
प्रतीकात्मक तस्वीर
लंदन:
ब्रिटेन के आवासीय स्कूलों के शिक्षकों को आदेश दिया गया है कि वे ट्रांसजेंडर बच्चों को 'ही' या 'शी' के बजाय 'ज़ी' कहकर बुलाएं ताकि वे असहज महसूस न करें।
दि संडे टेलीग्राफ की खबर में कहा गया कि ब्रिटेन आवासीय स्कूल एसोसिएशन की ओर से जारी आधिकारिक दिशानिर्देश में शिक्षकों से अपील की गई कि वे ट्रांसजेंडर छात्रों को 'ज़ी' कहें ताकि वे नाराज न हों और असहज महसूस न करें ।
शिक्षकों से कहा गया कि वे उनको ऐसे छात्रों की बढ़ती संख्या के लिए एक ''नई भाषा'' सीखने की जरूरत है जो 'ही' या 'शी' के तौर पर खुद को पुकारा जाना पसंद नहीं करते।
'ज़ी' को एक लिंग-निरपेक्ष उच्चारण माना जाता है और यूरोप में इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। ब्रिटिश शिक्षकों को सलाह दी जा रही है कि वे बच्चों को उनकी पसंद के उच्चारण से ही पुकारें, जिसमें 'ज़ी' भी शामिल है ।
परमार्थ संगठन 'एजुकेट एंड सेलिब्रेट' की संस्थापक और नए दिशानिर्देशों की लेखिका एली बार्नेस ने कहा कि अब चूंकि ज्यादा छात्र आवासीय स्कूलों में आ रहे हैं तो सिर्फ 'ही' या 'शी' के इस्तेमाल से आगे बढ़ना जरूरी हो जाता है ।
उन्होंने एक अखबार को बताया, ''स्कूलों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि समानता कानून के मुताबिक सभी छात्रों से बराबर का सलूक किया जाए और उनसे अच्छा व्यवहार हो।''
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
दि संडे टेलीग्राफ की खबर में कहा गया कि ब्रिटेन आवासीय स्कूल एसोसिएशन की ओर से जारी आधिकारिक दिशानिर्देश में शिक्षकों से अपील की गई कि वे ट्रांसजेंडर छात्रों को 'ज़ी' कहें ताकि वे नाराज न हों और असहज महसूस न करें ।
शिक्षकों से कहा गया कि वे उनको ऐसे छात्रों की बढ़ती संख्या के लिए एक ''नई भाषा'' सीखने की जरूरत है जो 'ही' या 'शी' के तौर पर खुद को पुकारा जाना पसंद नहीं करते।
'ज़ी' को एक लिंग-निरपेक्ष उच्चारण माना जाता है और यूरोप में इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। ब्रिटिश शिक्षकों को सलाह दी जा रही है कि वे बच्चों को उनकी पसंद के उच्चारण से ही पुकारें, जिसमें 'ज़ी' भी शामिल है ।
परमार्थ संगठन 'एजुकेट एंड सेलिब्रेट' की संस्थापक और नए दिशानिर्देशों की लेखिका एली बार्नेस ने कहा कि अब चूंकि ज्यादा छात्र आवासीय स्कूलों में आ रहे हैं तो सिर्फ 'ही' या 'शी' के इस्तेमाल से आगे बढ़ना जरूरी हो जाता है ।
उन्होंने एक अखबार को बताया, ''स्कूलों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि समानता कानून के मुताबिक सभी छात्रों से बराबर का सलूक किया जाए और उनसे अच्छा व्यवहार हो।''
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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