पटना में अपराधियों ने ज्वेलर को झांसा देकर डेढ़ करोड़ का सोना लूट लिया. लूट इतनी फिल्मी अंदाज में की गई कि लुटेरे और कारोबारी के अलावा किसी को भनक तक नहीं लगी, घटना 23 जून की है. अब पुलिस ने मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. हालांकि, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड अब भी फरार है. पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए मुजफ्फरपुर, मोतिहारी में छापेमारी कर रही है. साथ ही ज्वेलर्स के 3 स्टाफ को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. सोना बरामद करना भी बाकी है.
ज्वेलर्स सचिन ने बताया कि उनके एक स्टाफ सोनू ने अपने एक परिचित प्रकाश के माध्यम से सोने की डेल का एक प्रस्ताव दिया. प्रकाश ने बताया कि आईजीआईएमएस के एक डॉक्टर मनोज कुमार को 1 किलो सोना खरीदना है, लेकिन वह दुकान पर आकर सोना नहीं खरीद सकते.
पाटलिपुत्रा कॉलोनी में डिलीवरी की डील
सचिन के मुताबिक, पहले उन्होंने दुकान के बाहर सोना देने से इनकार कर दिया, लेकिन लगातार भरोसा दिए जाने के बाद वह सोना देने को तैयार हुए. पहले 22 जून को कंकड़बाग में सोने की डिलीवरी की बात की गई, लेकिन वहां डिलीवरी नहीं हुई. बाद में पाटलिपुत्रा कॉलोनी में 23 जून को डिलीवरी देना तय हुआ.
नकाबपोश बदमाशों ने पैसा और सोना छीना
सचिन 23 जून की दोपहर सोना लेकर शिवलोक अपार्टमेंट पहुंचे. उनके साथ उनके स्टाफ सोनू, रोहित और प्रकाश भी थे. लेकिन ऊपर सिर्फ सचिन को बुलाया गया. वे फ्लैट नंबर 102 पहुंचे. वहां अमन, मनोज कुमार, बांके बिहारी, एनके सिंह पहले से मौजूद थे. सचिन के पहुंचने के बाद दो लोग कमरे में एक बड़ा सा बॉक्स लेकर आए, कहा गया कि इसमें डेढ़ करोड़ रुपए हैं. सचिन नोट गिनने लगे तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. अमन ने दरवाजा खोला. दरवाजा खोलते ही चार-पांच नकाबपोश हथियार लहराते हुए अंदर आए.
उन्होंने हथियार के बल पर सभी को एक कमरे में बंद कर दिया. मोबाइल छीन लिए, सोना और रुपया लेकर फरार हो गए. नकाबपोश बदमाश के साथ मास्टरमाइंड एनके सिंह भी फरार हो गया. कमरे में बंद लोगों ने बालकनी से नीचे खड़े स्टाफ को आवाज दी, तब दरवाजा खुला.
24 जून को कराया FIR
24 जून को सचिन ने पाटलिपुत्रा थाने में FIR दर्ज कराई. आरोपियों ने उन पर FIR दर्ज न कराने का दबाव बनाया. मनोज और बांके बिहारी सचिन की दुकान पर पहुंचे और मामला खत्म करने को कहने लगे. उन्होंने कहा कि वे एक सप्ताह के अंदर डेढ़ करोड़ रुपए दे देंगे. लेकिन सचिन ने पुलिस को सूचना दी और दोनों गिरफ्तार हुए. बाद में इन्हीं की निशानदेही पर तीसरा आरोपी भी गिरफ्तार किया गया.
प्लानिंंग के साथ लूट की गई
एसडीपीओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि यह प्लानिंग के साथ लूट की गई है. इस मामले में और आरोपियों की तलाश है. हम जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार करेंगे. पुलिस की जांच में में यह पता चला है कि मनोज कुमार डॉक्टर नहीं है. उसने डॉक्टर वाली बात झूठ कही थी. बांके बिहारी के फ्लैट में ही पूरी वारदात हुई. वह 2012 में धोखाधड़ी के मामले में जेल जा चुका है. तीसरा गिरफ्तार आरोपी अमन दिनकर गोलंबर के पास रहता है. वह अपने आप को स्टूडेंट बताता है, लेकिन रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा हुआ है.
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