Viral post: रात का एक बज चुका था. ट्रेन की पटरी से आती गड़गड़ाहट के बीच लोग गहरी नींद में सो रहे थे. तभी अचानक ठहाकों और गपशप का शोर गूंजने लगता है. आप थके-हारे सफर कर रहे हों और सह-यात्री इस कदर शोर मचाएं, तो गुस्सा आना लाजिमी है. ऐसा ही कुछ हुआ लखनऊ से दिल्ली जा रही पूजा के साथ, जिनका सफर एक परिवार की वजह से बुरे सपने में बदल गया. पूजा ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो उन्हें जो जवाब मिला, उसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है.
रात 1 बजे के बाद जब सब्र का बांध टूटा
लखनऊ से आनंद विहार जा रही सद्भावना एक्सप्रेस के 2AC कोच में पूजा ने चैन की नींद सोने के लिए टिकट बुक किया था. शाहजहांपुर से एक परिवार इस कोच में चढ़ा. रात करीब 9:30 बजे तक तो सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे यह परिवार अपने ही रंग में आ गया. रात के एक बज चुके थे, लेकिन उनकी बातें, ठहाके और बच्चों का शोर थमने का नाम नहीं ले रहा था.
The family boarded around 9:30 PM. Initially, I thought they would settle down after arranging their luggage and eventually become quiet. But even around 1 AM, they were still talking and laughing loudly, as if the entire coach was their drawing room. The child was also making noise for quite some time. I kept trying to sleep, but the noise was so loud that even my AirPods' noise cancellation gave up. Finally, I politely told them, "Could you please lower your voices a little ? I am unable to sleep." One of the uncles replied, "We are all travelling together after so many days. Of course we are going to talk." I said, "Of course, please talk, just a little more quietly." He then replied in an even louder tone, "We are talking quietly, We are travelling with our family, so obviously we will talk. We are not travelling alone like you, sitting silently." I was honestly speechless. I had only requested them to lower their voices. I never asked them to stop enjoying their family time. There is nothing wrong with families talking, laughing and enjoying a journey together. But at night, a train coach is not anyone's private living room. Your family time matters, but so does every other passenger's sleep.
— Pooja (@poojaofficial5) October 7, 2026
शोर मचाने से टोका तो ईगो हर्ट हो गया
पूजा ने कानों में 'नॉइज कैंसलेशन' वाले महंगे एयरपॉड्स भी लगाए, लेकिन शोर इतना था कि वह बेअसर साबित हुए. थक-हारकर पूजा ने बेहद शालीनता से उस परिवार से कहा, "क्या आप लोग थोड़ा धीमे बोलेंगे? मुझे सोने में दिक्कत हो रही है." बस, इतनी सी बात पर उस परिवार के एक सदस्य का अहंकार जाग गया. उसने पलटकर जवाब दिया, "हम लोग इतने दिनों बाद एक साथ सफर कर रहे हैं, तो बातें तो करेंगे ही."
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ट्रेन का डिब्बा पर्सनल लिविंग रूम नहीं
जब पूजा ने कहा कि उन्हें बातें करने से परहेज नहीं है, बस आवाज थोड़ी धीमी कर लें, तो उस शख्स ने और तीखा ताना मारा. उसने कहा, "हम तो धीरे ही बात कर रहे हैं. हम परिवार के साथ हैं तो बोलेंगे ही, तुम्हारी तरह अकेले चुपचाप थोड़े ही बैठे हैं." इस बेतुके तर्क ने पूजा को हैरान कर दिया. उनका कहना बिल्कुल जायज था कि ट्रेन का डिब्बा किसी का पर्सनल लिविंग रूम नहीं होता. आपका पारिवारिक समय कीमती है, तो बाकी यात्रियों की नींद भी उतनी ही जरूरी है.
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कौन सही-कौन गलत? इंटरनेट पर छिड़ी बहस
इस मामले पर सोशल मीडिया दो खेमों में बंट गया है. कुछ लोग परिवार की पैरवी कर रहे हैं, तो अधिकांश लोग पूजा के समर्थन में खड़े हैं. लोगों ने पूजा को सीधे बहस करने के बजाय रेलवे के नियमों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. रेलवे का नियम क्या कहता है? कई यूजर्स ने याद दिलाया कि रात 10 बजे के बाद ट्रेन में तेज आवाज में बात करना, संगीत बजाना या शोर मचाना सख्त मना है.
एक यूजर ने सुझाया स्मार्ट तरीका
एक यूजर ने लिखा, "रात के एक बजे 2AC के यात्रियों ने सोने के लिए पैसे दिए हैं, किसी के फैमिली रियूनियन का हिस्सा बनने के लिए नहीं. ऐसे में बहस करने के बजाय सीधे 'रेल मदद' ऐप या 139 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए. RPF या TTE के आते ही दो मिनट में शांति छा जाती है."
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