छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे घने जंगलों में शिकारी 'नक्सलियों वाली चाल' चल रहे हैं. एक राज्य में शिकार कर दूसरे राज्य की सीमा में भाग जाने वाले इन शातिर तस्करों को दबोचने के लिए दोनों राज्यों ने मिलकर एक महा-प्लान (जॉइंट एक्शन) तैयार किया है. महाराष्ट्र पुलिस की खाकी पर दाग लगने के बाद दोनों राज्यों के वन विभाग ने 105 किलोमीटर के घने जंगल और इंद्रावती नदी के किनारे बड़े ऑपरेशन और सख्त निगरानी का प्लान तैयार किया है.
जॉइंट ऑपरेशन की जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों राज्यों की सीमा पर करीब 105 किलोमीटर तक घना जंगल है. जंगल में रहने वाले नक्सलियों की तरह शिकारी भी इसका फायदा उठा रहे हैं. वन्यजीवों के शिकारी और तस्कर छत्तीसगढ़ के जंगल में अपराध करने के बाद महाराष्ट्र की सीमा में जाकर फरार हो जाते थे. इसी कानूनी और भौगोलिक कमजोरी के कारण वन्यजीवों की तस्करी धड़ल्ले से जारी रही है. लेकिन, अब इस कमी से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग के प्रमुख ने महाराष्ट्र वन विभाग को पत्र लिखकर संयुक्त रूप से काम करने का प्लान बनाया है.

शिकारियों के खिलाफ शुरू होगा बड़ा ऑपरेशन
महाराष्ट्र पुलिस के 2 जवानों के साथ 9 आरोपी गिरफ्तार
बता दें कि हाल ही में बाघ की खाल की तस्करी करने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस के जवान पकड़े गए हैं. तस्करों से पूछताछ के बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बड़ा सर्चिंग अभियान चलाया गया. इस दौरान एक और बाघ की खाल बरामद की गई. एपीसीसीएफ माथेश्वरन वी. के अनुसार, इस पूरे मामले में अब तक 9 गिरफ्तारियां कर तीन बाघों की खाल बरामद की गई. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के शातिर तस्कर शामिल हैं, जिनमें 2 पुलिस जवानों सहित 4 आरोपी महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाके के रहने वाले हैं.
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