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UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगी फीस, दिल्ली के व्यापारियों ने कहा- अब हम नकद भुगतान को बढ़ावा देंगे

2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क लागू करने के सरकार के फैसले के बाद व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है.

  • सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क लगाने का निर्णय लिया है.
  • यह शुल्क व्यापारी को देना होगा और ग्राहकों पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा.
  • व्यापारिक संगठन इस निर्णय से नाराज हैं और नकद भुगतान को बढ़ावा देने की संभावना जता रहे हैं.
नई दिल्ली:

2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क लगाने के सरकार के फैसले के बाद व्यापारिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है. दिल्ली के कई कारोबारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए वे ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की बजाय नकद लेनदेन के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं.

सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल कारोबारी भुगतानों के लिए नई व्यवस्था लागू की, जिसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा. इसके साथ ही जनवरी 2020 से लागू शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की व्यवस्था समाप्त हो गई है. नई व्यवस्था के अनुसार, 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये तक शुल्क वसूला जा सकेगा. सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी. लेकिन व्यापारियों का एक वर्ग इसे कारोबार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ मान रहा है.

हम नकद भुगतान को बढ़ावा देंगे : कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष

कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकार की पहल का समर्थन किया था. लेकिन अगर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे नकद भुगतान को प्रोत्साहित करेंगे. गुप्ता ने कहा, ‘‘हम पहले से ही लेनदेन शुल्क और 18 प्रतिशत जीएसटी (माल एवं सेवा कर) दे रहे हैं. अब अगर सरकार हमसे यूपीआई एमडीआर भी वसूलती है तो हम नकद भुगतान को बढ़ावा देंगे. जब सरकार यूपीआई भुगतान लेकर आई थी, तब हमने इसका समर्थन किया था.''

उन्होंने कहा, ‘‘अगर यूपीआई लेनदेन पर भी शुल्क लगाया जाता है तो हम इसका समर्थन नहीं करेंगे और नकद भुगतान को बढ़ावा देना शुरू करेंगे.'' नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित गुप्ता ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क के इस निर्णय के बाद अब कम मुनाफे पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यूपीआई भुगतान महंगा विकल्प बन जाएगा.

रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने क्या कहा? 

इधर, रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) ने बुधवार को कहा कि सरकार के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के फैसले से त्योहारों से पहले छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में हुई प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. सरकार ने करीब 6 साल तक यूपीआई भुगतान को पूरी तरह निःशुल्क रखने के बाद इस साल 15 अक्टूबर से इस मंच के जरिये कारोबारियों या दुकानदारों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की. इस शुल्क का भुगतान व्यापारी को करना होगा और ग्राहकों पर इसका बोझ नहीं पड़ेगा.

आरएआई ने अपने बयान में आगाह किया कि यह शुल्क भारत के सबसे छोटे खुदरा कारोबारियों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में वर्षों में हुई प्रगति को पीछे धकेल सकता है, वह भी ठीक ऐसे समय जब त्योहार आने वाले हैं. आरएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कुमार राजगोपालन ने कहा, ‘‘छोटे व्यापारी अब यह सोचेंगे कि नकदी स्वीकार करें या यूपीआई.''

आरएआई ने कहा कि नकदी की ओर वापसी से सरकार के औपचारिकरण के प्रयासों को भी नुकसान होगा, क्योंकि यूपीआई नेटवर्क से बाहर होने वाले लेनदेन अब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में दर्ज नहीं होंगे. यह उस दिशा के विपरीत है जिसे एक दशक की डिजिटलीकरण नीति के जरिये बनाने की कोशिश की गई है.

ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है : स्वदेशी जागरण मंच

वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने बुधवार को कहा कि सरकार को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के किसी भी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए. मंच ने कहा कि लेनदेन से जुड़ी लागत को देखते हुए ऐसा कदम उचित नहीं है. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यूपीआई के जरिये ऐसे भुगतान करने पर ग्राहकों को किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा.' मंत्रालय ने यह भी कहा, ‘‘एमडीआर व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है. यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है.'

भाषा इनपुट के साथ 

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