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कनॉट प्लेस में है भारत की सबसे पुरानी किताबों की दुकान, 10 रुपये किराए पर ली, आज 50 करोड़ से ज्यादा कीमत

वैशालिक बताते हैं कि पहले वो किताब नहीं, बल्कि भारत और विदेशी मैग्जीन व अखबार बेचते थे. फिर बाद में उन्होंने सरकारी गजेटियर को बेचना शुरू किया था.

कनॉट प्लेस में है भारत की सबसे पुरानी किताबों की दुकान, 10 रुपये किराए पर ली, आज 50 करोड़ से ज्यादा कीमत
इस दुकान को अब वैशालिक जैन चलाते हैं.
NDTV Reporter

Delhi News: भारत की सबसे पुरानी किताबों की दुकान आज भी 'दिल्ली का दिल' कहे जाने वाले कनॉट प्लेस के सी-ब्लॉक में चल रही है. दो मंजिला इस दुकान को साल 1932 में बनाया गया था और करीब 3 साल बाद सरदारी मल जैन ने इसे किराए पर लिया था. उस वक्त इस दुकान का किराया 8 से 10 रुपये के बीच था, जो सीधा पंजाब सरकार को जाता था. 

बड़े-बडे नेता यहीं से खरीदते हैं किताबें

जानकारों की मानें तो आज इस दुकान की कीमत 50 करोड़ रुपये से ज्यादा है. लेकिन पैसे से कहीं ज्यादा ये दुकान किताबों के शौकीन लोगों की मनपसंद जगह है बनी हुई है. इसका ऐतिहासिक महत्व है इतना है कि आज भी यहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर बीजेपी नेता संबित पात्रा तक किताबें खरीदने आते रहते हैं.

Jain Book Agency, Connaught Place, Delhi

कनॉट प्लेस के सी-ब्लॉक में आज भी चल रही दुकान.
Photo Credit: NDTV Reporter

चौथी पीढ़ी के वैशालिक जैन चला रहे दुकान

जैन बुक एजेंसी के नाम से इस दुकान को आज भी सरदारी मल जैन के वंशज चलाते हैं. NDTV की टीम 16 अक्टूबर की सुबह जब इस दुकान पर पहुंची तो यहां चौथी पीढ़ी के वैशालिक जैन मिले. उन्होंने कहा, 'मेरे परदादा इसे दुकान नहीं कहते थे. उनके लिए तो ये किताबों का मंदिर था. वो खुद भी किताब पढ़ने के शौकीन थे और उनसे नोट्स बनाते हैं. जब दुकान पर अंग्रेज और पंडित जवाहर लाल नेहरू किताब खरीदने आते हैं तो मेरे परदादा उनके साथ अपने नोट्स शेयर किया करते थे.'

'कोरोना टाइम से घटी सेल, बंद नहीं करेंगे दुकान'

कनॉट प्लेस और उसके आसपास करीब 800 दुकानें हैं. इसमें कई मशहूर ब्रैंड्स के शोरूम है. लेकिन क्या लोग यहां किताब लेने आते हैं? इसका जवाब देते हुए वैशालिक जैन ने कहा, 'किताबें बिकती हैं, लेकिन बिक्री अब कम है. हमारे दादा कि ये विरासत होने के चलते हम इसे चलाते रहेंगे. लेकिन, किताबों की बिक्री कोरोना के बाद से काफी घटी है. फिर रही सही कसर ऑनलाइन सेलिंग एप्स ने पूरी कर दी. ऑनलाइन बिक्री की वजह से ज्यादातर नकली किताबें लोगों को घर बैठे मिल जाती है.'

क्या प्रदर्शन का असर भी सेल पर पड़ा?

NDTV के संवाददाता रवीश रंजन शुक्ला ने जब वैशालिक से यह सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, 'कनॉट प्लेस इस वक्त मीडिया और सियासी हलकों में सुर्खियां बटोर रहा है. बीते दो महीने से लगातार चल रहे धरने-प्रदर्शन से हमारी दुकानदारी यकीनन प्रभावित हुई ह. प्रदर्शन की वजह से नेगेटिव पब्लिसिटी होती है. इसका असर बाहर से आने वाले लोगों पर पड़ता है.'

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