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प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाने से डर लगता है... रसिक दुलारी के परिजनों ने ऐसा क्यों कहा ?

प्रेमानंद महाराज के आश्रम में शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद परिवार ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं. परिजनों का कहना है कि उन्हें आश्रम जाने से डर लगता है और पूरे मामले की CBI जांच होनी चाहिए.

प्रेमानंद महाराज के आश्रम में जाने से डर लगता है... रसिक दुलारी के परिजनों ने ऐसा क्यों कहा ?

देश-विदेश में लोकप्रिय संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम 'श्री हित राधा केली कुंज' में शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के बाद से हड़कंप मचा हुआ है. जबलपुर में रहने वाले रसिक दुलारी के परिजन गहरे सदमे में हैं और उनके मन में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं.आश्रम प्रबंधन ने 12 अक्टूबर को परिवार को 12वीं की क्रिया के लिए बुलाया है, लेकिन परिजन वहां दोबारा जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. परिजनों का सीधा कहना है कि अब उन्हें आश्रम जाने से डर लगता है, क्योंकि पिछली बार जब वे वहां गए थे, तो उनके साथ जो बर्ताव हुआ, उसने उनके मन में खौफ और गहरा अविश्वास भर दिया है. परिजनों साफ शब्दों में पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है. NDTV संवाददाता से बातचीत में उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी है.

26 सितंबर की सुबह और बंद दरवाजे

रसिक दुलारी उर्फ दीपक की मौत 25 सितंबर को हुई थी. खबर मिलते ही 26 सितंबर की सुबह पिता चेतराम, माता लौंग बाई, भाई और मामा समेत परिवार के छह लोग रोते-बिलखते जबलपुर से सीधे प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे. वहां पहुंचते ही आश्रम के लोगों ने उन्हें बताया कि उनका बेटा छत से गिर गया है और अस्पताल में भर्ती है. हालांकि, परिजनों को आश्रम के अंदर कदम तक नहीं रखने दिया गया. काफी देर तक जब वे बाहर ही बेबस खड़े रहे, तो एक साधु बाहर आया और उसने कहा कि सुबह 8 बजे वे दीपक को देख सकते हैं. परिवार उम्मीद लगाए बाहर बैठा रहा, लेकिन किसी ने उनकी मुलाकात नहीं कराई.

अंतिम संस्कार आश्रम ने किया, बेबस देखता रहा परिवार

जब आश्रम के भीतर से कोई मदद या जवाब नहीं मिला, तो परिजन थक-हारकर थाने पहुंचे. थाने में पुलिसकर्मियों ने उन्हें चाय-पानी कराया और ढांढस बंधाया. इसके बाद जब दीपक का अंतिम संस्कार हुआ, तो वह भी आश्रम के लोगों ने ही अपने हिसाब से पूरा कर दिया. परिवार के लोग दूर खड़े सब देखते रह गए. परिजनों का आरोप है कि न तो किसी ने परिवार के प्रति कोई संवेदना या शोक जताया और न ही किसी संत ने उनसे बात की. परिजनों का आरोप है कि वे खुद प्रेमानंद महाराज से मिल कर अपनी बात रखना चाह रहे थे लेकिन ऐसा नहीं करने दिया गया. इसके बाद वे भारी मन से वापस जबलपुर लौट आए.

कमरे से मोबाइल मिलने का रहस्य क्या है?

दीपक के मामा रघुनाथ ने आश्रम की व्यवस्था और दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि करीब दो साल पहले जब दीपक ने दीक्षा ली थी, तब से परिवार के किसी भी सदस्य को उससे मिलने नहीं दिया गया. दीक्षा के तुरंत बाद उसका फोन भी बंद करवा दिया गया था और परिवार से उसका संपर्क पूरी तरह काट दिया गया था. अब घटना के बाद जब यह जानकारी सामने आई कि दीपक के कमरे से मोबाइल फोन बरामद हुआ है, तो परिजनों का शक और गहरा हो गया है. मामा का कहना है कि जब दो साल से फोन रखने की सख्त मनाही थी, तो अचानक कमरे में फोन कहां से आया और उसमें क्या राज दफन हैं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

नाना का सनसनीखेज आरोप-छत से कूदने से ठीक पहले कौन आया था? 

दीपक के बुजुर्ग नाना प्रेमलाल लोधी ने पूरे मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. उनका कहना है कि कथित तौर पर आत्महत्या करने से ठीक पहले दीपक छत के फर्श पर लेटा हुआ था. उसी दौरान वहां कोई अनजान शख्स पहुंचा था. परिजनों का आरोप है कि उस व्यक्ति के छत पर आते ही दीपक बुरी तरह घबरा गया और उसी घबराहट में वह छत से कूद गया. परिजन अब उस अज्ञात व्यक्ति की पहचान उजागर करने और उसकी भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं. परिवार का पूछना है कि उस वक्त कमरे में कौन आया था और उसने ऐसा क्या कहा जिससे दीपक इतना ज्यादा खौफजदा हो गया.

12 अक्टूबर को बुलावा, पर अनहोनी की है आशंका

दीपक के अंतिम संस्कार के बाद आश्रम ने 12वीं की क्रिया में शामिल होने के लिए परिजनों को 12 अक्टूबर को वृंदावन बुलाया है. लेकिन परिवार अब वहां जाने से साफ कतरा रहा है. परिजनों का कहना है कि पिछली बार आश्रम में उनके साथ जैसा अमानवीय व्यवहार किया गया, उसे देखकर वे बुरी तरह सहम गए हैं. उन्हें आशंका है कि अगर वे वहां गए तो उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाएगा और कोई अनहोनी भी हो सकती है. इसी डर और अविश्वास की वजह से परिजन अब आश्रम की चौखट पर दोबारा कदम रखने से डर रहे हैं.

परिवार की एक ही मांग, सच सामने लाए सीबीआई

दीपक के पिता चेतराम, माता लौंग बाई और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. परिजनों का कहना है कि दीपक जैसा सीधा और भक्ति भाव वाला लड़का कभी आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता. लिहाजा यह सच सामने आना बेहद जरूरी है कि दीपक की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या इसके पीछे आश्रम का कोई बड़ा रहस्य छुपा हुआ है. परिजनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
 

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