Viral Video Navratri 2026: बलूचिस्तान के दुर्गम पहाड़ों और रेगिस्तान के बीच स्थित हिंगलाज माता मंदिर आस्था का एक ऐसा केंद्र है, जो भारत-पाकिस्तान की सीमाओं से परे है. हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में देवी सती का सिर गिरा था. इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुधार्मिक स्वरूप है. स्थानीय मुस्लिम इसे 'नानी का मंदिर' या 'नानी पीर' कहते हैं और यहां की सालाना यात्रा को 'नानी की हज' के रूप में सम्मान देते हैं. कठिन रास्तों और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद यह मंदिर आज भी इतिहास, संस्कृति और आपसी सद्भाव की अनूठी मिसाल बना हुआ है. बलूचिस्तान के रेगिस्तान और हिंगोल नदी के किनारे एक प्राकृतिक गुफा में बना यह मंदिर आज लाखों लोगों की उम्मीद है.
सती का सिर और 51 शक्तिपीठों का रहस्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के पार्थिव शरीर को खंडित किया था, तो उनके अंग जहां-जहां गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ बन गए. माना जाता है कि हिंगलाज में देवी सती का 'ब्रह्मरंध्र' यानी सिर का ऊपरी हिस्सा गिरा था. यही वजह है कि इसे बेहद खास और चमत्कारी माना जाता है. यहां कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक पवित्र शिला की पूजा की जाती है.
Bravehearts of occupied Balochistan celebrating Navratri at Hinglaj Mata Mandir. Happy Navratri..🔥❤️. https://t.co/HYF8gum5Uv
— Ashraf Baloch (@imasbaloch) October 11, 2026
नानी की हज: जहां हिंदू-मुस्लिम का भेद मिट जाता है
इस मंदिर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां आकर मजहब की दीवारें टूट जाती हैं. स्थानीय मुस्लिम इस मंदिर को बेहद सम्मान देते हैं और इसे 'नानी का मंदिर' या 'नानी पीर' कहते हैं. हर साल अप्रैल में होने वाली यहां की कठिन यात्रा को मुस्लिम समुदाय 'नानी की हज' के रूप में पुकारता है. भीषण गर्मी और तपते रेगिस्तान को पार कर जब श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, तो उनके दिल में सिर्फ भक्ति होती है, कोई भेदभाव नहीं.
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इतिहास और आज की चुनौतियां
इतिहासकारों की मानें तो यह जगह इस्लाम के आने से बहुत पहले से पूजी जा रही है. कुछ जानकार इसे प्राचीन 'नाना देवी' परंपरा से भी जोड़ते हैं, जिसका असर कभी मध्य एशिया तक था. आज के दौर में सीमा पार के तनाव और वीजा की दिक्कतों के कारण भारत से श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना आसान नहीं रह गया है. इसके बावजूद, स्थानीय लोग मिलकर इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखे हुए हैं.
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