'आप सिर्फ पुरानी दिल्ली दिखाकर 140 करोड़ की आबादी वाले पूरे भारत को जज नहीं कर सकते.' यह बेबाक बात भारत घूमने आईं एक कनाडाई महिला ट्रैवलर ने पश्चिमी यूट्यूबर्स और ट्रैवल ब्लॉगर्स के एकतरफा नैरेटिव को आईना दिखाते हुए कही है. कनाडाई महिला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने व्यूज और सनसनी बटोरने के लिए भारत की गरीबी व अव्यवस्था को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने वाले विदेशी इन्फ्लुएंसर्स के दोमुंहे रवैये को कटघरे में खड़ा किया है. भारत के बदलते इन्फ्रास्ट्रक्चर, वर्ल्ड क्लास हॉस्पिटैलिटी और वास्तविक खूबसूरती का मजबूती से पक्ष लेने वाले इस वीडियो को इंटरनेट पर हजारों लोग शेयर कर रहे हैं.
'एक गली दिखाकर पूरे देश को तौलना बंद करो'
कनाडाई महिला ने अपने वायरल वीडियो में सीधे तौर पर उन पश्चिमी कंटेंट क्रिएटर्स को घेरा है जो भारत आते ही सबसे पहले कैमरे लेकर तंग गलियों और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में चले जाते हैं. उनका कहना है कि विदेशी टूरिस्ट जब भारत आते हैं, तो वे सिर्फ पुरानी दिल्ली जैसी जगहों को ही पूरे भारत की तस्वीर बनाकर दुनिया के सामने पेश करने लगते हैं. महिला ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी विशाल और विविधता से भरे देश के एक छोटे से हिस्से को पूरे मुल्क का चेहरा बनाकर दिखाना सरासर नाइंसाफी और एक संकीर्ण सोच को दर्शाता है.
भारत के पास वर्ल्ड क्लास सुविधाएं, पर वो कोई नहीं दिखाता
अपने अनुभवों को साझा करते हुए महिला ने बताया कि उन्होंने दिल्ली और ऋषिकेश का दौरा किया है. दिल्ली में वह शांगरी-ला जैसे लग्जरी होटल में ठहरी थीं, जहां का एक रात का खर्च करीब 160 कनाडाई डॉलर था. उन्होंने कहा कि भारत की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री दुनिया में सबसे बेहतरीन है और यहां की मेहमाननवाज़ी और बेहतरीन सर्विस का कोई मुकाबला नहीं है. लेकिन पश्चिमी इन्फ्लुएंसर्स कभी भारत के चमचमाते आधुनिक शहरों, शानदार होटलों, समृद्ध धरोहरों और बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपने कैमरों में कैद नहीं करते, क्योंकि उन्हें सिर्फ नकारात्मकता दिखाकर सस्ते व्यूज बटोरने की आदत लग चुकी है.
वियतनाम या थाईलैंड जाते हैं तो ऐसा क्यों नहीं करते?
महिला ने सोशल मीडिया पर दोहरा मापदंड अपनाने वाले क्रिएटर्स से सीधा सवाल पूछा कि क्या वे अन्य पर्यटन देशों के साथ भी ऐसा ही सुलूक करते हैं? उन्होंने कहा कि जब कोई ट्रैवलर वियतनाम, थाईलैंड या यूरोप के किसी देश में जाता है, तो वह कभी अपने वीडियो का टाइटल यह नहीं लिखता कि 'मैंने वहां का सबसे गंदा खाना खाया और मेरी जान जाते-जाते बची'. किसी अन्य देश के पिछड़ेपन का इस तरह मज़ाक नहीं उड़ाया जाता, लेकिन यह दुर्भावनापूर्ण तरीका सिर्फ और सिर्फ भारत के लिए ही क्यों अपनाया जाता है? महिला ने कहा कि इस तरह के एजेंडा वीडियो विदेशों में रहने वाले भारतीयों के प्रति नस्लीय टिप्पणियों और नफरत को बढ़ावा देते हैं, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए.
मिला जबरदस्त समर्थन, भारतीयों ने जताया आभार
कनाडाई महिला का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड करने लगा है और देश-विदेश के हजारों लोगों ने इसे देखा है. भारतीय यूज़र्स ने महिला के इस निष्पक्ष और तार्किक नजरिए की जमकर तारीफ की है. लोगों का कहना है कि जो बात लंबे समय से हर भारतीय महसूस कर रहा था, उसे एक विदेशी महिला ने बेहद शालीनता और मजबूती के साथ दुनिया के सामने रख दिया. सोशल मीडिया पर लोग इसे विदेशी पूर्वाग्रह के मुंह पर एक करारा जवाब मान रहे हैं.
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