आज इस दौर में जहां चंद पैसों के लिए ईमान डगमगा जाता है, वहां महाराष्ट्र से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सीधे आपके दिल को छू लेगी. ये कहानी है ईमानदारी की, किस्मत के कनेक्शन की और उस इंसानियत की, जो आज भी हमारे बीच जिंदा है.
एक 75 साल की बुजुर्ग महिला, पति बीमार, और सफर के दौरान जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई के 24 हजार रुपये कहीं खो जाएं. क्या बीतेगी उस पर. महाराष्ट्र की रहने वाली कसाबाई गायकवाड़ के साथ भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ था. वो अपने बीमार पति के साथ बस में सफर कर रही थीं, तभी पैसों से भरा उनका छोटा सा बैग कहीं गुम हो गया. उन्होंने तो पैसे वापस मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी. लेकिन कहते हैं ना, ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं.
ईमानदारी की मिसाल बना कंडक्टर राजू
हुआ यूं कि जब बस अपना सफर खत्म करके मालेगांव डिपो पहुंची, तो कंडक्टर राजू और ड्राइवर ने रूटीन चेकिंग के लिए बस का मुआयना किया. तभी राजू की नजर एक सीट पर छूटे हुए बैग पर पड़ी. बैग खोला तो उसमें 24 हजार रुपये कैश और एक मेडिकल पर्ची थी. पर्ची पर नाम लिखा था- कसाबाई गायकवाड़. राजू ने उस बुजुर्ग महिला का करीब एक घंटे तक बस स्टैंड पर इंतजार किया. उसने पूछताछ काउंटर पर भी बता दिया कि अगर कोई रोता-बिलखता अपने पैसे ढूंढता आए, तो उसे मेरे पास भेज देना. लेकिन कोई नहीं आया.
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इंतजार में बीता एक साल से ज्यादा का वक्त
महीनों बीत गए. राजू ने उस पर्ची पर लिखे नंबर पर भी कई बार फोन घुमाया, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. ऐसे ही देखते-देखते काफी वक्त गुजर गया. लेकिन राजू ने वो पैसे अमानत की तरह संभाल कर रखे.
और फिर हुआ एक चमत्कार...
लेकिन किस्मत को तो इन दोनों को मिलवाना ही था. करीब दो साल बाद एक दिन राजू अपनी बस में ड्यूटी पर था. तभी एक बुजुर्ग महिला उसकी बस में चढ़ीं और मालेगांव का टिकट मांगा. महाराष्ट्र में 75 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए बस का सफर मुफ्त है. इसलिए राजू ने नियम के मुताबिक, उनकी उम्र वेरिफाई करने के लिए उनसे आधार कार्ड मांगा.
जैसे ही राजू ने आधार कार्ड पर नजर दौड़ाई, उसके पैर वहीं ठिठक गए. उस पर नाम लिखा था- कसाबाई गायकवाड़. राजू ने फौरन उनसे बातचीत की और तसल्ली कर ली कि ये वही महिला हैं जिनके 24 हजार रुपये सालों पहले उसकी बस में छूट गए थे.
राजू उन्हें पूरे सम्मान के साथ सीधा बस डिपो लेकर पहुंचा. उसने अपने बड़े अफसरों को पूरी कहानी बताई और जरूरी कागजी कार्रवाई के बाद वो 24 हजार रुपये कसाबाई के हाथों में सौंप दिए. जिस पैसे को पाने की आस वो सालों पहले छोड़ चुकी थीं, उसे वापस पाकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. खुशी और जज्बात से भरी कसाबाई ने राजू को ढेरों दुआएं दीं और शगुन के तौर पर 1100 रुपये इनाम भी दिया.
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