Trending: उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान इलाके की शनिदर गुफा में वैज्ञानिकों को 75000 साल पुराना आदिमानव कंकाल मिला है, जो दो अलग कहानी बयां कर रहा है. पहली कहानी कत्ल की है, तो दूसरी प्यार और देखभाल की. 15 अक्टूबर 2026 को 'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' नाम की मैगजीन ने इस रिसर्च को छापा है, जो यह साबित करती है कि निएंडरथल सिर्फ कोई जंगली या बेवकूफ गुफावासी नहीं थे, बल्कि उनमें भी बिल्कुल आज के इंसानों जैसी ही अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद थीं.
'हार्ट शॉक की वजह से हुई मौत'
जब वैज्ञानिकों ने इस कंकाल के बाएं कंधे की हड्डी में करीब आधे इंच चौड़ा एक गोल छेद मिला. इस रिसर्च को लिखने वाली कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक एम्मा पोमेरॉय ने रॉयटर्स को बताया कि यह छेद किसी लकड़ी के नुकीले भाले से हुआ है. मारने वाले ने ऊपर से बहुत जोर से वार किया था. भाला सीने को चीरता हुआ सीधे फेफड़ों या दिल में जा घुसा, जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई. शिकारियों की भाषा में इसे हार्ट शॉट कहते हैं, जिससे पलक झपकते ही मौत हो जाती है.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ही एक और वैज्ञानिक ग्रीम बार्कर का मानना है कि यह हमला किसी जानवर ने नहीं, बल्कि आपसी झगड़े में किसी दूसरे निएंडरथल गुट के दुश्मन या उसी के कबीले के किसी साथी ने किया था.
दांत टूटे तो पीसकर खिलाया खाना
इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने जब इसके जबड़े और दांतों की जांच की तो एक नई कहानी सामने आई. रिसर्च के मुताबिक, जानलेवा हमले से कम से कम 1 साल पहले, उसके चेहरे पर कोई भयानक चोट लगी थी. यह चोट इतनी जबरदस्त थी कि उसके सामने के दांत बुरी तरह टूट गए थे और बाकी बचे दांत अपनी जगह से खिसक गए थे. एम्मा पोमेरॉय कहती हैं कि उस वक्त उसे इतना भयानक दर्द हुआ होगा कि उसका कुछ भी चबाना या खाना-पीना नामुमकिन हो गया होगा. इसके बावजूद वह कई महीनों तक जिंदा रहा. इसका सीधा सा मतलब है कि उस मुश्किल वक्त में उसके साथियों ने उसे मरने नहीं दिया. उन्होंने जरूर उसके लिए खाना पीसकर मुलायम किया होगा और उसे खिलाया होगा.
टूट गया 'बेवकूफ आदिमानव' का मिथक
रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि इस गुफा में यह अकेला नहीं मिला है. वहां चार और बड़ों और एक बच्चे के कंकाल भी मिले हैं. इन सबको एक बड़ी चट्टान के पीछे बहुत सलीके से दफनाया गया था.
पोमेरॉय कहती हैं कि हम लोग हमेशा से यही मानते आए हैं कि ये आदिमानव बेवकूफ होते थे, जंगली होते थे और इनमें कोई फीलिंग्स नहीं होती थीं. लेकिन यह नई खोज इस पुरानी सोच को गलत साबित करती है. इससे पता चलता है कि वे भी बिल्कुल आज के इंसानों जैसे ही थे. वो आपस में लड़ते भी थे, लेकिन बीमारी या चोट लगने पर अपनों की देखभाल करना भी अच्छे से जानते थे.
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