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पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन से सपा ने किया किनारा, गठबंधन में ही मतभेद; अखिलेश के दो सांसदों ने क्या कहा

समाजवादी पार्टी यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह धार्मिक या मर्यादा से जुड़े मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाएगी।

पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन से सपा ने किया किनारा, गठबंधन में ही मतभेद; अखिलेश के दो सांसदों ने क्या कहा
नई दिल्ली:

संसद के मॉनसून सत्र में राम मंदिर और चंदा घोटाले के मुद्दे को लेकर विपक्ष का हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है. पोस्टर-बैनर, नारेबाजी और तरह-तरह के विरोध-प्रदर्शनों के जरिए विपक्षी दल रोजाना केंद्र सरकार और भाजपा को घेरने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं.रोजाना इस मुद्दे में अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन करते विपक्षी सांसद दिखाई देते हैं. दान पात्र से लेकर पोस्टर तक लगातार इस मुद्दे पर प्रदर्शन देखने को मिलता है. लेकिन इस प्रदर्शन के बीच INDIA गठबंधन में ही रार पैदा होती दिखी है. यह रार पप्पू यादव के नाटक वाले प्रदर्शन के बाद देखने को मिल रही है. 

राम मंदिर चंदा घोटाला और 'साधु' वेशभूषा का विवाद

शुक्रवार को संसद भवन के बाहर उस वक्त सब हैरान रह गए जब पप्पू यादव साधू-संतों की वेशभूषा धारण करके प्रदर्शन करने पहुंचे. राम मंदिर निर्माण में कथित चंदा घोटाले का विरोध करने के लिए उन्होंने साधु का रूप धारण कर एक नाटकीय प्रदर्शन किया. उनका यह अंदाज जहां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, वहीं दूसरी ओर इसने बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया. साधु के रूप में किए गए इस प्रदर्शन को लेकर पप्पू यादव के खिलाफ  FIR तक दर्ज हो गई है.

अलायंस में ही बिखराव, सपा ने झाड़ लिया पल्ला

पप्पू यादव के इस प्रदर्शन और उन पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद विपक्षी गठबंधन के भीतर मतभेद और बिखराव साफ नजर आने लगा है. गठबंधन के प्रमुख घटक दलों में से एक समाजवादी पार्टी ने पप्पू यादव के इस कदम से पूरी तरह खुद को अलग कर लिया है. सपा नेताओं का मानना है कि इस तरह का 'ड्रामा' जनहित और मंदिर के मुद्दे की गंभीरता को कमजोर करता है. सपा सांसद राम गोपाल यादव ने बयान दिया की पप्पू यादव द्वारा साधु की वेशभूषा में किया गया प्रदर्शन गलत है. हमारी पार्टी इस तरह के तौर-तरीकों का समर्थन नहीं करती. सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रामगोपाल यादव से लेकर सांसद राजीव राय तक ने इस मामले पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी का इस प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है.

राम मंदिर का मुद्दा एक, लेकिन रास्ते अलग

एक तरफ जहां पप्पू यादव पर चौतरफा हमले हो रहे हैं और कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है. वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह धार्मिक या मर्यादा से जुड़े मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाएगी. समाजवादी पार्टी भी राम मंदिर चंदा घोटाले पर सरकार से सवाल पूछ रही है, लेकिन उसका साफ कहना है कि वह अपने तरीके से गंभीर राजनीति करेगी, न कि किसी 'ड्रामा' का हिस्सा बनेगी. पप्पू यादव ने साधु की वेशभूषा पहनकर चंदा घोटाले पर नाटक के जरिए किया था. विरोध प्रदर्शन जिसके बाद उन पर FIR दर्ज हुई है और कल एक हमला भी हुआ. पप्पू यादव ने कहा है की उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है. हालंकि इस मामले पर दिल्ली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी हैं.

पप्पू यादव के कौन हुआ खिलाफ और किसका मिला साथ

राजीव राय और रामगोपाल यादव समेत प्रमुख नेताओं ने प्रदर्शन को गलत ठहराया और ख़ुद किनारा किया हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी और बाकी विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है. इसका गठबंधन पर भी असर दिख सकता है. संसद के मॉनसून सत्र के बीच विपक्षी गठबंधन के घटक दलों में राम मंदिर मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाते हुए तस्वीर देखने को मिल रही है. कांग्रेस अमित शाह की जवावदेही और इस्तीफे पर जम कर आक्रामक है. वहीं समाजवादी पार्टी राम मंदिर पर प्रतीकात्मक प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है.

क्या कमजोर होगी विपक्ष की एकजुटता? 

संसद के भीतर भाजपा को घेरने के लिए एकजुट दिख रहे विपक्ष के लिए यह घटनाक्रम किसी बड़े झटके से कम नहीं है. राम मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जहां विपक्ष को एक सुर में बोलना था, वहीं पप्पू यादव के 'नाटकीय तरीके' ने गठबंधन के बीच की दरार उजागर कर दी है. अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में गठबंधन इस बिखराव को संभाल पाता है या भाजपा इस अंदरूनी कलह को भुनाने में कामयाब रहती है.

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