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आखिर कंबोडिया में क्यों बना इस चूहे का स्टैच्यू? अजब कारनामे ने बनाया दुनिया का लाडला

घर के कोने में बिल ढूंढने वाले चूहों को तो बहुत देखा होगा, पर इस 'जासूस' ने तो मौत के सौदागरों की ही नाक में दम कर दिया. एक नन्हा सा जीव जिसके सूंघने की शक्ति के आगे बारूद भी हार मान गया और आज कंबोडिया की जमीन पर उसकी बहादुरी के बुत बनाए जा रहे हैं.

आखिर कंबोडिया में क्यों बना इस चूहे का स्टैच्यू? अजब कारनामे ने बनाया दुनिया का लाडला
सलाम है इस चूहे को! जिसकी नाक से खौफ खाते थे लैंडमाइंस, अब पत्थर में जिंदा हुई बहादुरी

Hero Rat Magawa story: आमतौर पर चूहे घर का सामान कुतरने या रसोइया में धमाचौकड़ी मचाने के लिए बदनाम होते हैं, लेकिन 'मगावा' नाम का यह चूहा पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया है. कंबोडिया की जमीन में दबे मौत के सौदागरों यानी लैंडमाइंस को सूंघकर निकालने वाले इस नन्हे हीरो की अब मूर्ति बनाई गई है. सोचिए, जिस काम में इंसानों के पसीने छूट जाते हैं, उसे इस जांबाज ने चुटकियों में कर दिखाया.

100 से ज्यादा लैंडमाइंस खोजकर बचाई थीं हजारों जिंदगियां (Landmine detection rats Cambodia)

मिलिए दुनिया के सबसे जांबाज और दिलेर चूहे 'मगावा' से...जिसकी बहादुरी के किस्से अब पत्थरों पर उकेरे जा रहे हैं. कंबोडिया के सिएम रीप (Siem Reap) में इस 'हीरो रैट' की एक शानदार प्रतिमा का अनावरण किया गया है. यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि उस हिम्मत को सलाम है जिसने 5 साल के छोटे से करियर में 100 से ज्यादा लैंडमाइंस और जिंदा बम खोजकर हजारों बेगुनाहों की जान बचाई. कंबोडिया की मिट्टी में दबे इन खतरों को सूंघना कोई बच्चों का खेल नहीं था, पर मगावा ने इसे अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था.

इंसानों से तेज और बारूद के दुश्मन (Magawa statue Siem Reap)

मगावा का जलवा ऐसा था कि जिस टेनिस कोर्ट जितने इलाके को साफ करने में इंसानी मेटल डिटेक्टर्स को 4 दिन लग जाते, उसे यह नन्हा उस्ताद महज 30 मिनट में चकाचक कर देता था. बेल्जियम की संस्था APOPO ने इसे ऐसी घुट्टी पिलाई थी कि इसकी नाक सीधे बारूद पर जाकर टिकती थी. मगावा ने लगभग 20 फुटबॉल मैदानों के बराबर जमीन को मौत के जाल से आजाद कराया, जहां अब लोग चैन से खेती कर रहे हैं और बच्चे बिना डरे खेल रहे हैं.

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मेडल ऑफ गैलेंट्री और सुनहरा रिटायरमेंट (Medal of Gallantry and A Golden Legacy)

इसकी काबिलियत का लोहा पूरी दुनिया ने माना, तभी तो ब्रिटेन की मशहूर संस्था PDSA ने साल 2020 में मगावा को 'मेडल ऑफ गैलेंट्री' (गोल्ड मेडल) से नवाजा. यह सम्मान पाना किसी भी जानवर के लिए ख्वाब जैसा होता है. मगावा की सबसे बड़ी खूबी उसका वजन था...वह इतना हल्का था कि लैंडमाइन के ऊपर से गुजर जाने पर भी धमाका नहीं होता था. भले ही अब मगावा हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी यह मूर्ति आने वाली पीढ़ियों को बताती रहेगी कि 'हीरो' किसी भी शक्ल में हो सकता है, चाहे वो एक छोटा सा चूहा ही क्यों न हो.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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