विज्ञापन

पाकिस्तान में माता का 51वां शक्तिपीठ, हिंदुओं के 'हिंगलाज माता' और मुस्लिम के 'नानी का मंदिर'

बलूचिस्तान के दुर्गम पहाड़ों में स्थित हिंगलाज माता मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल है, जहां देवी सती का सिर गिरा था. स्थानीय मुस्लिम इसे 'नानी का मंदिर' मानकर बेहद सम्मान देते हैं और यहां की यात्रा को 'नानी की हज' पुकारते हैं.

पाकिस्तान में माता का 51वां शक्तिपीठ, हिंदुओं के 'हिंगलाज माता' और मुस्लिम के 'नानी का मंदिर'
हिंदू टेकते हैं माथा और मुस्लिम करते हैं 'नानी की हज'
Social media

Viral VIdeo: बलूचिस्तान के तपते रेगिस्तान और हिंगोल नदी के किनारे स्थित हिंगलाज माता मंदिर भारत-पाकिस्तान सीमाओं से परे आपसी सद्भाव की अनूठी मिसाल है. हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में देवी सती का सिर गिरा था, जहां किसी मूर्ति के बजाय पवित्र शिला की पूजा होती है. इस ऐतिहासिक स्थल की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुधार्मिक स्वरूप है. स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसे 'नानी का मंदिर' कहता है और इसकी कठिन वार्षिक यात्रा को 'नानी की हज' के रूप में सम्मान देता है. 

सती का सिर और 51 शक्तिपीठों का रहस्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के पार्थिव शरीर को खंडित किया था, तो उनके अंग जहां-जहां गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ बन गए. माना जाता है कि हिंगलाज में देवी सती का 'ब्रह्मरंध्र' यानी सिर का ऊपरी हिस्सा गिरा था. यही वजह है कि इसे बेहद खास और चमत्कारी माना जाता है. यहां कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक पवित्र शिला की पूजा की जाती है.  

नानी की हज: जहां हिंदू-मुस्लिम का भेद मिट जाता है

इस मंदिर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां आकर मजहब की दीवारें टूट जाती हैं. स्थानीय मुस्लिम इस मंदिर को बेहद सम्मान देते हैं और इसे 'नानी का मंदिर' या 'नानी पीर' कहते हैं. हर साल अप्रैल में होने वाली यहां की कठिन यात्रा को मुस्लिम समुदाय 'नानी की हज' के रूप में पुकारता है. भीषण गर्मी और तपते रेगिस्तान को पार कर जब श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, तो उनके दिल में सिर्फ भक्ति होती है, कोई भेदभाव नहीं.   

यह भी पढ़ें | मर्द बनाने के लिए अनोखी परंपरा निभाती है ये 'जनजाति', गाय के साथ जुड़ा है इसका संबंध

इतिहास और आज की चुनौतियां

इतिहासकारों की मानें तो यह जगह इस्लाम के आने से बहुत पहले से पूजी जा रही है. कुछ जानकार इसे प्राचीन 'नाना देवी' परंपरा से भी जोड़ते हैं, जिसका असर कभी मध्य एशिया तक था. आज के दौर में सीमा पार के तनाव और वीजा की दिक्कतों के कारण भारत से श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना आसान नहीं रह गया है. इसके बावजूद, स्थानीय लोग मिलकर इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखे हुए हैं. 

यह भी पढ़ें | मुंबई के मॉल में ऐसा क्या देखा, रोने लगी रोमानिया की यूट्यूबर, बोली- 'जिंदगी में ऐसी चीज नहीं देखी'

यह भी पढ़ें | पिता की जगह भाई को खड़ा देख रो पड़ी बहन, बोली- अब पता चला बेटा होने पर खुशी क्यों मनाते हैं लोग

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Hinglaj Mata, Hinglaj Mata Temple, Navratri 2026, Hinglaj Mata Mandir In Pakistan, Hinglaj Devi Temple
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com