VIRAL VIDEO: क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में कोई ट्रेन यात्रा कितनी लंबी हो सकती है? देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जाने वाली 'विवेक एक्सप्रेस' का सफर पूरे चार दिन से भी ज्यादा का है. असम के डिब्रूगढ़ से शुरू होकर यह ट्रेन करीब 74 घंटे बाद तमिलनाडु के कन्याकुमारी पहुंचती है. इस दौरान यह 4 हजार किलोमीटर की हैरान कर देने वाली दूरी तय करती है. सफर ऐसा कि जब भी आपकी सुबह नींद खुले, आप खुद को एक नए राज्य में पाएंगे. यूट्यूब क्रिएटर ममता यादव और उनकी टीम ने इस पूरे सफर को खुद जीकर महसूस किया और इसका एक वीडियो बनाया. 4 दिन लंबे सफर के बाद यूट्यूबर ने कहा कि ये सफर जिंदगी भर याद रहेगा.
कुछ घंटों में खिड़की के बाहर बदल जाती है दुनिया
चाय के बागानों से लेकर चमचमाते शहरों तक, खिड़की से दिखने वाले नजारे किसी जादू से कम नहीं लगते. नौ राज्यों से गुजरते हुए आपको देश की बदलती भाषाएं, पहनावा और खान-पान देखने को मिलता है. लेकिन यह सफर सिर्फ सुहाना ही नहीं है, इसके साथ कुछ जमीनी मुश्किलें भी जुड़ी हैं. ममता के वीडियो में दिखाया गया है कि जनरल डिब्बे में भारी भीड़ होती है, जहां पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती. इसके अलावा, शौचालयों की गंदगी भी यात्रियों को काफी परेशान करती है.
इस टीम ने शुरुआती दो दिन जनरल डिब्बे की धक्का-मुक्की में बिताए, जहां 'जो पहले आया, सीट उसकी' वाला नियम चलता है. बाकी के दो दिन उन्होंने एसी कोच में सफर किया. हालांकि, कई यात्रियों का मानना है कि असली भारत और सफर का असली मजा जनरल डिब्बे के इस शोरगुल में ही है.
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जनरल डिब्बे के हालात भयावह
यूट्यूबर ममता यादव ने जब देश की सबसे लंबी रेल यात्रा के जनरल डिब्बे में कदम रखा, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था. जिस कोच की क्षमता सीमित है, उसमें 300 से ज्यादा लोग ठंसे हुए थे. पैर रखने तक की जगह नहीं, दम घुटने जैसी स्थिति और सीट के नाम पर चादरों का असुरक्षित 'जुगाड़'. सबसे बदतर हाल वॉशरुम का था, जहां हजारों की भीड़ के बीच महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन बनाए रखना एक दुःस्वप्न जैसा है.
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ममता ने इस सफर में एक बड़ा और कड़वा सवाल उठाया. क्या इंसान का आत्मसम्मान भी उसकी जेब के साइज से तय होगा? जो लोग शौक से नहीं बल्कि रोजगार और पढ़ाई की मजबूरी में इस यातना को झेल रहे हैं, उनके साथ टीटीई का रवैया भी बेहद असंवेदनशील दिखा. जहां एसी कोच में कोई पूछने वाला नहीं था, वहीं जनरल डिब्बे में सोते हुए थके-हारे यात्रियों को जगाकर टिकट के लिए परेशान किया गया. ऊपर से तत्काल टिकट न मिलना और दलालों की मनमानी ने गरीब यात्रियों को इस नरकीय सफर में ढकेल दिया है, क्योंकि ट्रेनों में जनरल डिब्बों की संख्या लगातार कम होती जा रही है.
विवेकानंद की याद में शुरुआत
इस खास ट्रेन की शुरुआत साल 2011-12 के रेल बजट में स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती के मौके पर की गई थी. यह ट्रेन असम, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से गुजरती है. अपने सफर में यह कोलकाता, भुवनेश्वर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम समेत करीब 59 स्टेशनों पर रुकती है.
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