लद्दाख के ग्रामीण इलाके में घर बनाने, दुकान खोलने या छोटी औद्योगिक इकाई शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए लैंड यूज की मंजूरी की प्रक्रिया अब आसान और तेज हो सकती है.
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नगरपालिका समितियों की सीमा से बाहर दो एकड़ तक के प्लॉट के लैंड यूज में बदलाव को मंजूरी देने का अधिकार मुख्य सचिव और डिविजनल कमिश्नर को दे दिया है. इससे पहले प्लॉट का आकार चाहे जितना हो, ऐसे सभी आवेदनों पर फैसला उपराज्यपाल ही लेते थे.
लद्दाख प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों को मंजूरी देने का अधिकार सौंपे जाने से विकास प्रस्तावों पर तेजी से फैसला हो सकेगा. इससे गांवों और नगरपालिका सीमा से बाहर रहने वाले लोगों की प्रक्रियागत परेशानियां भी कम होंगी.
किस आकार के प्लॉट को कौन देगा मंजूरी?
नई व्यवस्था के तहत दो कनाल से अधिक और चार कनाल तक के प्लॉट के लैंड यूज में बदलाव को डिविजनल कमिश्नर मंजूरी दे सकेंगे. चार कनाल से अधिक और दो एकड़ तक की जमीन से जुड़े आवेदन मुख्य सचिव के स्तर पर मंजूर किए जा सकेंगे.
दो एकड़ से अधिक जमीन के लैंड यूज में बदलाव के लिए उपराज्यपाल की मंजूरी अब भी जरूरी होगी. इस फैसले से घर बनाने, दुकान या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने, छोटी औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने और मिश्रित इस्तेमाल वाली इमारतें बनाने की योजना बना रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि निर्माण से पहले जरूरी सभी मंजूरियां खत्म हो गई हैं.
राजस्व विभाग को आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है. नया फैसला 8 जुलाई को घोषित एक अन्य राहत के बाद आया है.
उस व्यवस्था के तहत दो कनाल तक की जमीन पर आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या मिश्रित इस्तेमाल वाले विकास के लिए पहले से लैंड यूज मंजूरी लेने की जरूरत खत्म कर दी गई थी.
नई घोषणा के जरिए प्रशासन ने लैंड यूज से जुड़े बदलावों को नगरपालिका सीमा के बाहर के क्षेत्रों तक बढ़ाया है और बड़े प्लॉट से जुड़े मामलों में मंजूरी का अधिकार वरिष्ठ अधिकारियों को दिया है.
हालांकि, घोषणा में यह साफ नहीं किया गया है कि दो कनाल तक के प्लॉट को मिली पिछली छूट ग्रामीण क्षेत्रों में भी उन्हीं शर्तों के साथ लागू होगी या नहीं.
राजस्व विभाग के दिशा-निर्देशों में छोटे ग्रामीण प्लॉट, जरूरी दस्तावेजों और अन्य मंजूरियों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है.
लद्दाख में अंतरिम नियमों की जरूरत क्यों पड़ी?
प्रशासन के मुताबिक, लद्दाख में मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान अधिसूचित नहीं होने के कारण विकास प्रस्ताव और बिल्डिंग परमिशन से जुड़े आवेदन प्रभावित हो रहे थे.
मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान आमतौर पर यह तय करते हैं कि किन इलाकों में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या मिश्रित इस्तेमाल वाला विकास किया जा सकता है.
इनके अभाव में लोगों के बीच अपनी जमीन के इस्तेमाल को लेकर असमंजस था. प्रशासन ने यह भी कहा कि मंजूरी के सभी अधिकार उपराज्यपाल कार्यालय के पास होने के कारण फैसलों में देरी हो रही थी.
उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा, “केवल इसलिए नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए कि वैधानिक योजना से जुड़े दस्तावेज अभी अधिसूचित नहीं किए गए हैं.”
उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव और डिविजनल कमिश्नर को विकास प्रस्तावों पर फैसला लेने का अधिकार मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बिना अनावश्यक प्रक्रियागत अड़चनों के घर बना सकेंगे, कारोबार शुरू कर सकेंगे और वैध विकास गतिविधियां कर सकेंगे.
उपराज्यपाल के मुताबिक, इस अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य विकास को आसान बनाने के साथ पर्यावरण और प्लानिंग से जुड़ी चिंताओं का भी ध्यान रखना है.
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