- जापान ने स्थायी निवास के लिए विदेशी आवेदकों की फीस 20 गुना बढ़ाकर दो लाख येन कर दी है
- अब स्थायी निवास के लिए जापानी भाषा जानना अनिवार्य होगा
- आवेदक की आय जापान की औसत घरेलू आय के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए
अगर आप भी जापान में जाकर बसने का सपना देख रहे हैं तो यह सपना खर्चीला होने वाला है. खर्चीला भी थोड़ा-बहुत नहीं बल्कि जापान में जाकर रहना अब 20 गुना ज्यादा महंगा होने वाला है. जापान ने देश में परमानेंट रेजिडेंसी यानी हमेशा-हमेशा के लिए निवास चाहने वाले विदेशियों के लिए फीस 20 गुना बढ़ाकर 2 लाख येन कर दिया है. भारतीय करेंसी में यह रकम 1 लाख 22 हजार के आसपास बैठती है. हालांकि सिर्फ इतना ही नहीं है. अब जापान की सरकार ने तीन शर्तें भी जोड़ी हैं.
कितने सालों के लिए कितनी फीस?
अबतक जापान में अस्थायी तौर पर रहने वालों को अपना रेजिडेंसी स्टेटस बदलने या रहने की अवधि बढ़ाने के लिए हर बार 6,000 येन देने पड़ते थे. लेकिन 1 अक्टूबर से फीस इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कितने समय तक रहना चाहते हैं. तीन महीने या उससे कम समय के लिए 10,000 येन से लेकर, पांच साल या उससे ज्यादा समय के लिए 75,000 येन तक. अगर हमेशा के लिए निवास चाहिए तो 2 लाख येन देना होगा.
अब बात तीन और शर्तों कीं.
- स्थायी निवासी बनने की चाहत रखने वाले लोगों को अब जापान की औसत आय के बराबर या उससे ज्यादा की स्थिर आय भी कमानी होगी. यानी कमाई सही होनी चाहिए. जुलाई में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जापान की औसत घरेलू आय 57.5 लाख येन है.
- अगले साल अप्रैल से, स्थायी निवास के लिए आवेदन करने वालों को जापानी भाषा भी आनी चाहिए.
- स्थायी निवास के लिए अप्लाई करने वालों को मिलने वाले का संभावित पेंशन, उस व्यक्ति के पेंशन लाभ के बराबर होने चाहिए जिसने 30 सालों तक जापान के कर्मचारी पेंशन सिस्टम में योगदान दिया हो.
जापान सरकार ऐसा क्यों कर रही है?
प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की शासन में जापान की इमिग्रेशन पॉलिसी में कई बदलाव किए जा रहे हैं. इनमें से एक है फीस बढ़ाना है. इसका मकसद जापान में तेजी से बढ़ रही विदेशी आबादी को मैनेज करना है. 2025 के आखिर तक जापान में विदेशी निवासियों की संख्या 41.2 लाख से ज्यादा हो गई, जो पिछले साल के मुकाबले 9.5% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी है. इससे जापान में इमिग्रेशन और सामाजिक बदलाव को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं. पिछले साल अक्टूबर में पद संभालने के बाद से ही ताकाइची ने इमिग्रेशन को मैनेज करने को अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में से एक बनाया है.
भले जापान में इमिग्रेशन का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील और कड़े नियमों वाला बना हुआ है, लेकिन देश की बढ़ती उम्र वाली आबादी लेबर की कमी को पूरा करने के लिए विदेशी वर्करों पर तेजी से निर्भर हो रही है.
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