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जॉब एप्लीकेशन में सैलरी ना बताने वाले Gen Z को मिला 'इनाम', दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने दिया 120% का हाइक

दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने लिंक्डइन पर एक ऐसे कैंडिडेट की कहानी शेयर की है, जिसका तरीका अपनाकर बाकी लोग भी अपनी-अपनी सैलरी बढ़ावाने की कोशिश कर सकते हैं.

जॉब एप्लीकेशन में सैलरी ना बताने वाले Gen Z को मिला 'इनाम', दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने दिया 120% का हाइक
दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने कहा कि ये उनकी इस साल की सबसे बेस्ट हायरिंग थी. (सांकेतिक तस्वीर)
Pexels

Trending: जेनरेशन जेड को स्ट्रेट फॉरवर्ड बातचीत करने वाला कहा जाता है. दिल्ली के रहने वाले एंटरप्रेन्योर अभिषेक अग्रवाल ने Gen Z की इसी बेबाकी को तब देखा, जब नौकरी के लिए आए एक कैंडिडेट ने उनसे साफ-साफ कह दिया- 'मुझसे मेरी करंट सैलरी मत पूछना'. 

'4 साल का एक्सपीरियंस था'

लिंक्डइन पर वायरल हुई अपनी पोस्ट में अग्रवाल ने बताया कि उस उम्मीदवार को 4 साल का ऑपरेशन्स में एक्सपीरियंस था. इंटरव्यू के दौरान उसने सभी सवालों के सटीक जवाब दिए थे. कुल मिलाकर वो एक परफेक्ट कैंडिडेट था. लेकिन उसने उस फॉर्म में अपनी मौजूदा और उम्मीद की जा रही सैलरी नहीं भरी जो हमने उसे दिया था.

'क्यों खाली छोड़ा सैलरी वाला कॉलम' 

अग्रवाल ने आगे लिखा, 'जब मैंने पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया, तो उसने कहा- सर, प्लीज मुझसे यह मत पूछिए. मैं 4.5 LPA कमाता हूं. हर कंपनी उस नंबर में बस थोड़ा सा परसेंट जोड़कर उसे ऑफर बता देती है. मैं इससे ज्यादा का हकदार हूं.'

'पिछली कंपनी ने सिर्फ 3 परसेंट हाइक दिया'

अग्रवाल ने कहा, 'उसकी बातें सुनकर मैंने एचआर से उस फील्ड को खाली छोड़ देने की बात कही. इसके बाद मैंने उससे अपने काम के बारे में बताने को कहा. बातचीत में पता चला कि उसने वेंडर पेमेंट प्रोसेस को नए सिरे से तैयार किया था. उसने देरी को 18 दिन से घटाकर 6 दिन कर दिया था. उसकी पुरानी कंपनी ने इसके लिए उसे 3% की हाइक दी थी.'

'कई देशों में सैलरी पूछना भी क्राइम है'

अग्रवाल कहते हैं, 'मुझे हमेशा अजीब लगता है कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत में हम कैंडिडेट्स को उनकी मौजूदा सैलरी के आधार पर जज करते हैं. जबकि USA में, कई राज्यों और इलाकों में सैलरी पूछना गैर-कानूनी है. कैंडिडेट कोई भी नंबर बता सकता है, और अगर कंपनी के पास बजट है, तो वे उसे ऑफर कर देते हैं. यह इतना आसान है.' 

'मैंने उसे 10 LPA का ऑफर दिया'

अपनी पोस्ट की आखिर में अग्रवाल ने कहा, 'मैंने उसे 10 LPA का ऑफर दिया. यह उसकी मौजूदा सैलरी पर 100% से ज्यादा की हाइक थी. लेकिन, यही मार्केट रेट था और वह इसी का हकदार था. उसने मेरे फैसले को सही साबित किया. वो मेरे पूरे साल की बेस्ट हायरिंग साबित हुआ.'

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'पहले मना किया फिर खुद ही सैलरी बता दी?'

सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को पढ़कर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं.

एक यूजर ने लिखा, 'ऐसा तब होता है जब फाउंडर किसी कैंडिडेट की अहमियत को समझते हों. वरना, एचआर अक्सर उनकी मौजूदा CTC के आधार पर या तो थोड़ी सैलरी बढ़ाते हैं या उन्हें रिजेक्ट कर देते हैं.'

दूसरे यूजर ने लिखा, 'मेरे साथ इसका उल्टा हुआ. मैं जॉब एप्लीकेशन फॉर्म में अपनी करंट और एक्‍सपेक्‍टेड सैलरी का कॉलम खाली छोड़ने की वजह से रिजेक्ट हो गया.'

तीसरे यूजर ने लिखा, 'यह अजीब बात है कि उसने कहा कि उससे उसकी सैलरी के बारे में न पूछा जाए, लेकिन उसने खुद ही अपनी सैलरी आपके साथ शेयर कर दी.'

चौथे यूजर ने लिखा, 'स्किल की एक मार्केट वैल्यू होती है, इसलिए ऑफर देते समय पुरानी पे-स्लिप को आधार न बनाएं. किसी कैंडिडेट की पिछली सैलरी के आधार पर हायरिंग करना बंद करें. इसके बजाय, वे जो वैल्यू देते हैं, उसके लिए उन्हें पेमेंट करना शुरू करें.'

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