निर्धारित की जाती है:
आवश्यक कुल प्रथम-वरीयता वोट = [कुल विधायक ÷ (चुनाव के लिए सीटें + 1)] + 1
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में 396 विधायक और 10 सीटें भरी जानी हैं:
396 ÷ 11 = 36, प्लस 1 = एक सीट के लिए 37 वोट आवश्यक
चुनाव प्रणाली सिंगल ट्रांस्फेरेबल वोट की है. इसलिए, राज्यसभा चुनावों में वोट देने वाले विधायक अपनी प्रथम, द्वितीय, तृतीय आदि वरीयताएं चिह्नित करते हैं, उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर और सिर्फ एक उम्मीदवार नहीं.
यदि प्रथम वरीयता वोट सभी सीटों को नहीं भरते, तो पहले से चुने गए उम्मीदवारों के अतिरिक्त वोट उन विधायकों की द्वितीय वरीयता उम्मीदवारों को स्थानांतरित किए जाते हैं जिनकी प्रथम वरीयताएं पहले ही जीत चुकी हैं. यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक सभी सीटें भर नहीं जातीं.

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NDA के लिए पर्दे के पीछे के आंकड़े
एसपी विधायक पूजा पाल ने खुले तौर पर भाजपा के लिए समर्थन व्यक्त किया है. तीन अन्य एसपी विधायक अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और मनोज कुमार पांडे (अब बिना किसी दल से जुड़े सदस्य) ने 2024 राज्यसभा चुनाव में भाजपा के लिए वोट किया था.
अतिरिक्त एसपी विधायक राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य भी एनडीए की ओर झुके हुए बताए जाते हैं, जिससे इसकी प्रभावी ताकत संभावित रूप से 295 तक पहुंच सकती है. राजा भैया से जुड़े जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 297 तक पहुंच सकता है.
हालांकि, एसबीएसपी के दो मुस्लिम विधायक और आरएलडी के दो विधायक या तो एनडीए के खिलाफ वोट करने या अनुपस्थित रहने की उम्मीद है, जिससे प्रभावी आंकड़ा लगभग 293 पर आ जाएगा.
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इंडिया गठबंधन के लिए पर्दे के पीछे के आंकड़े
एसपी और कांग्रेस मिलकर 103 सदस्य हैं. एक विधायक, रामाकांत यादव, जेल में हैं और संभवतः वोट नहीं दे पाएंगे, जिससे ताकत 102 रह जाती है.
चार एसपी विधायक (पूजा पाल, राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य) व्यापक रूप से एनडीए का समर्थन करने की उम्मीद हैं, जिससे गठबंधन के वोट 98 पर आ जाते हैं.
इसके विपरीत, एसबीएसपी और आरएलडी के चार मुस्लिम विधायक एसपी का समर्थन कर सकते हैं, जिससे इसकी प्रभावी ताकत लगभग 102 पर पहुंच सकती है.
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