Bengaluru School Peon Video: बेंगलुरु के एक सरकारी स्कूल में 38 साल से काम कर रहे प्यून का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को रुला गया. वीडियो में वह शख्स स्कूल की घंटी बजाते हुए दिखाई देता है , लेकिन इस बार आख़िरी बार. जैसे ही घंटी की आवाज़ गूंजी, वहां मौजूद बच्चे और स्टाफ भावुक हो गए.
1986 से अब तक, एक लंबी सेवा यात्रा
बेंगलुरु के बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल में इस प्यून ने साल 1986 में स्कूल में जॉइन किया था. तब से लेकर आज तक हर सुबह और दोपहर, उसी समर्पण के साथ घंटी बजाना, बच्चों की मदद करना, स्कूल का माहौल सजा कर रखना, यही उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया था, स्कूल स्टाफ के मुताबिक, वह हमेशा मुस्कुराता रहता था और बच्चों से अपने बच्चों जैसा व्यवहार करता था.
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देखें Video:
स्कूल की धड़कन का हिस्सा थे
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर (@amikutty_) नाम के यूजर ने शेयर किय था. वीडियो को अबतक 1 करोड़ 57 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और 27 लाख से ज्यादा लोग इसे लाइक कर चुके हैं. कैप्शन में लिखा था, "38 साल बाद, दास अंकल ने अपनी आखिरी घंटी बजाई - वो शख़्स जिसने कॉटन्स की हर सुबह, हर याद को अपने में समेट लिया. उनकी मुस्कान, उनका शांत समर्पण, उनकी उपस्थिति - ये सब स्कूल की धड़कन का हिस्सा थे. आज, जब उन्होंने अपनी आखिरी घंटी बजाई, हम उनका जश्न मना रहे हैं - दास अंकल, जिन्होंने समय को भी अपना सा एहसास कराया."
'समर्पण को सलाम'
जब यह वीडियो ऑनलाइन आया, तो हजारों लोगों ने इसे शेयर किया. एक यूज़र ने लिखा - "उन्होंने सिर्फ घंटी नहीं बजाई, उन्होंने 38 साल की यादें भी बजाईं." दूसरे ने लिखा- ''ऐसे ईमानदार लोग दुनिया को एक बेहतर जगह बनाते हैं.'' वीडियो पर कमेंट आया- "सम्मान", "शुद्ध आत्मा", "उनके समर्पण को सलाम."
काम छोटा या बड़ा नहीं, नीयत मायने रखती है
इस प्यून ने यह साबित कर दिया कि किसी भी काम की असली कीमत उसमें लगाए गए दिल और ईमानदारी से तय होती है. उसकी आख़िरी घंटी सिर्फ एक आवाज़ नहीं थी, बल्कि दशकों की सेवा, सादगी और लगन का प्रतीक थी.
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