- यूपी, बिहार, झारखंड, एमपी और ओडिशा में भारी बारिश से धान, तिल और मूंग की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा है.
- फसल नुकसान की सूचना आपदा आने के 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल या Crop Insurance App से दर्ज कराना है.
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कम से कम 25 प्रतिशत फसल नुकसान होने पर किसान बीमा क्लेम के पात्र होते हैं.
Fasal Nuksan Muavza Rules: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड से लेकर मध्य प्रदेश, ओडिशा तक मॉनसून की भारी बारिश से धान, तिल, मूंग जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. यूपी में लखनऊ-कानपुर से गोरखपुर तक 3 दिनों से बारिश हो रही है. अगर आप भी किसान हैं और फसलों को नुकसान पहुंचा है, तो सरकार से मुआवजा पाने के लिए आवेदन में देरी न करें. अगर आपने फसल बीमा नहीं कराया है, तो भी प्राकृतिक आपदा में सरकार किसानों को मुआवजा देती है. आइए जानते हैं कि फसल को नुकसान पर मुआवजा पाने के लिए क्या करना जरूरी है...
72 घंटे में दे फसल नुकसान की सूचना
फसल खराब होने पर सबसे महत्वपूर्ण कदम समय पर सूचना देना है. सरकार के नियमों के मुताबिक आपदा आने के 72 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है. ऐसे में
नीचे बताए गए तरीकों से फसल नुकसान की जानकारी दे सकते हैं. लेखपाल यज्ञ प्रकाश दीक्षित का कहना है कि अगर आपकी फसल को नुकसान पहुंचा है तो सबसे पहले तहसील को सूचना दें, ताकि लेखपाल आकर जल्द से जल्द जमीनी सर्वे कर ले.
- कृषि रक्षक पोर्टल के टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके सीधे शिकायत दर्ज कराएं.
- केंद्र सरकार के Crop Insurance App का उपयोग करके ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करें.
- अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी, लेखपाल या पटवारी, संबंधित बीमा कंपनी के प्रतिनिधि या उस बैंक शाखा से संपर्क करें, जहां आपका केसीसी (KCC) खाता है.
कितना प्रतिशत फसल नुकसान होना जरूरी है
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत ओलावृष्टि, बिजली गिरने या जलभराव जैसे स्थानीय आपदाओं में अगर खेत में 25 प्रतिशत या उससे अधिक फसल का नुकसान होता है, तो किसान बीमा क्लेम के हकदार होते हैं.
- SDRF या NDRF के तहत राज्य सरकार की आपदा राहत निधि से इनपुट सब्सिडी पाने के लिए कम से कम 33 प्रतिशत फसल का नुकसान होना जरूरी है.
कितने इलाके में फसल खराब होने पर मिलता है क्लेम
- अगर ओलावृष्टि, बिजली गिरने, भूस्खलन या बेमौसम बारिश से किसी एक ही किसान के खेत को नुकसान पहुंचा है, तो केवल उसी खेत का सर्वे कर मुआवजा दिया जाता है. इसके लिए पूरे गांव या ब्लॉक में नुकसान होना जरूरी नहीं है.
- सूखा, बाढ़ या कीटों के बड़े हमले की स्थिति में पूरे अधिसूचित क्षेत्र जैसे गांव या पटवारी हल्का को इकाई मानकर क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के जरिए कुल नुकसान का आकलन किया जाता है.
यह भी पढ़ें- किसानों के लिए बहुत ही अहम हैं ये 3 सरकारी योजनाएं; जानें सालाना 6,000 से 5 लाख रुपये तक पाने की पूरी जानकारी
भूल कर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां
- नुकसान होने के 72 घंटे के बाद दी गई सूचना मान्य नहीं होती और क्लेम खारिज हो सकता है, इसलिए 72 घंटे के भीतर ही नुकसान की शिकायत दर्ज कराएं.
- आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि दस्तावेजों जैसे खसरा खतौनी में नाम और स्पेलिंग बिल्कुल एक समान होनी चाहिए.
- बीमा पॉलिसी में वही फसल दर्ज कराएं, जो वास्तव में खेत में बोई गई है. अगर फसल बदली है, तो 7 दिनों के भीतर अपने बैंक या सीएससी सेंटर पर जाकर संशोधन कराएं.
- नुकसान का प्रमाण अपलोड करते समय सामान्य कैमरे के बजाय Crop Insurance App का ही प्रयोग करें, ताकि फोटो में खेत की लोकेशन और तारीख अपने आप दर्ज हो सके.
- सरकार मुआवजे की राशि सीधे Direct Benefit Transfer के जरिए बैंक खाते में भेजती है. इसलिए सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आधार से लिंक हो और डीबीटी सर्विस एक्टिव हो.
यह भी पढ़ें- गांव में जमीन या मकान का पट्टा कैसे बनवाएं? किसको मिलता है लाभ, कैसे करें आवेदन, लेखपाल से जानें प्रक्रिया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं