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घर लौटने के लिए 30% सैलरी छोड़ने को तैयार था पुणे का कर्मचारी, दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने बदल दी जिंदगी

दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने इस इंटरव्यू का किस्सा अपने सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

घर लौटने के लिए 30% सैलरी छोड़ने को तैयार था पुणे का कर्मचारी, दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने बदल दी जिंदगी
दिल्ली की एक कंपनी के एंटरप्रेन्योर ने उसकी सैलरी कम नहीं करने का फैसला किया. (सांकेतिक तस्वीर)
Pexels

Viral Post: 'मैं पिछले 7 सालों से पुणे में काम कर रहा हूं. मैं ना तो ठीक से खा पा रहा हूं, ना ही ठीक से सो पा रहा हूं. मुझे छुट्टियां नहीं मिलतीं. बस काम में ही पूरा दिन निकल जाता है. अब मैं इस लाइफ से छुट्टी चाहता हूं. मैं घर लौटना चाहता हूं और अपने माता-पिता के साथ रहना चाहता हूं. मुझे 30 परसेंट कम सैलरी भी मिलेगी, तब भी मैं काम करने के लिए तैयार हूं. मुझे बस एक ऐसी नौकरी चाहिए, जहां से मैं रोज शाम अपने घर जा सकूं, और परिवार के साथ सुकून से रह सकूं.' जब इंटरव्यू देने आए इस शख्स की बात दिल्ली के एंटरप्रेन्योर परम मलिक ने सुनी, तो वो भी सोचने पर मजबूर हो गए.

'वह रोने ही वाला था'

सीवी क्राफ्ट के सीईओ परम ने इस किस्से को अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल से शेयर करते हुए कहा, 'मुझे पता था कि वह कोई शॉर्टकट नहीं ढूंढ़ रहा था. मुझे पता था कि मेरे पास बजट है. मुझे पता था कि वह होशियार है और इस काम के लिए एकदम सही है. इसलिए मैंने उसे काम पर रख लिया और उसकी सैलरी उतनी ही रखी जितनी उसे पहले मिल रही थी. उसने मुझे धन्यवाद दिया, और उसकी आवाज भर आई, जैसे वह रोने ही वाला हो. कुछ ही दिनों बाद वह अपने घर वापस आ गया और उसने हमारे साथ काम करना शुरू कर दिया. अगले क्वार्टर में वह सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाला कर्मचारी रहा.'

'एक दिन वो लड्डू लेकर आया'

परम ने बताया, 'एक दिन वह अपनी मां के बनाए लड्डू लेकर आया और बोला- सर, पुणे में मुझे जितनी सैलरी मिलती थी, यहां भी उतनी ही मिल रही है, लेकिन मैं यहां पहले से कहीं ज्यादा पैसे बचा पा रहा हूं. मुझे काम पर रखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. तब मैंने उससे कहा- तुम इसके हकदार थे.' परम ने कहा कि कभी-कभी सफलता पाने की दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि हमारे लिए असल में क्या ज्यादा जरूरी है.

यहां पढ़ें पूरी पोस्ट:-

सोशल मीडिया पर मिले ये रिएक्शन्स

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद लोग कमेंट्स में अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

एक यूजर ने लिखा, 'कभी-कभी कर्मचारी पैसों के लिए नहीं, बल्कि परिवार की खातिर शहर छोड़कर चले जाते हैं. यह एक बहुत ही सोच-समझकर लिया गया हायरिंग का फैसला है.'

दूसरे यूजर ने लिखा, 'एक खुश कर्मचारी आपकी सबसे मजबूत एसिट बन सकता है.'

तीसरे यूजर ने लिखा, 'आपने उसे सिर्फ नौकरी ही नहीं दी, बल्कि उसे अपने परिवार के साथ रहने का मौका भी दिया.'

चौथे यूजर ने लिखा, 'मैं अपने आंसू नहीं रोक पाया, क्योंकि अभी मुझे नौकरी से निकाल दिया गया है और मैं इस स्थिति को समझता हूं.'

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