पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के पूर्व प्रिंसिपल नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि वे अवसाद में चले गए हैं. मन तो कर रहा है कि आत्महत्या कर लें. ऐसी सरकार के साथ जीने का मन नहीं कर रहा है. मनोचिकित्सक होने के बाद वे अवसाद में हैं. इतना दुख उन्हें मिल रहा है सोचे तक नहीं थे. उन्होंने कहा, "हम तो लोगों के दुखों का निवारण करते थे. हम सोचे थे हमारे मंत्री जी अभिभावक होंगे. हम लोगों का रहना ठीक नहीं है."
नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, "इस्तीफा दो, सेवनिवृत्त लो और पैसा लो घर जाओ, और अपना काम करो. समाज सेवा करो. और तुम लोगों को भी कह रहा हूं कि आप लोग भी अपना काम करो."
"मेरी कोई सुनवाई नहीं कर रहा"
उन्होंने कहा , "मेरी कोई भी सुनवाई नहीं कर रहा है, ना तो मुझसे मिलने की कोशिश हुई और ना ही बातचीत हो पा रही है. सब कुछ रद्द कर दी गई. मुझे मजबूर होकर आप लोगों के बीच (मीडिया) में आना पड़ा. मैं 1988 से पटना मेडिकल कॉलेज में हूं. गरिमामय मेरा जीवन रहा है. लगभग 24 से 30 साल तक प्रोफेसर रहा. इसके बाद प्रिंसिपल बना. अब नहीं हूं."
"स्पष्टीकरण पूछे बिना कार्रवाई हुई"
उन्होंने कहा, "मुझे कोई स्पष्टीकरण पूछे बिना पत्र दिया गया. दंडात्मक कार्रवाई की गई. ये स्वास्थ्य मंत्री का एक तानाशाही रवैया है, जो आने वाले समय में एक अंधेरी गली को खोलता है. अगर हम जैसे लोग, जो मनोचिकित्सक हैं, हमें ध्वस्त कर दिया गया तो किसी भी पदाधिकारी की गरिमा की गारंटी नहीं है."
"हम कोई अपराधी हैं, जो चूहा के बिल में घुस जाएंगे"
उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य मंत्री के कॉलेज में आने से पहले मैंने काम किया. सचिव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात हुई. इसके बाद उस रात मैं जल गया. मेरे बच्चे ने सारी रिपोर्ट और सभी को भेजा. फिर मुझे कह दिया गया कि मैं गायब हूं. हम कोई अपराधी हैं. चूहा के बिल में घुस जाएंगे." इतना तो देखना चाहिए कि जो अस्पताल में रोज आते थे आज क्यों नहीं आए. कहीं उनकी हत्या तो नहीं हो गई या उनका अपहरण तो नहीं कर लिया गया.
उन्होंने कहा, "मैं जिस घर में रहता हूं, अगर वहां मरीज जमा है, तो हम उसे डंडा से भगा देंगे क्या? उस घर में हम सरकारी गाड़ी नहीं लगाएंगे, जहां हम पैदा हुए हैं. जलने, कटने और मरने का पूर्व सूचना दिया जाता है क्या? हमारे साथ रात में दुर्घटना हो गई तो हम अपना राहत देखेंगे की सूचना देंगे."
ड्यूटी से गायब रहने पर हुई कार्रवाई
बिहार के हेल्थ मिनिस्टर के निरीक्षण में पीएमसीएच के प्रिंसिपल ड्यूटी से गायब थे. इसके बाद प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को प्राचार्य पद से हटा दिया गया. बिना छुट्टी लिए गैरहाजिर थे. जांच में सामने आया कि ड्यूटी के दौरान डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने निजी क्लीनिक में थे. इसे सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है.
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