Trending: ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे की फाउंडर करिश्मा मेहता ने 6 नवंबर की रात करीब 10 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है जो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने दावा करते हुए लिखा, 'मुंबई से अमेरिका पहुंचने के कुछ ही घंटों के अंदर, मेरे गले की तकलीफ कम हो गई. हल्का सिरदर्द, खांसी और छींकें भी गायब हो गईं. इससे मुझे सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि भारत में हमने कितनी सारी तकलीफों को बस 'सामान्य' मानकर स्वीकार कर लिया है.'
'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी डिक्लेयर करें'
करिश्मा ने आगे लिखा, 'भारत में हम एक्यूआई को वैसे ही चेक करते हैं जैसे मौसम देखते हैं. लेकिन फर्क यह है कि इसी हवा में हमारे बच्चे सांस ले रहे हैं. फिर इतनी सुस्ती क्यों? इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी क्यों नहीं माना जा रहा है?'
'हर कोई तो घर में पैक नहीं हो सकता'
करिश्मा के मुताबिक, 'इंडिया में जो लोग संपन्न हैं, वे एक्यूआई की समस्या से निपटने के लिए एयर प्यूरीफायर खरीद सकते हैं. लेकिन, ट्रैफिक सिग्नल पर फूल बेचने वाला व्यक्ति क्या करे? कंस्ट्रक्शन काम में लगा मजदूर क्या करे? स्कूल पैदल जाने वाला बच्चा क्या करे? घर के अंदर खुद को पैक कर लेने की सलाह ऐसी है जिसका पालन कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं है.'
'साफ हवा-पानी के लिए गिड़गिड़ा रहे लोग'
अपनी पोस्ट के आखिर में करिश्मा ने लिखा, 'साफ हवा, साफ पानी और अच्छी सड़कें. ये वे बुनियादी चीजें हैं जिनकी उम्मीद नागरिकों को होनी ही चाहिए. हम अभी भी इनके लिए क्यों गिड़गिड़ा रहे हैं?'
यहां पढ़ें पूरी पोस्ट:-
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन्सWithin hours of landing in the US from Bombay, my sore throat eased. The mild headache, coughing and sneezing disappeared. It made me wonder: how much discomfort have we simply accepted as normal? We check AQI like we check the weather. Except this is the air our children are breathing. Where is the urgency? Why isn't this treated as a public health emergency? The privileged can buy air purifiers. What does the person selling flowers at a traffic signal do? The construction worker? The child walking to school? “Stay indoors” is advice only some can afford to follow. Clean air. Clean water. Good roads. These are the bare minimum citizens should be able to expect. Why are we still begging for them? #diwali #india #AQI
— Karishma Mehta (@Karishma_Mehta5) November 6, 2026
करिश्मा की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद लोग अलग-अलग रिएक्शन्स दे रहे हैं. कुछ लोग उन्हें भारत छोड़कर यूएस शिफ्ट होने की सलाह दे रहे हैं, जबकि कुछ उनकी बात के 100% सही बता रहे हैं.
एक यूजर ने लिखा, 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को स्थायी रूप से ह्यूमन्स ऑफ यूएसए में शिफ्ट हो जाना चाहिए, क्योंकि व्यक्ति का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'मैं आपकी बात से 100 प्रतिशत सहमत हूं. हमारे देश में खराब हवा, साफ-सफाई की कमी और पीने के असुरक्षित पानी को हमने इतना सामान्य मान लिया है कि अब हमें यह भी नहीं लगता कि ऐसी स्थितियों में रहना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'भारत उस दिन का इंतजार कर रहा है जब वे कह सकें कि तेरे बेटे को भी कैंसर है. अरे वाह मेरे बेटों को भी. सेम टू सेम.'
चौथे यूजर ने लिखा, 'प्रदूषण के लिए सरकार को दोष दें, लेकिन लोगों को भी बराबर का दोषी मानें, क्योंकि वे भी इसमें योगदान दे रहे हैं.'
यह भी पढ़ें | दिल्ली-NCR में AQI 450 पार, यूपी का हापुड़ सबसे प्रदूषित, छोटी दीवाली पर 12 राज्यों में बारिश की संभावना
यह भी पढ़ें | जिसके पास साइकिल तक नहीं, उसे अलख पांडे ने गिफ्ट कर दी बाइक; बोले- 'ये तुम्हारा दिवाली गिफ्ट'
यह भी पढ़ें | पहली बार भारत आई UAE की महिला, बोलीं- 'यहां कदम रखते ही मेरी जिंदगी 180 डिग्री बदल गई'
यह भी पढ़ें | एडल्ट लाइफ की असली 'लग्जरी' मानी जाती हैं ये 15 चीजें, लोग बोले- सबको आसानी से नहीं मिलतीं
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं