- ट्रंप ने कहा कि रविवार को ईरान के साथ समझौता हो जाएगा.
- अमेरिका राष्ट्रपति ने ये भी कहा कि डील साइन होने के बाद होर्मुज सभी के लिए खोल दिया जाएगा.
- हालांकि ईरान ने रविवार, 14 जून की तारीख को लेकर इनकार किया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रविवार (14 जून 2026) को ईरान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं. ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते के लागू होते ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल दिया जाएगा. हालांकि, दूसरी तरफ से आ रहे बयान कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. ईरान ने फिलहाल रविवार को किसी भी तरह के समझौते पर दस्तखत करने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे इस डील के समय और इसकी शर्तों को लेकर सस्पेंस गहरा गया है.
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक तरफ व्हाइट हाउस इस डील को लेकर बेहद उत्साहित है, वहीं ईरान का रुख अभी भी कड़ा बना हुआ है. दोनों देशों के बयानों में दिख रहा यह अंतर साफ करता है कि पर्दे के पीछे अभी भी कई मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है.
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ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था, "ईरान के साथ समझौता कल (रविवार) हस्ताक्षरित होने के लिए निर्धारित है."
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस डील के होते ही हॉर्मुज को खोल दिया जाएगा. हालांकि, तेहरान ने इस बात को स्वीकार किया है कि दोनों देश शर्तों के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्होंने रविवार की टाइमिंग पर आपत्ति जताई है.
ईरान की सेना के सबसे शक्तिशाली विंग 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने रविवार को होने वाले किसी भी हस्ताक्षर समारोह की योजना का खंडन किया है. आईआरजीसी ने ट्रंप के इस रवैये पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का रविवार के दिन ही दस्तखत करने के लिए 'असामान्य आग्रह' समझ से परे है. राजनयिक गलियारों में चल रही भारी हलचल के बीच दोनों देशों के बयानों में आया यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि बातचीत अभी भी नाजुक मोड़ पर है.
ऑनलाइन हस्ताक्षर
इस समझौते को लेकर एक और दिलचस्प बात सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, लॉजिस्टिक दिक्कतों और किसी भी संभावित देरी से बचने के लिए आमने-सामने की मुलाकात को रद्द कर दिया गया है. अब यह समझौता इलेक्ट्रॉनिक माध्यम यानी 'वर्चुअल साइनिंग' के जरिए हो सकता है, ताकि बातचीत की इस पूरी प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए.
एक अमेरिकी अधिकारी ने जानकारी दी है कि अगर वाशिंगटन और तेहरान के बीच इस 'सहमति पत्र' (MoU) पर हस्ताक्षर हो भी जाते हैं, तो यह अंतिम डील नहीं होगी. इसके बाद दोनों देशों के बीच 60 दिनों की नई बातचीत का दौर शुरू होगा, जिसमें इस फ्रेमवर्क को जमीन पर कैसे लागू किया जाए, इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी.
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