विज्ञापन

एक राष्ट्र एक चुनाव का प्रस्ताव असंवैधानिक... संसदीय समिति के सामने पी चिदंबरम का दावा

ये विधेयक दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किए गए थे, जिसके बाद इन्हें विचार के लिए संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था. इन विधेयकों को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है.

एक राष्ट्र एक चुनाव का प्रस्ताव असंवैधानिक... संसदीय समिति के सामने पी चिदंबरम का दावा
पी चिदंबरम ने एक देश एक चुनाव का जमकर विरोध किया.
  • चिदंबरम ने लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव कराने के प्रस्ताव का संसद की संयुक्त समिति में विरोध किया
  • चिदंबरम ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने वाले विधेयक संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हैं और असंवैधानिक हैं
  • सागरिका घोष ने भी विधेयक का विरोध करते हुए निर्वाचन आयोग को अधिक अधिकार मिलने की चिंता जताई

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव का सोमवार को संसद की संयुक्त समिति के समक्ष पुरजोर विरोध किया.उन्होंने इस विचार को ही ‘‘विकृत'' तथा ‘‘असंवैधानिक'' करार दिया. पूर्व गृह एवं वित्त मंत्री ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव' के तहत देशभर में एक साथ चुनाव कराने की कवायद ‘‘बिना सोचे-समझे'' उठाया गया कदम है.

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेता ने संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति के समक्ष अपनी राय रखी. इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराना है.

चिदंबरम की दलील

सूत्रों के मुताबिक, चिदंबरम ने समिति से कहा कि एक साथ चुनाव कराने से संबंधित विधेयक ‘‘असंवैधानिक'' हैं. उन्होंने तर्क दिया कि प्रत्येक विधानमंडल का कार्यकाल पांच वर्ष के लिए होता है और उसके कार्यकाल को कम करना संविधान के मूल ढांचे का सीधे तौर पर उल्लंघन होगा. वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि उनकी अंतररात्मा उन्हें इन विधेयकों का समर्थन करने की अनुमति नहीं देती. उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार के पास कानून पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत नहीं है.

और किसने किया विरोध

समिति की सदस्य और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की नेता सागरिका घोष ने भी विधेयक का विरोध किया और कहा कि इससे निर्वाचन आयोग को ‘‘बेलगाम'' अधिकार मिल जाएंगे. करीब 10 पद्म पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों के एक समूह ने भी समिति के समक्ष अलग-अलग अपनी राय रखी. इनमें तरलोचन सिंह, नवीन खन्ना, मीनाक्षी जैन और नीरू कुमार शामिल थे.पद्म पुरस्कार से सम्मानित कुछ लोगों ने एक साथ चुनाव कराने की पहल का समर्थन किया, जबकि अन्य ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे देश में ‘‘अराजकता'' पैदा हो सकती है. 

क्या पहले कभी हुए एक साथ चुनाव

ये विधेयक दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किए गए थे, जिसके बाद इन्हें विचार के लिए संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था. इन विधेयकों को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है. समिति ने चरणबद्ध तरीके से लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कोविंद की अध्यक्षता वाली इस उच्चस्तरीय समिति के सदस्य थे. संविधान लागू होने के बाद 1951 से 1967 तक लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हुए थे.पहला आम चुनाव 1951-52 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ हुआ था. यह व्यवस्था 1957, 1962 और 1967 के अगले तीन आम चुनावों में भी जारी रही.

फिर कैसे अलग-अलग होने लगे चुनाव

हालांकि, कुछ राज्य विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण 1968 और 1969 में एक साथ चुनावों का यह चक्र बाधित हो गया. फिर चौथी लोकसभा भी 1970 में समय से पहले भंग कर दी गई और 1971 में नए चुनाव हुए. पहली, दूसरी और तीसरी लोकसभा के विपरीत पांचवीं लोकसभा का कार्यकाल आपातकाल लागू किए जाने के कारण संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत 1977 तक बढ़ाया गया था. इसके बाद लोकसभा के केवल कुछ कार्यकाल ही पूरे पांच वर्ष चले, जिनमें आठवीं, दसवीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा शामिल हैं. छठी, सातवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा सहित अन्य सदनों को समय से पहले भंग कर दिया गया था. राज्य विधानसभाओं को भी इसी तरह के व्यवधानों का सामना करना पड़ा है. समय से पहले विधानसभा भंग होने और कार्यकाल बढ़ाए जाने की घटनाएं वर्षों से सामने आती रही हैं. इन घटनाक्रमों ने एक साथ चुनाव के चक्र को पूरी तरह बाधित कर दिया और इसके परिणामस्वरूप देश में अलग अलग समय पर चुनाव होने लगे.

यह भी पढ़ें-

जनगणना की कवायद NRC लागू करने का एक और चोर दरवाजा... ममता बनर्जी

खरगे जी के साथ जो हुआ, उसे देखिए... आरक्षण पर सवाल पूछा गया तो बोले चिराग पासवान

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
P Chidambaram, P Chidambaram In Parliament, One Nation One Election, One Nation One Election Debate, One Nation One Election Committee
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com