- MDR शुल्क के विरोध में पेट्रोल पंप डीलर्स का बड़ा फैसला
- MP के 4700 पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से ज्यादा UPI भुगतान बंद होने की तैयारी
- मुंबई से भोपाल तक पेट्रोल डीलर्स ने सरकार को लिखा पत्र
पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. मध्यप्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि यदि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर प्रस्तावित MDR शुल्क वापस नहीं लिया गया तो 16 अक्टूबर से प्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंप ऐसे भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे. इसी बीच मुंबई पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI को पत्र लिखकर पेट्रोल पंपों को MDR शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग की है. इससे डिजिटल भुगतान और फ्यूल रिटेल सेक्टर में नई बहस शुरू हो गई है.
16 अक्टूबर से लागू हो सकता है फैसला
मध्यप्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने घोषणा की है कि यदि सरकार MDR शुल्क को वापस नहीं लेती, तो 16 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पेट्रोल पंपों पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे.

मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स संगठन का पत्र
एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार ₹2,000 तक के UPI भुगतान पहले की तरह जारी रहेंगे, लेकिन इससे अधिक राशि के भुगतान पर रोक लगाई जा सकती है. यह निर्णय प्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंपों पर लागू हो सकता है.
मुंबई के पेट्रोल पंपों पर यूपीआई पेमेंट बंद होने की संभावना; वित्त मंत्री और RBI को भेजा गया पत्र
वहीं मुंबई पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय रिजर्व बैंक को पत्र लिखकर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से एमडीआर शुल्क में छूट देने की मांग की है. पेट्रोल पंप मालिकों के संगठन ने 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लागू करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है. केंद्र सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की गई है.
एसोसिएशन ने कहा यूपीआई पर हर लेनदेन पर 5 रुपये का यह शुल्क फ्यूल रिटेलर्स के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है. इसलिए, यह मांग की गई है कि पेट्रोल आउटलेट्स को 'फिक्स्ड चार्ज' और 'प्रतिशत-आधारित एमडीआर', दोनों से पूरी तरह छूट दी जाए.
MDR शुल्क बना विवाद की जड़
पेट्रोल पंप संचालकों का विरोध प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को लेकर है. जानकारी के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर एक निश्चित शुल्क लगाए जाने की संभावना है. पेट्रोलियम डीलर्स का कहना है कि ईंधन व्यवसाय पहले ही बहुत कम और तय कमीशन पर चलता है. ऐसे में हर डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क उनके मुनाफे को समाप्त कर सकता है. एसोसिएशन के मुताबिक ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक UPI भुगतान पर लगभग ₹5 MDR और उस पर 18 प्रतिशत GST मिलाकर कुल करीब ₹5.90 का अतिरिक्त खर्च आता है.
हर महीने हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ
एसोसिएशन का दावा है कि एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन लगभग 100 ऐसे लेनदेन होते हैं जो ₹2,000 से अधिक के होते हैं. ऐसी स्थिति में प्रतिदिन करीब ₹590 और महीने में लगभग ₹17,400 से ₹17,700 तक अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यदि पूरे मध्यप्रदेश के 4,700 पेट्रोल पंपों को जोड़कर देखा जाए तो यह अतिरिक्त आर्थिक भार करोड़ों रुपये में पहुंच सकता है. डीलर्स का कहना है कि बढ़ती बिजली लागत, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्चों के बीच यह नया बोझ व्यवसाय को और मुश्किल बना देगा.
व्यापारियों के संगठन ने भी जताई चिंता
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है. CAIT का कहना है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए वर्षों से UPI को प्रोत्साहित किया गया है. अब यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इससे डिजिटल लेनदेन की रफ्तार प्रभावित हो सकती है. संगठन का मानना है कि यह केवल कुछ रुपये के शुल्क का मामला नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान नीति की दिशा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है.
तेल कंपनियों पर खर्च डालने की मांग
मध्यप्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि MDR शुल्क लगाया भी जाता है तो इसका बोझ डीलरों की बजाय तेल कंपनियों को उठाना चाहिए. एसोसिएशन का तर्क है कि ग्राहक द्वारा चुने गए भुगतान माध्यम का खर्च पेट्रोल पंप संचालकों पर नहीं डाला जाना चाहिए, क्योंकि वे पहले से तय मार्जिन पर कारोबार करते हैं और ईंधन की कीमत अपने स्तर पर नहीं बढ़ा सकते.
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