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मर्द बनाने के लिए अनोखी परंपरा निभाती है ये 'जनजाति', गाय के साथ जुड़ा है इसका संबंध

पूर्वी अफ्रीका का मसाई समुदाय ताकत और पोषण के लिए गाय के ताजे खून को दूध में मिलाकर पीता है. खास बात यह है कि इस पूरी पारंपरिक प्रक्रिया में गाय को कोई नुकसान पहुंचाए बिना बेहद सावधानी से खून निकाला जाता है.

मर्द बनाने के लिए अनोखी परंपरा निभाती है ये 'जनजाति', गाय के साथ जुड़ा है इसका संबंध
हैरान कर देगी इस कबीले की अनोखी परंपरा
image: Social Media

Viral Video: पूर्वी अफ्रीका का मसाई समुदाय अपनी अनूठी खान-पान परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां लोग मवेशियों की जान लिए बिना उनके गले की नस से विशेष तीर के जरिए सीमित मात्रा में खून निकालते हैं. खून निकालने के तुरंत बाद घाव पर औषधीय लेप लगाकर जानवर का उपचार कर दिया जाता है. इस निकाले गए ताजे खून को गाय के दूध में मिलाकर पिया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में 'सारे' कहते हैं. कबीले के अनुसार, यह पारंपरिक पेय कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए आवश्यक प्रोटीन और ऊर्जा का मुख्य स्रोत है. अब इस पारंपरिक घटक का उपयोग आधुनिक व्यंजनों में भी किया जाने लगा है.

खास बर्तनों और पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल

मसाई कबीले में गाय के शरीर से खून निकालने की प्रक्रिया बेहद सावधानी और सम्मान के साथ पूरी की जाती है. इसके लिए जानवर की जान नहीं ली जाती. कबीले के लोग मिलकर गाय को काबू में करते हैं. इसके बाद उसके गले की नस (जुगुलर वेन) को उभारने के लिए गर्दन के चारों ओर रस्सी बांधी जाती है. मसाई लोग एक विशेष तीर का उपयोग करते हैं, जिसमें एक लिमिटर या अवरोधक लगा होता है ताकि तीर नस से पार न हो जाए और गाय को गंभीर चोट न पहुंचे. 

गाय का इलाज करके ठीक करते हैं

खून इकट्ठा करने के लिए जैतून की लकड़ी के धुएं से विसंक्रमित (सैनिटाइज) किए गए पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है. जैतून के पेड़ का धुआं न केवल कीटाणुओं को मारता है, बल्कि खून और दूध के इस मिश्रण को एक खास महक भी देता है. तीर चलाने के बाद जैसे ही जरूरत भर खून निकल जाता है, गर्दन की रस्सी खोल दी जाती है और घाव पर मिट्टी या औषधीय पत्तियां लगा दी जाती हैं, जिससे खून बहना तुरंत बंद हो जाता है और गाय पूरी तरह स्वस्थ रहती है. 

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दूध को खून में मिलाने की परंपरा के पीछे मर्दानगी

मसाई भाषा में इस खून को 'सर्जरी' कहा जाता है. जब इस शुद्ध खून को गाय के ताजे दूध के साथ मिलाया जाता है, तो इस पारंपरिक पेय को 'सारे' नाम दिया जाता है. कबीले के बुजुर्गों का मानना है कि यह पेय प्रोटीन और एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स है, जो उन्हें जंगलों में जीवित रहने और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की ताकत देता है. खून को लगातार हिलाया जाता है ताकि वह थक्का न बने और लंबे समय तक पीने योग्य रहे. मसाई कबीले में इसे पीना मर्दानगी और सम्मान का प्रतीक माना जाता है.

ब्लड सॉसेज की नई डिश भी तैयार

वैश्विक स्तर पर इस अनोखी परंपरा को समझने और इसे नए रूप में ढालने के प्रयास भी हुए हैं. मसाई कबीले के इस पारंपरिक 'ब्लड' और 'कैटल हम्प' (गाय का कूबड़) का उपयोग करके आधुनिक कुकिंग में 'ब्लड सॉसेज' जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं. इसमें खून के साथ जई (ओट्स), धनिया के बीज, मेंहदी (रोजमेरी) और नमक मिलाकर इसे एक नया जायका दिया जाता है, जो इस कबीले की परंपरा को वैश्विक खान-पान की दुनिया से जोड़ता है.

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