भारत में एक नौकरीपेशा इंसान आमतौर पर सुबह 7 बजे की अलार्म वाली घड़ी से उठते हैं. 9 बजकर 15 मिनट पर ऑफिस के लिए यूपीआई से ऑटो का पैसा देते हैं और 3 बजकर 30 मिनट पर शेयर मार्केट का आखिरी ट्रेंड देखते है. आपकी घड़ी का समय नहीं बदलेगा, लेकिन अब ये सभी काम एक ही सेकंड पर, एक ही घड़ी से चलेंगे. केंद्र सरकार ने 'वन नेशन, वन टाइम' पहल के तहत Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 को लागू करने का फैसला कर लिया है, ये मार्च 2027 से लागू हो जाएगा.
'वन नेशन, वन टाइम' से आपके लिए क्या बदलेगा?
'वन नेशन, वन टाइम' के लागू होने के बाद आपको अपनी कलाई घड़ी या मोबाइल की घड़ी बदलने की जरूरत नहीं है. आप जैसे पहले IST पर चलते थे, वैसे ही चलते रहेंगे. बदलाव आपकी घड़ी में नहीं, उस सिस्टम में होगा जो आपकी घड़ी पर भरोसा करता है. इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि आपने रात 11 बजकर 59 मिनट पर किसी को 10 हजार रुपये ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किये, लेकिन बैंक के सर्वर का समय 2 सेकंड आगे-पीछे था, तो ट्रांजैक्शन फेल या विवाद में पड़ गया. या रेलवे का टिकट बुकिंग सिस्टम और आपके फोन के समय में आधे सेकंड का अंतर आ गया. इन्हीं छोटी-छोटी गलतियों को खत्म करने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि अब से देश का हर कानूनी, प्रशासनिक, बैंकिंग और डिजिटल काम सिर्फ और सिर्फ आईएसटी पर चलेगा, जिसका सोर्स एनपीएल दिल्ली की परमाणु घड़ी होगी.
सरकार को 'वन नेशन, वन टाइम' की जरूरत क्यों पड़ी?
आज हमारा पूरा देश एक सेकंड के भरोसे पर चलता है. UPI, स्टॉक एक्सचेंज, 5G नेटवर्क, बिजली ग्रिड, साइबर सिक्योरिटी- ये सब नैनो सेकंड की एक्यूरेसी मांगते हैं. अब तक कई प्राइवेट कंपनियां और सर्वर अमेरिका के GPS टाइम पर निर्भर थीं, जिसे कभी भी रोका जा सकता है. सरकार का कहना है कि ये सिर्फ समय का नियम नहीं, बल्कि डिजिटल संप्रभुता और सुरक्षा का मामला है. अगर देश का अपना सटीक और सुरक्षित टाइम सोर्स होगा, तो साइबर हमले, बैंकिंग फ्रॉड और डेटा में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो जाएगी. सरकार की बात का सीधे शब्दों में समझाएं, तो 'वन नेशन, वन टाइम' से आपका समय वही रहेगा, पर आपका टाइम अब ज्यादा सिक्योर हो जाएगा.
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'वन नेशन, वन टाइम' को लेकर ये चुनौती भी हैं
'वन नेशन, वन टाइम' सिर्फ बैंकिंग और यूपीआई तक ही सीमित नहीं होगा, इससे क्रिमिनलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में भी मदद मिलेगी. दरअसल, किसी साइबर क्राइम, CCTV फुटेज या डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट में समय सबसे बड़ा सबूत होता है. अगर सभी सिस्टम एक ही समय से चलेंगे, तो कोर्ट में टाइम को लेकर विवाद नहीं होगा. साथ ही इससे देश की 5G, बिजली ग्रिड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, डिफेंस नेटवर्क जैसे क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर अब विदेशी GPS पर निर्भर नहीं रहेंगे. इससे दुश्मन देश द्वारा GPS जैमिंग या स्पूफिंग करके हमारे सिस्टम को हैक करने का खतरा खत्म हो जाएगा. यह डिजिटल निर्भरता की दिशा में भारत का बड़ा कदम है. हालांकि, इसमें सबसे बड़ी चुनौनी ये आने वाली है कि देश की सभी कंपनियों, बैंकों, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और सरकारी विभागों को अपने सर्वर को NPL के टाइम सर्वर से जोड़ना होगा. इसके लिए नेटवर्क टीम प्रोटोकॉल (NTP) इंफ्रास्ट्रक्चर लगाना होगा. सरकार ने इसके लिए मार्च 2027 तक का समय दिया है.
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