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Sawan First Somwar: सावन के पहले सोमवार करें बाबा महाकाल के दर्शन; भस्म आरती का बदला समय, 40 मिनट में दर्शन

सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. तड़के 2:30 बजे भस्म आरती हुई, जिसमें हजारों भक्त शामिल हुए. सावन-भादौ के लिए भस्म आरती का समय बदला है और प्रशासन की विशेष व्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को महज 40 मिनट में बाबा महाकाल के दर्शन हो रहे हैं.

Sawan First Somwar: सावन के पहले सोमवार करें बाबा महाकाल के दर्शन; भस्म आरती का बदला समय, 40 मिनट में दर्शन
  • सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे.
  • मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती का समय बदलकर सुबह 2:30 बजे से शुरू कर दिया था और यह व्यवस्था 7 सितंबर तक लागू है.
  • प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए त्रिवेणी संग्रहालय से प्रवेश और टनल से निकास की व्यवस्था की.

सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. रविवार रात से ही हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए कतारों में पहुंचने लगे थे. विशेष अवसर को देखते हुए भस्म आरती का समय भी बदला गया, जिसके चलते तड़के 2:30 बजे से आरती शुरू हुई. मंदिर प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाओं का असर यह रहा कि भारी भीड़ के बावजूद कई श्रद्धालुओं ने महज 40 मिनट में बाबा महाकाल के दर्शन कर लिए.  

सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है. वहीं सावन सोमवार का महत्व और भी बढ़ जाता है. यही वजह रही कि रविवार रात से ही देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचने लगे. देर रात से मंदिर के बाहर दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गई थीं. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ भस्म आरती का लाभ भी लिया.

भस्म आरती में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु

सोमवार तड़के 2:30 बजे भस्म आरती शुरू हुई. बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं के अलावा बड़ी संख्या में अन्य भक्तों ने भी चलित दर्शन व्यवस्था के माध्यम से बाबा महाकाल के दर्शन किए. आरती के दौरान मंदिर परिसर शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया. भक्तों के "हर-हर महादेव" और "जय श्री महाकाल" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.

सावन-भादौ के लिए बदला गया भस्म आरती का समय

सावन और भादौ माह को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने 30 जुलाई से भस्म आरती और मंदिर खुलने के समय में बदलाव किया है. अब प्रातःकालीन पट सुबह 4 बजे के बजाय 3 बजे खोले जा रहे हैं और सुबह 5 बजे तक भस्म आरती की जा रही है. वहीं प्रत्येक सोमवार को भस्म आरती का समय सुबह 2:30 बजे से 4:30 बजे तक निर्धारित किया है. यह व्यवस्था 7 सितंबर तक लागू रहेगी. इसके बाद 8 सितंबर से मंदिर की व्यवस्थाएं पूर्ववत हो जाएंगी.

प्रशासन की तैयारी से आसान हुए दर्शन

सावन सोमवार पर भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए हैं. आम श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संग्रहालय से प्रवेश दिया जा रहा है, जबकि बड़े गणेश मंदिर के पास टनल के जरिए निकास की व्यवस्था की गई है. शीघ्र दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए द्वार नंबर-1 निर्धारित किया है.

सिर्फ 40 मिनट में हो रहे बाबा महाकाल के दर्शन

भीड़ प्रबंधन के लिए बनाई गई नई व्यवस्था का सकारात्मक असर देखने को मिला. प्रवेश और निकास मार्गों को व्यवस्थित किए जाने के कारण श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा. कई श्रद्धालु करीब 40 मिनट में बाबा महाकाल के दर्शन कर बाहर निकलते दिखाई दिए. मंदिर प्रशासन का उद्देश्य दर्शन व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाए रखना है.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रवेश मार्गों पर पेयजल, टिकट काउंटर और जूता स्टैंड की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. प्रमुख स्थानों पर जूता स्टैंड बनाए गए हैं, जिनमें त्रिवेणी संग्रहालय, महाकाल महालोक प्लाजा, विक्रम टीला, द्वार नंबर-1, हरसिद्धि चौराहा, मानसरोवर भवन और नीलकंठ प्रवेश द्वार शामिल हैं.

कांवड़ यात्रियों के लिए अलग दर्शन व्यवस्था

श्रावण-भादौ महीने में बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रियों के आने को देखते हुए उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है. कांवड़ यात्रियों को द्वार नंबर-1 और हरसिद्धि चौराहा स्थित विशेष मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा. उन्हें मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को जल अर्पित करने की अनुमति रहेगी. हालांकि शनिवार, रविवार और सोमवार को श्रद्धालुओं की अधिक संख्या होने के कारण कांवड़ दलों को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.

प्रमुख स्थानों पर पार्किंग की सुविधा

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है. इनमें श्री महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र के पास का खाली मैदान, मेघदूत वन पार्किंग, नीलकंठ पार्किंग, चारधाम पार्किंग, कर्कराज पार्किंग और कार्तिक मेला ग्राउंड पार्किंग शामिल हैं. इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को वाहन पार्किंग की सुविधा आसानी से मिल सकेगी.

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