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रात 1 बजे ट्रेन में जोर-जोर से बात कर रहा था परिवार, लड़की ने टोका तो बोले- हम तुम्हारे जैसे अकेले नहीं हैं

ट्रेन में सफर के दौरान सह-यात्रियों के शोर-शराबे से परेशान महिला को टोकने पर अजीब जवाब मिला. जानिए ऐसे मामलों में रेलवे का रात 10 बजे वाला क्या नियम है और आप 'रेल मदद' के जरिए कैसे तुरंत कार्रवाई करा सकते हैं.

रात 1 बजे ट्रेन में जोर-जोर से बात कर रहा था परिवार, लड़की ने टोका तो बोले- हम तुम्हारे जैसे अकेले नहीं हैं
यात्री पैसेंजर का जवाब सुनकर लड़की सन्न रह गई. उसने सोचा था कि वो उससे सहानुभूति रखेंगे.
X/@poojaofficial5

Viral post: रात का एक बज चुका था. ट्रेन की पटरी से आती गड़गड़ाहट के बीच लोग गहरी नींद में सो रहे थे. तभी अचानक ठहाकों और गपशप का शोर गूंजने लगता है. आप थके-हारे सफर कर रहे हों और सह-यात्री इस कदर शोर मचाएं, तो गुस्सा आना लाजिमी है. ऐसा ही कुछ हुआ लखनऊ से दिल्ली जा रही पूजा के साथ, जिनका सफर एक परिवार की वजह से बुरे सपने में बदल गया. पूजा ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो उन्हें जो जवाब मिला, उसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है. 

रात 1 बजे के बाद जब सब्र का बांध टूटा

लखनऊ से आनंद विहार जा रही सद्भावना एक्सप्रेस के 2AC कोच में पूजा ने चैन की नींद सोने के लिए टिकट बुक किया था. शाहजहांपुर से एक परिवार इस कोच में चढ़ा. रात करीब 9:30 बजे तक तो सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे यह परिवार अपने ही रंग में आ गया. रात के एक बज चुके थे, लेकिन उनकी बातें, ठहाके और बच्चों का शोर थमने का नाम नहीं ले रहा था.  

शोर मचाने से टोका तो ईगो हर्ट हो गया

पूजा ने कानों में 'नॉइज कैंसलेशन' वाले महंगे एयरपॉड्स भी लगाए, लेकिन शोर इतना था कि वह बेअसर साबित हुए. थक-हारकर पूजा ने बेहद शालीनता से उस परिवार से कहा, "क्या आप लोग थोड़ा धीमे बोलेंगे? मुझे सोने में दिक्कत हो रही है." बस, इतनी सी बात पर उस परिवार के एक सदस्य का अहंकार जाग गया. उसने पलटकर जवाब दिया, "हम लोग इतने दिनों बाद एक साथ सफर कर रहे हैं, तो बातें तो करेंगे ही."

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ट्रेन का डिब्बा पर्सनल लिविंग रूम नहीं

जब पूजा ने कहा कि उन्हें बातें करने से परहेज नहीं है, बस आवाज थोड़ी धीमी कर लें, तो उस शख्स ने और तीखा ताना मारा. उसने कहा, "हम तो धीरे ही बात कर रहे हैं. हम परिवार के साथ हैं तो बोलेंगे ही, तुम्हारी तरह अकेले चुपचाप थोड़े ही बैठे हैं."  इस बेतुके तर्क ने पूजा को हैरान कर दिया. उनका कहना बिल्कुल जायज था कि ट्रेन का डिब्बा किसी का पर्सनल लिविंग रूम नहीं होता. आपका पारिवारिक समय कीमती है, तो बाकी यात्रियों की नींद भी उतनी ही जरूरी है. 

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कौन सही-कौन गलत? इंटरनेट पर छिड़ी बहस

इस मामले पर सोशल मीडिया दो खेमों में बंट गया है. कुछ लोग परिवार की पैरवी कर रहे हैं, तो अधिकांश लोग पूजा के समर्थन में खड़े हैं. लोगों ने पूजा को सीधे बहस करने के बजाय रेलवे के नियमों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.  रेलवे का नियम क्या कहता है? कई यूजर्स ने याद दिलाया कि रात 10 बजे के बाद ट्रेन में तेज आवाज में बात करना, संगीत बजाना या शोर मचाना सख्त मना है. 

एक यूजर ने सुझाया स्मार्ट तरीका

एक यूजर ने लिखा, "रात के एक बजे 2AC के यात्रियों ने सोने के लिए पैसे दिए हैं, किसी के फैमिली रियूनियन का हिस्सा बनने के लिए नहीं. ऐसे में बहस करने के बजाय सीधे 'रेल मदद' ऐप या 139 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए. RPF या TTE के आते ही दो मिनट में शांति छा जाती है."

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