महाराष्ट्र में कैब चलानी है तो मराठी में बात करनी होगी. इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने कानून में संशोधन का ही प्रस्ताव रख दिया है. इसके अनुसार मराठी भाषा की समझ जरूरी होगी. यदि कोई कैब ड्राइवर मराठी नहीं बोलता है या बोल नहीं पाता है तो फिर उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है या फिर रद्द भी किया जा सकता है. राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक का वक्त दिया गया था. अब इसमें इजाफा नहीं किया जाएगा. महाराष्ट्र मोटर वीकल्स रूल्स, 1989 में प्रस्तावित संशोधन के तहत मोटर कैब के ड्राइवर के लिए मराठी की नॉलेज जरूरी होगी.
प्रस्तावित संशोधन की ड्राफ्ट कॉपी मंत्री सरनाइक ने मीडिया के साथ भी शेयर की है. सरनाइक ने कहा, 'मराठी की वर्किंग नॉलेज जरूरी होगी. इससे लोगों से बातचीत करने में आसानी होगी. सफर सुखद और सुरक्षित रहेगा. इससे भविष्य में नियमों को अच्छे से लागू करने में भी मदद मिलेगी क्योंकि ड्राइवरों की स्थानीय भाषा की समझ भी अच्छी होगी.' ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि ड्राइविंग लाइसेंस देते समय अथॉरिटी की ओर से यह लिखकर दिया जाएगा कि आपको मराठी सीखने के लिए एक महीने का वक्त दिया जाता है. यदि कोई इस अवधि में मराठी नहीं सीख पाता है तो फिर एक्शन लिया जाएगा.
मराठी न बोल पाने वाले नहीं चला सकेंगे टैक्सी, लाइसेंस भी रद्द होगा
नए नियमों के तहत कार, टैक्सी और ऑटो चलाना आना ही काफी नहीं होगा. अब चालकों को मराठी बोलना और समझना भी होगा. यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो फिर महाराष्ट्र की सड़कों पर टैक्सी नहीं चला सकेंगे. प्रस्ताव है कि मराठी न जानने वाले ड्राइवरों का लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित हो सकता है. फिर भी उन्होंने मराठी नहीं सीखी तो स्थायी तौर पर उनका लाइसेंस रद्द हो सकता है. हालांकि लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद भी ड्राइवरों को मौका दिया जाएगा कि वे अपना पक्ष रख सकें.
लाइसेंस रीन्यू कराने पर भी मराठी बोलकर दिखाना होगा
इसके अलावा लाइसेंस को रीन्यू कराने और नए बनवाने पर भी मराठी बोलकर दिखाना होगा. मराठी बोलने में पारंगत लोगों को ही लाइसेंस जारी होंगे और जिन्हें मराठी नहीं आएगी या कम आएगी, उन्हें एक महीने का वक्त दिया जाएगा. बता दें कि महाराष्ट्र में लंबे समय से मराठी को लेकर आंदोलन होते रहे हैं. राज ठाकरे की मनसे, उद्धव ठाकरे की शिवसेना जैसे दल इस मांग को उठाते रहे हैं. इसके अलावा मौजूदा देवेंद्र फडणवीस सरकार ने भी इसे सही माना है. एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि संबंधित प्रस्ताव पूरी तरह से चैयार है. कानून मंत्रालय से मंजूरी के बाद इसे जारी किया जाएगा.
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