हमारे भारतीय घरों में अक्सर यह देखने को मिलता है कि रात के खाने के बाद दो-चार रोटियां बच ही जाती हैं. अब खाना फेंकना तो किसी को भी गवारा नहीं होता, इसलिए सबसे आसान उपाय यही लगता है कि रोटी को उठाया, पन्नी या डिब्बे में डाला और फ्रिज में रख दिया. फिर अगले दिन उसी को गरम करके खा लिया. लेकिन क्या कभी हमने सोचा है कि पकी हुई रोटी को फ्रिज में रखना सेहत के नजरिए से कितना सही है.
इसी आम घरेलू उलझन को सुलझाने के लिए हमने बातचीत की योग और प्राकृतिक चिकित्सा के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. राम अवतार से. उन्होंने बहुत ही आसान शब्दों में समझाया कि रोटी को फ्रिज में रखने से उसमें क्या बदलाव आते हैं और अगर रोटियां बच जाएं तो उन्हें सही तरीके से कैसे संभालना चाहिए.
क्या रोटी को फ्रिज में रखना सुरक्षित है?
डॉ. राम अवतार बताते हैं कि जैसे ही हम पकी हुई रोटी को फ्रिज के ठंडे तापमान में रखते हैं, उसका स्टार्च बदलने लगता है. उसका अंदरूनी स्टार्च कड़क होने लगता है. इसे विज्ञान में स्टार्च रेट्रोग्रेडेशन कहते हैं. ठंडक के असर से रोटी की नमी बहुत तेजी से खत्म होती है.
- फ्रिज की ठंडक रोटी के पोषण को लगभग बेअसर कर देती है.
- जब आप उसे बाहर निकाल कर दोबारा गर्म करते हैं, तो वो ऊपर से तो गरम हो जाती है पर अंदर से रबड़ जैसी खिंचने लगती है.
- आयुर्वेद के हिसाब से ऐसी बासी और ठंडी तासीर वाली चीज पेट में जाते ही गैस, एसिडिटी और भारीपन पैदा करती है.
- रोज-रोज ऐसा करने से पाचन धीमा पड़ता है और पेट साफ न होने की समस्या बनने लगती है.
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रोटी को खराब होने या बासी होने से कैसे बचाएं?
अगर कभी आटा या रोटी ज्यादा बन जाए, तो उसे फेंकने के बजाय कुछ समझदारी भरे तरीके अपनाए जा सकते हैं. डॉ. राम अवतार के अनुसार कुछ पुराने देसी नुस्खे आज भी सबसे बेहतर काम करते हैं. डॉक्टर का कहना है कि पुराने जमाने में कौन सा घर-घर फ्रिज था. तब भी तो लोग रोटियां संभालते ही थे. बस थोड़े से देसी तरीके समझने की जरूरत है.
पहली गलती हम यह करते हैं कि तवे से उतरी खौलती रोटी को तुरंत डिब्बे में बंद कर देते हैं. उसकी भाप से पानी छूटता है और नीचे वाली रोटी चिपचिपी हो जाती है. रोटी को जाली वाली थाली पर एक-दो मिनट रखें, जब भाप उड़ जाए तब डिब्बे में डालें.
प्लास्टिक की थैली या एल्युमिनियम फॉयल की जगह हमेशा साफ और पतले सूती कपड़े का इस्तेमाल करें. रोटी को कपड़े में लपेट कर स्टील के डिब्बे में रखें. इससे हवा का संतुलन बना रहता है और रोटी 10-12 घंटे तक आराम से नरम बनी रहती है.
और हां, सबसे पक्की बात तो यही है कि घर में जितने लोग हों, उसी हिसाब से थोड़ा कम ही आटा गूंथें. दो रोटी कम बन जाए तो चल जाएगा, पर बची हुई सड़े ये ठीक नहीं.
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अगर मजबूरी में फ्रिज में रखना ही पड़ जाए तो?
कभी-कभार मेहमान ज्यादा आ गए या अचानक बाहर जाना पड़ गया, तो फेंकने से अच्छा है कि आप सही ढंग से रखें.
रोटी को सीधे न रखें. सूती कपड़े में लपेट कर किसी एयरटाइट टिफिन में बंद करें. जब खाना हो, तो फ्रिज से निकाल कर कम से कम आधा घंटा पहले बाहर किचन स्लैब पर छोड़ दें ताकि वह सामान्य तापमान पर आ जाए.
इसके बाद तवे पर हल्का सा देसी घी या तिनका भर पानी छिड़क कर धीमी आंच पर सेंकें. तेज आंच पर सेंकेंगे तो रोटी पापड़ बन जाएगी और चबाना मुश्किल हो जाएगा. ध्यान रखें कि 24 घंटे से ज्यादा पुरानी रोटी तो किसी हाल में न खाएं.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या बासी रोटी खाने से शुगर या बीपी कंट्रोल होता है?
पुराने लोग रात की बची सामान्य रोटी को सुबह ठंडे दूध में डाल कर खाते थे, जिससे पेट की जलन और एसिडिटी शांत होती थी. लेकिन यह नियम सिर्फ उन रोटियों पर लागू होता है जो कमरे के सामान्य तापमान पर रखी गई हों. फ्रिज में रखी बासी रोटी से यह फायदा नहीं मिलता.
क्या गूंथा हुआ आटा फ्रिज में रखना नुकसान करता है?
बिल्कुल करता है. गूंथे हुए आटे में खमीर और बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं. काले पड़े आटे की रोटी खाने से पेट में मरोड़ और गैस की दिक्कत हो सकती है.
फ्रिज से निकली रोटी को माइक्रोवेव में गर्म करना सही है?
माइक्रोवेव में गर्म करने से वो एक मिनट के लिए तो एकदम मुलायम लगेगी, लेकिन अगले दो मिनट में पत्थर जैसी कड़ी हो जाएगी. तवे पर हल्का घी लगाकर धीमी आंच पर गर्म करना ही बेहतर है.
गर्मी के मौसम में बिना फ्रिज के रोटी कितनी देर चल सकती है?
गर्मियों और उमस के दिनों में रोटी 8 से 10 घंटे के अंदर खा लेनी चाहिए. अगर उसमें से जरा भी खट्टी महक आने लगे या फफूंद जैसा दिखे, तो उसे बिल्कुल न खाएं.
एक्सपर्ट के बारे में: डॉ. राम अवतार दिल्ली सरकार के योग विभाग के सेवानिवृत्त प्रोजेक्ट ऑफिसर हैं. उनके पास योग और ध्यान (Yoga & Meditation) के क्षेत्र में 38 से अधिक वर्षों का दीर्घकालिक और व्यावहारिक अनुभव है. वे योग, प्राणायाम, ध्यान, नाड़ी विज्ञान, जड़ी-बूटी/पारंपरिक चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy), रेकी, होम्योपैथी और आयुर्वेद के माध्यम से कई जटिल एवं असाध्य रोगों का सफल इलाज कर चुके हैं.
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