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जंगल के गुनहगारों को कब मिलेगी सजा? बस्तर में 5 बाघों का किया शिकार; 90% मामलों में गिरफ्तारी के बाद सजा नहीं

बस्तर में 5 बाघों के शिकार का बड़ा खुलासा होने के बाद छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. मामले में 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन वन विभाग की रिपोर्ट बताती है कि 90% से अधिक वन्यजीव अपराध मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं.

जंगल के गुनहगारों को कब मिलेगी सजा? बस्तर में 5 बाघों का किया शिकार; 90% मामलों में गिरफ्तारी के बाद सजा नहीं
फाइल फोटो।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से सामने आए बाघों के शिकार के मामले ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. भानुप्रतापपुर के जंगलों से दो बाघों की खाल के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी तो पांच बाघों के शिकार का सनसनीखेज खुलासा हुआ. 27 जून से 5 जुलाई के बीच 9 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक ऐसा पुलिसकर्मी भी शामिल है जिसे कभी वीरता के लिए राष्ट्रपति सम्मान मिल चुका है. 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गिरफ्तारियां हो रही हैं तो फिर जंगल के अपराधियों को सजा क्यों नहीं मिल रही? वन विभाग की ही एक शोध रिपोर्ट बताती है कि वन्यजीव अपराधों के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में आरोपी अदालत से बरी हो जाते हैं. ऐसे में बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

सम्मानित पुलिसकर्मी बना वन्यजीव अपराधी

तस्वीरों में दिखाई देने वाला आरोपी कोई साधारण व्यक्ति नहीं है. महाराष्ट्र पुलिस का यह जवान वर्ष 2021 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से वीरता सम्मान प्राप्त कर चुका है. लेकिन अब वही पुलिसकर्मी अपने एक साथी के साथ बाघ की दो खालों के मामले में गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में है. भानुप्रतापपुर से शुरू हुई जांच ने बस्तर में पांच बाघों के शिकार के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया. 27 जून से 5 जुलाई के बीच लगातार कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया.

देश और विदेश में फैला नेटवर्क

जांच में सामने आ रही जानकारियां इस वन्यजीव अपराध की गंभीरता को और बढ़ा रही हैं. अधिकारियों के अनुसार शिकार और तस्करी का यह नेटवर्क केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है. इसके तार महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों से जुड़े होने की आशंका है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क का संबंध म्यांमार और चीन जैसे देशों तक तो नहीं पहुंचता. वन विभाग का मानना है कि बाघ की खाल और अन्य अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है.

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वन अमले ने आरोपियों से शिकार के हथियार बरामद किए.  

जांच और कार्रवाई जारी- वन मंत्री 

वन मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि वन विभाग ने संदिग्ध लोगों को पकड़कर उनसे पूछताछ की है और मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है. राज्य स्तर से विशेष टीमों को भी जांच के लिए भेजा गया है. उनका कहना है कि मामले से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके.

क्या कहते हैं वन्यजीव अपराध के आंकड़े?

छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के शिकार और तस्करी के मामलों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. 

  • वर्ष 2024 में ऐसे 17 मामलों में 66 लोगों को गिरफ्तार किया था. 
  • वर्ष 2025 में 22 मामलों में 73 गिरफ्तारियां हुईं. 
  • 2026 में 30 जून तक 12 मामलों में 43 लोगों को पकड़ा जा चुका है. 
  • सिर्फ जून 2026 में दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर में छह बाघों के शिकार के मामले सामने आए, जबकि चार बाघों की खाल भी बरामद की गई.
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शिकारियों ने बदले तरीके, तकनीक बनी नई चुनौती

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब शिकारी सिर्फ पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं हैं. वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी कर रहे हैं. हाल ही में सुकमा में एक कार्रवाई के दौरान ऐसा उपकरण बरामद किया गया, जिसमें पानी की पाइप, कांच की गोलियां और गैस का इस्तेमाल कर जानवरों का शिकार किया जाता था. पहले जहां फंदे, कंटीले तार और देसी हथियारों का उपयोग होता था, वहीं अब तकनीकी साधनों ने शिकार को और खतरनाक बना दिया है.

जंगल में निगरानी बढ़ाने का दावा

वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव अपराध रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. जंगलों में विशेष गश्ती दल सक्रिय हैं और बीट प्रभारियों के नेतृत्व में नियमित निगरानी की जाती है. इसके अलावा राज्य स्तर पर एंटी क्राइम यूनिट का गठन किया है, जो मुखबिर तंत्र की मदद से वन्यजीव अपराधियों पर नजर रख रही है और समय-समय पर कार्रवाई भी कर रही है.

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शिकारी शिकार करने के लिए तार से बनाते थे जाल.  

अदालत में क्यों कमजोर पड़ जाते हैं केस?

वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें अदालत से सजा दिलाना है. विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की शोध रिपोर्ट में यह सामने आया है कि वन्यजीव अपराधों के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं. इसकी बड़ी वजह अदालत में मजबूत और तकनीकी रूप से पुख्ता साक्ष्य पेश नहीं कर पाना है. कई मामलों में जांच की कमियां और सबूतों की श्रृंखला कमजोर पड़ जाती है, जिसका फायदा आरोपी उठा लेते हैं.

सजा नहीं मिलेगी तो कैसे रुकेगा शिकार?

बस्तर में पांच बाघों के शिकार का खुलासा केवल एक मामला नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी समस्या की ओर इशारा करता है जिससे देश के जंगल जूझ रहे हैं. गिरफ्तारी के बाद भी यदि आरोपी अदालत में सजा से बच जाते हैं तो यह शिकारियों के लिए एक तरह का संदेश बन जाता है कि पकड़े जाने के बाद भी बचा जा सकता है.  

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