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जर्मनी की महिला को पंसद आ गए हिमालय के गांव, 2 महीने में यूरोप छोड़कर वापस आई; कहा- 'ये अनफॉरगेटेबल हैं'

जोहाना डेहनिंग नाम की जर्मन महिला का कहना है कि हिमालय के गांव में जो लाइफ वो जी रही हैं, उसे छोड़कर वो वापस कॉर्पोरेट लाइफ में नहीं जाना चाहती हैं.

जर्मनी की महिला को पंसद आ गए हिमालय के गांव, 2 महीने में यूरोप छोड़कर वापस आई; कहा- 'ये अनफॉरगेटेबल हैं'
कॉर्पोरेट लाइफ छोड़कर पहाड़ों में रहने लगी जर्मनी के फोटोग्राफर महिला.
Instagram@itsjohannadehning

Viral Video: जर्मनी की डिजिटल कंटेंट क्रिएटर जोहाना डेहनिंग को हिमाचल के गांव इतने पसंद आ गए हैं कि वो 2 महीने भी इनसे दूर नहीं रह पाई हैं और यूरोप छोड़कर वापस भारत आ गई हैं. सोशल मीडिया पर एक बाद के एक कई वीडियोज पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, 'मॉनसून जा चुका है और अब पहाड़ों पर गोल्डन नजारा दिखता है वो कभी न भूल पाने वाला दृश्य है. मैं जानती हूं कि सर्दियां शुरू होते ही यहां सब बदल जाएगा. इसीलिए मैं इस नजारे को जी भरकर देखने आई हूं.'

'हिमालय पर कर रही साफ-सफाई'

एक दूसरे वीडियो में जोहाना ने कहा, 'पिछले दो महीने जब मैं यूरोप में थी तो पर्यावरण की समस्याओं के बारे में सोच-सोचकर मैं काफी निराश महसूस कर रही थी. मुझे ऐसा लगने लगा था कि दुनिया बर्बाद हो रही है. मैं लगातार सोचती रही कि क्या किया जा सकता है. तभी मैंने हिमालय की साफ-सफाई करने के बारे में सोचा और वापस यहां आ गई. जाहिर है, इससे पूरी दुनिया तो नहीं बच जाएगी, लेकिन कम से कम यह हिमालय की मिट्टी और जल-धाराओं में और ज्यादा प्लास्टिक जाने से तो रोकेगा ही.'

स्थानीय लोगों से मिलकर साथ खाती हैं खाना

इतना ही नहीं, आज उत्तराखंड के चमौली चिले की उर्गम घाटी में स्थित एक होमस्टे में रहते हुए जोहाना स्थानीय लोगों से मिलती है, उनकी तस्वीरें लेती हैं, उनसे बातचीत करके उनकी कहानियां दुनिया को बताती हैं और साथ-साथ कुछ ब्रांड्स के साथ पेड पार्टनरशिप करके पैसे भी कमा रही हैं. उनकी ली गई तस्वीरें इतनी सुंदर होती हैं कि लोग उन्हें देखकर पहाड़ों की तरफ खींचे चले जाते हैं. 

'ये लाइफ जीने के बाद अब नौकरी नहीं करनी'

खुद को फोटोग्राफर बताने वाली जोहाना ने एक और अन्य वीडियो में कहा, 'मुझे कॉर्पोरेट लाइफ हमेशा से एक स्कैम जैसी लगी, क्योंकि हम दिन का सबसे कीमती समय स्क्रीन के सामने बैठकर और ऐसी मीटिंग्स लेने में निकल देते हैं जो असल में उतनी इम्पोर्टेन्ट नहीं होती. हम यह सब पैसों के लिए करते हैं, क्योंकि हमने जो अर्थव्यवस्था बनाई है, उसमें हमें पैसों की जरूरत होती है. यह बात समझ में आती है. लेकिन अगर इसकी कीमत आपकी सेहत और मानसिक शांति है तो शायद अब इस पर फिर से विचार करने का समय आ गया है. हिमालय पर रहने के बाद मुझे इसे गहराई से सोचने का मौका मिला है. सच कहूं तो इस लाइफस्टाइल में जीने के बाद मैंने तय कर लिया है कि मैं नौकरी नहीं करने वाली.'

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन्स

जोहाना की कहानी इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रही है और तरह वीडियो पर अलग-अलग रिएक्शन्स दे रहे हैं.

एक यूजर ने लिखा, 'आपकी यह छोटी कोशिश बड़ा इंपेक्ट लेकर आएगी. लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि भारत में कचरा फैलाने की समस्या को सुलझाना बहुत मुश्किल है. आप चाहे 100 बार सफाई कर लें, मगर 101वी बार लोग फिर से कचरा फैला देंगे.'

दूसरे यूजर ने लिखा, 'सर्दियों का मौसम असल में ज्यादा खूबसूरत होता है, क्योंकि जब यह आता है तो बर्फ तो गिरती है, लेकिन आसमान लगातार कई दिनों तक सफेद नहीं रहता. मुझे लगता है कि बर्फ गिरने के बाद आसमान फिर से साफ हो जाता है.'

तीसरे यूजर ने लिखा, 'अब तो आपको पहाड़ी लोगों से सलाह लेनी पड़ेगी कि पहाड़ी खीरा कैसे खाते हैं. कुल मिलाकर, मुझे बहुत अच्छा लगा कि आप हिमालय की अपनी शांत और ऑर्गेनिक जिंदगी का इतने अच्छे से आनंद ले रही हैं.'

चौथे यूजर ने लिखा, 'उर्मम घाटी बहुत खूबसूरत है, लेकिन आपकी रील्स इसे और भी खास बना देती हैं. मेरा भाई भी अब वहां जाना चाहता है.'

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