Eng vs Ind: कई लाइन में लगे हैं, लेकिन इस वजह से लेफ्टी देवदत्त पडिक्कल को मिली टीम में केएल राहुल की जगह

Devdutt Padikkal: जो हालिया समय में प्रदर्शन देवदत्त के बल्ले से निकला, उसके बाद चयन समिति के लिए उनकी अनदेखी करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल था.

Eng vs Ind: कई लाइन में लगे हैं, लेकिन इस वजह से लेफ्टी देवदत्त पडिक्कल को मिली टीम में केएल राहुल की जगह

Devdutt Padikkal: देवदत्त पडिक्कल के प्रदर्शन को आखिर स्वीकार किया गया

नई दिल्ली:

Ind vs Eng: वक्त कैसा भी चल रहा हो, बस आप अपना काम सर्वश्रेष्ठ तरीके से करते रहिए. खासकर क्रिकेट जैसे महान अनिश्चितता वाले खेल में क्योंकि आपका वक्त कभी भी आ सकता है. और ऐसा ही देवदत्त पडिक्कल (Devdutt Padikkal) के  साथ हुआ. केएल राहुल (KL Rahul) पूरी तरह से फिट नहीं हुए, तो उनकी जगह इस लेफ्टी बल्लेबाज को तीसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड टीम में जगह मिल गई. आप देखिए कि घरेलू क्रिकेट में कई बल्लेबाज हैं, जो अच्छा कर रहे हैं. मसलन मयंक अग्रवाल पिछले सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे, तो जारी रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy 2024) में पीके भुई टॉप पायदान पर चल रहे हैं. इनके बाद सचिन बेबी और पुजारा भी हैं. लेकिन बीसीसीसीआई ने अगर देवदत्त पडिक्कल को टीम में जगह दी, तो उसके पीछे बहुत ही खास वजह रही. 

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इस वजह से बाजी मार ले गए पडिक्कल

कर्नाटक के लेफ्टी बल्लेबाज इस सीजन में बहुत ही  प्रचंड फॉर्म में चल रहे हैं. अपने सबसे हालिया मैच में देवदत्त ने तमिलनाडु के खिलाफ 151 रन की पारी खेली. और इस मुकाबले को चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर देख रहे थे. वैसे सीजन का आगाज ही देवदत्त ने बहुत ही शानदार अंदाज में किया था. उन्होंने पंजाब के खिलाफ पहले मैच में 193 रन की पारी खेली थी, तो फिर गोवा के खिलाफ 103 रन बनाए थे. वहीं, इंग्लैंड लॉयन्स के खिलाफ भारत ए के लिए खेलते हुए देवदत्त ने 105, 65 और 21 रन बनाए. लेकिन अगर का वोट सिर्फ इसी वजह से नहीं आया.

...अगरकर पर असर इसका भी पड़ा

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अगरकर को सबसे ज्यादा प्रभावित किया देवदत्त की निरंतरता ने. तमिलनाडु के खिलाफ सेंचुरी, इंग्लैंड लॉयन्स के खिलाफ सेंचुरी, फिर गोवा और पंजाब के खिलाफ शतक..वास्तव में आखिरी दस प्रथमश्रेणी पारियों में देवदत्त ने जोरदार दावा प्रस्तुत किया. इन पारियों में देवदत्त ने 30, 193, 42, 31, 103, 65, 21, 151 और 35 रन बनाए. 'सुर' थोड़ा ऊपर-नीचे जरूर गया, लेकिन यह बहुत हद तक सधा हुआ लगा. और इस निरंतरता के बाद चयन समिति के लिए देवदत्त की अनदेखी करना बहुत ही मुश्किल था.