विज्ञापन

जापान ने खेतों में बचे चावल के कचरे से बनाया ऑर्गेनिक एथेनॉल, अब उससे बना रहा कॉस्मेटिक्स प्रोडक्‍ट

यह आइडिया लोकल सरकार और चावल किसानों के उस प्रोजेक्ट से आया, जिसमें खाली पड़े खेतों के चावल से इथेनॉल बनाने पर रिसर्च हुई थी.

जापान ने खेतों में बचे चावल के कचरे से बनाया ऑर्गेनिक एथेनॉल, अब उससे बना रहा कॉस्मेटिक्स प्रोडक्‍ट
रिपोर्ट के मुताबिक, यह तरीका तभी कामयाब होता है जब खेत, किसान और फैक्ट्रियां आस-पास ही मौजूद हों.
Pexels

Zara Hatke News: जापान में अब खेतों में छूटे और बेकार समझे जाने वाले चावल को फेंका नहीं जा रहा, बल्कि इससे हाई-क्वालिटी ऑर्गेनिक एथेनॉल बनाकर कॉस्मेटिक्स, साबुन और रोजमर्रा के सामान तैयार किए जा रहे हैं. जापान की बायोटेक कंपनी फर्मेनस्टेशन ने इवाते के ओशू इलाके में यह अनोखा सिस्टम तैयार किया है, जहां खाली पड़े खेतों में उगे और अनयूज्ड चावल को फर्मेंटेशन और डिस्टिलेशन तकनीक से रिफाइन करके एथेनॉल में बदला जाता है.

कुछ भी वेस्ट नहीं, सब काम का

इस पूरे प्रोसेस की सबसे खास बात यह है कि चावल से एथेनॉल निकालने के बाद भी कुछ भी बर्बाद नहीं होता. डिस्टिलेशन के बाद बचे हुए गाढ़े हिस्से को राइस मोरोमी कहा जाता है. इसका इस्तेमाल लोकल मुर्गियों और मवेशियों के पौष्टिक चारे के रूप में होता है. फिर इन्हीं मवेशियों का गोबर खेतों में जैविक खाद बनकर लौट आता है. इस तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना एक पूरा सेल्फ रिलायंट साइकल तैयार हो जाता है.

सैनिटाइजर से लेकर स्किनकेयर तक में इस्तेमाल

चावल से बना यह एथेनॉल और मोरोमी अब आपकी अलमारी तक पहुंच चुके हैं. इनका इस्तेमाल रूम स्प्रे, हैंड सैनिटाइजर, फेस वॉश और कई तरह के ऑर्गेनिक स्किनकेयर प्रोडक्ट्स बनाने में धड़ल्ले से हो रहा है. जिस फसल का बाजार में कोई मोल नहीं बचा था, वह अब प्रीमियम ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जान बन चुकी है.

ग्लोबल लेवल पर मिली बड़ी मान्यता

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के इस ऑर्गेनिक एथेनॉल को नवंबर 2019 में USDA ऑर्गेनिक और जनवरी 2020 में अंतरराष्ट्रीय स्तर के COSMOS सर्टिफिकेट से नवाजा जा चुका है. COSMOS दुनिया भर में ऑर्गेनिक कॉस्मेटिक्स का बहुत बड़ा पैमाना माना जाता है, जो एनवायरनमेंट और नेचुरल रिसोर्सेज की सुरक्षा की गारंटी देता है. इससे इस जापानी एथेनॉल की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ी है.

बर्बाद होते खेतों के लिए बनी नई उम्मीद

जापान में 1960 के दशक के मुकाबले चावल की खपत आधी से भी कम हो चुकी है, जिसकी वजह से 2022 तक करीब 13 लाख एकड़ धान के खेत खाली और सूखे पड़े थे. यह नई तकनीक इन वीरान खेतों, किसानों और नए बाजारों को आपस में जोड़ने का काम कर रही है. हालांकि, यह मॉडल हर तरह के एग्रीकल्चर वेस्ट पर सीधे लागू नहीं हो सकता, क्योंकि इसके लिए स्थानीय फार्म, लैब और सही पार्टनरशिप का सही तालमेल होना जरूरी है.

ये भी पढ़ें:- मिस यूनिवर्स इंडिया फिनाले के कुछ दिन बाद काम पर लौटीं फाइनलिस्ट, बेंगलुरु के गूगल ऑफिस से शेयर किया वीडियो

यह VIDEO भी देखें:-

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Japan, Rice, Ethanol, Waste, Farming
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com