रेलवे लाइन के नीचे अंडरपास या सबवे बनना आम बात नहीं है. आमतौर पर ऐसे काम में कई हफ्ते या महीनों का समय लगता है और रेल यातायात भी प्रभावित होता है. लेकिन अहमदाबाद के वस्त्रापुर में पश्चिम रेलवे ने कुछ ऐसा किया, जिसने इंजीनियरिंग की दुनिया का ध्यान खींचा है. यहां महज 8 घंटे के रेलवे ब्लॉक में रेलवे लाइन के नीचे पूरा पैदल सबवे स्थापित कर दिया गया. इतना ही नहीं, पूरा काम तय समय से 45 मिनट पहले खत्म भी हो गया. रेलवे इसे तेज, सुरक्षित और आधुनिक निर्माण तकनीक की बड़ी सफलता मान रहा है. रेलवे का दावा है कि इस तकनीक से आने वाले समय में ऐसे कई प्रोजेक्ट तेजी से पूरे किए जा सकेंगे और ट्रेन संचालन पर भी कम असर पड़ेगा.
आधी रात को शुरू हुआ, सुबह तक तैयार
पश्चिम रेलवे ने 25 और 26 अगस्त की रात वस्त्रापुर में रेलवे लाइन के नीचे प्रीकास्ट पैदल सबवे स्थापित किया. इसके लिए 8 घंटे का रेलवे ब्लॉक मिला था. इस दौरान खुदाई, जगह तैयार करने, सबवे के बड़े हिस्सों को लगाने और ट्रैक को फिर से बहाल करने तक का पूरा काम सिर्फ 7 घंटे 15 मिनट में पूरा कर लिया गया. यानी तय समय से करीब 45 मिनट पहले.
एक रात, 8 घंटे का ब्लॉक और तैयार हो गया रेलवे के नीचे पैदल रास्ता! अहमदाबाद में बनी नई मिसाल#Ahamdabad #IndianRailway #Gujrat pic.twitter.com/7d6x9uWl6b
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) August 27, 2026
आखिर क्या है प्रीकास्ट तकनीक?
इस तकनीक में सबवे के हिस्से पहले से फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं. बाद में उन्हें मौके पर लाकर जोड़ा जाता है.इससे साइट पर निर्माण का समय बहुत कम हो जाता है. साथ ही गुणवत्ता भी बेहतर रहती है और रेलवे ट्रैक पर काम जल्दी पूरा किया जा सकता है. बताया गया कि यह पहल केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के जुलाई 2026 में गुजरात दौरे के बाद आगे बढ़ी. दौरे के दौरान रेलवे के लिए तैयार किए जा रहे प्रीकास्ट ढांचों का प्रदर्शन किया गया था. इसके बाद अहमदाबाद मंडल के अधिकारियों ने वस्त्रापुर में रेलवे लाइन के नीचे पैदल सबवे बनाने का फैसला किया.
स्थानीय लोगों को क्या होगा फायदा?
वस्त्रापुर इलाके के लोगों को अब रेलवे ट्रैक पार करने के लिए जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा.सबवे बनने से लोगों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा. इससे रेलवे ट्रैक पर होने वाले अनधिकृत आवागमन और ट्रैक क्रॉसिंग की घटनाएं कम होने की उम्मीद है. स्थानीय विधायक अमित ठाकेर के मुताबिक इलाके के लोगों को लंबे समय से सुरक्षित पैदल रास्ते की जरूरत थी. उन्होंने कहा कि इस तरह की संरचना बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम करने में भी मदद कर सकती है, जिससे लोगों को मानसून में भी आसानी से आवागमन करने में सुविधा होगी.
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रेलवे के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
रेलवे लाइन के नीचे अंडरग्राउंड क्रॉसिंग बनाना आसान काम नहीं होता. ट्रेनों की आवाजाही रोकने का समय सीमित होता है और उसी दौरान पूरा निर्माण करना पड़ता है. रेलवे का मानना है कि यदि प्रीकास्ट तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता है तो पैदल सबवे, अंडरपास और रेलवे लाइन के नीचे बनने वाले दूसरे ढांचे पहले की तुलना में बहुत कम समय में तैयार किए जा सकेंगे. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक प्रीकास्ट तकनीक निर्माण का समय घटाने, गुणवत्ता बनाए रखने और ट्रेनों की आवाजाही पर असर कम करने में मदद करती है.वस्त्रापुर में हुआ यह काम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसे रेलवे के भविष्य के कई प्रोजेक्ट्स में अपनाया जा सकता है.
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