Trending: कल्पवृक्ष रीयलटी नाम की रियल एस्टेट एडवाइजरी फर्म में काम करने वाले अभिषेक भारद्वाज ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है, जो तेजी से वायरल हो रही है. एक्स पर उन्होंने लिखा, 'गुरुग्राम में साउथ फेसिंग फ्लैट अक्सर 5% से 10% सस्ते बिकते हैं, और जो खरीदार इन्हें नहीं खरीदते, उनमें से ज्यादातर ने कभी भी किसी वास्तु कंसल्टेंट से बात नहीं की होती है. उन्होंने बस यह सुना होता है कि दक्षिण दिशा अच्छी नहीं है, इसीलिए वो 'दक्षिण' शब्द सुनते ही फ्लैट लेने से मना कर देते हैं.'
'फ्लैट का लेआउट ध्यान से ना देखते लोग'
भारद्वाज ने लिखा, 'मैं हर बार यही सवाल पूछता हूं कि क्या आपने इस प्लान को चेक करने के लिए किसी सही वास्तु एक्सपर्ट को बुलाया था, और जवाब हमेशा 'नहीं' ही होता है. किसी ने भी लेआउट को ध्यान से नहीं देखा, कंपास से दिशा नहीं जांची और न ही यह बताया कि फ्लैट खराब है. यह बस सुनी-सुनाई बातें हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचती हैं, और उन्हीं बातों के आधार पर एक बहुत अच्छा लेआउट तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाता है.'
'वास्तु की किताबों में कुछ और ही लिखा है'
उन्होंने आगे लिखा, 'वास्तु की पारंपरिक किताबों में कुछ और ही लिखा है. प्लॉट के हर हिस्से को एंट्री जोन में बांटा गया है, और पूरे लेआउट में सबसे शुभ एंट्री जोन में से दो दक्षिण दिशा में ही होते हैं. अगर मुख्य दरवाजा उन जोन में से किसी एक में आता है, तो प्रॉपर्टी को बहुत शुभ माना जाता है. कोई भी इस बात को आगे नहीं बढ़ाता, क्योंकि कंपास रीडिंग की जानकारी देने के बजाय डर फैलाना ज्यादा आसान है.'
'एक ही लेआउट, टावर और फ्लोर पर कीमत अलग'
भारद्वाज कहते हैं, 'इसलिए डर बना रहता है, और मार्केट ने इसकी कीमत भी तय कर दी है. एक ही लेआउट, एक ही टावर और एक ही फ्लोर पर, दक्षिण-मुखी यूनिट दूसरी दिशा वाली यूनिट के मुकाबले 5% से 10% कम कीमत पर बिकती है. 2 करोड़ रुपये के फ्लैट पर यह 10 लाख से 20 लाख रुपये का अंतर होता है, और बेचने वाले को यह नुकसान सिर्फ लिस्टिंग में लिखे एक शब्द की वजह से उठाना पड़ता है.'
समझदार खरीदार कैसे उठाता है इसका फायदा
पोस्ट की आखिर में भारद्वाज ने लिखा, 'यहीं पर एक समझदार खरीदार फायदा उठाता है. वह एक सही वास्तु कंसल्टेंट को बुलाता है, मुख्य दरवाजे की कंपास डिग्री चेक करवाता है और पक्का करता है कि दरवाजा दक्षिण दिशा के उन शुभ जोन में से किसी एक में है. एक बार यह कन्फर्म हो जाने पर, वह डिस्काउंट पर एक बेहतरीन फ्लैट खरीद लेता है, जबकि उससे पहले वाला खरीदार सिर्फ एक ऐसे मैसेज की वजह से पीछे हट गया था जिसकी उसने कभी सच्चाई नहीं जांची थी.'
यहां पढ़ें पूरी पोस्ट:-
South-facing flats in Gurugram regularly sell 5% to 10% cheaper, and almost every buyer who walks away from one has never spoken to a Vastu consultant in his life. He heard it at a family dinner or read it in a WhatsApp forward, and he rejected the flat the second he heard the word south. I ask the same question every time, have you ever hired a proper Vastu expert to check this plan, and the answer is always no. Nobody has sat with the layout, taken a compass reading and then told him the flat is bad. It is hearsay passed from one uncle to the next, and on that hearsay a perfectly good layout gets rejected on the spot. What the classical Vastu texts actually say is very different. Every side of a plot is divided into entrance zones, and two of the most auspicious entrance zones in the whole layout sit on the south side itself. If the main door lands in one of those zones, the property is considered highly auspicious. Nobody forwards that part, because fear is much easier to spread than a compass reading. So the fear stays, and the market has priced it in. The same layout, same tower, same floor, and the south-facing unit closes 5% to 10% below the one facing another direction. On a ₹2 CR flat, that is ₹10 lakh to ₹20 lakh sitting on the table, and the seller pays it only because of one word in the listing. That is exactly where a smart buyer takes advantage. He hires a proper Vastu consultant, gets the compass degrees of the main door checked, and confirms the door sits in one of those auspicious southern zones. Once that is verified, he picks up a prime flat at a discount, while the buyer before him walked away because of a forward he never questioned. Buyers are leaving lakhs of rupees on the table, just because they listened to tea-stall chatter over what Vastu actually says.
— Abhishek Bhardwaj (@Gurugrammer_) October 12, 2026
'एंट्रेंस और बालकनी में कन्फ्यूज हुए लोग'
एक्स पर इस पोस्ट को पढ़कर कुछ लोगों ने अभिषेक की बातों से सहमति जताई, जबकि कुछ लोग एंट्रेंस और बालकनी में कन्फ्यूज हो गए.
एक यूजर ने लिखा, 'पॉजिटिव एनर्जी के ज्यादा से ज्यादा फायदे के लिए, एंट्री दक्षिणी दीवार के बीच वाले या थोड़े दक्षिण-पूर्वी हिस्से में होनी चाहिए.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'फ्लैट्स में वास्तु का डर बकवास है. दक्षिण दिशा को अशुभ मानने के पीछे पुरानी समझ हवा के बहाव (जो पूरब-पश्चिम होता है) पर आधारित थी. इसलिए पुराने जमाने में, जब घर ज्यादातर एक मंजिला होते थे, तो शौच के लिए दक्षिण दिशा तय की गई थी.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'दक्षिण मुखी फ्लैट्स धूप के लिए सबसे अच्छे होते हैं. मुझे नहीं लगता कि धूप वाले फ्लैट्स डिस्काउंट पर बेचे जाते हैं.'
चौथे यूजर ने लिखा, 'दक्षिण की ओर खुलने वाले फ्लैट्स में सर्दियों में धूप आती है, जो एक फायदा है. मेरी पत्नी ने दक्षिण की ओर खुलने वाले फ्लैट पर ही जोर दिया, क्योंकि सर्दियों में कोई भी ठंडा अपार्टमेंट नहीं चाहेगा.'
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