- ₹57 लाख की घर बैठी रिमोट जॉब छोड़ बेंगलुरु के ₹68 लाख के पैकेज को अपनाने के अनोखे जुगाड़ पर छिड़ी बड़ी बहस
- नई नौकरी के लिए टेक एक्सपर्ट हर हफ्ते मदुरै से बेंगलुरु तक ट्रेन में 20 घंटे का थकाऊ सफर करने पर कर रहा विचार
- सोशल मीडिया यूजर्स ने दी कड़ी चेतावनी, कहा, कुछ लाख रुपयों के फायदे के लिए अपने परिवार और सुकून का सौदा मत करो
एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जो इस समय एक बहुत बड़े धर्मसंकट में फंसा है. यह टेक एक्सपर्ट अपने घर मदुरै में बैठकर सुकून से काम कर रहा है और सालाना 57 लाख रुपये कमा रहा है. लेकिन तभी उसके पास बेंगलुरु की एक नामी कंपनी से 68 लाख रुपये का शानदार ऑफर आता है. दिखने में तो यह सीधे-सीधे तरक्की है, लेकिन इस तरक्की के पीछे छिपी है एक ऐसी शर्त, जिसने इस टेक एक्सपर्ट की रातों की नींद उड़ा दी है.
दरअसल, बेंगलुरु की इस नई कंपनी में उसे हफ्ते में सिर्फ दो दिन ऑफिस आना होगा. अब हमारे इस इंजीनियर ने एक गजब का जुगाड़ सोचा. उन्होंने तय किया कि वह बेंगलुरु शिफ्ट नहीं होंगे. हर सोमवार की रात मदुरै से ट्रेन पकड़ेंगे, रातभर का सफर करके मंगलवार सुबह बेंगलुरु पहुंचेंगे. मंगलवार और बुधवार ऑफिस में खटेंगे और फिर बुधवार की रात ट्रेन पकड़कर वापस मदुरै! सुनने में यह थका देने वाला सफर है, क्योंकि साल में ऐसी करीब 40 चक्कर काटने होंगे और हफ्ते के 20 घंटे सिर्फ ट्रेन में बीतेंगे. अब सवाल उठता है, क्या कुछ लाख रुपयों के लिए हर हफ्ते 20 घंटे की ये 'ट्रेन यात्रा' और कमरतोड़ थकान झेलना समझदारी है?
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पैसों का नुकसान
मुद्दा सिर्फ बेंगलुरु जाने का नहीं है. पुरानी कंपनी में उनके पास करीब 37 लाख डॉलर के शेयर हैं, जो अभी सिर्फ कागजी हैं क्योंकि कंपनी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है. अगर वह नौकरी छोड़ते हैं, तो इन शेयरों को बचाने के लिए उन्हें तुरंत जेब से 17 लाख रुपये का टैक्स और खर्च देना होगा, वरना ये मिट्टी हो जाएंगे. दूसरी तरफ, नई बेंगलुरु वाली कंपनी उन्हें जो शेयर दे रही है, वो सीधे अमेरिकी शेयर बाजार (Nasdaq) में बिकने वाले असली और पक्के पैसे हैं.
इंटरनेट यूजर्स ने क्या सलाह दी?
जब इस इंजीनियर ने अपनी ये उलझन सोशल मीडिया पर साझा की, तो लोगों ने उसे जो आईने दिखाए, वे आंखें खोलने वाले थे. एक यूजर ने अपनी कहानी बताते हुए लिखा कि उसने हैदराबाद के 65 लाख के ऑफर को लात मारकर अपने घर पर रहकर 45 लाख की रिमोट जॉब को चुना. क्योंकि घर पर बूढ़े मां-बाप का साथ था, बच्चों की सस्ती पढ़ाई थी और बेंगलुरु-हैदराबाद जैसे महानगरों का प्रदूषण, ट्रैफिक और बेतहाशा किराया नहीं था.
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थका देगी ये भागदौड़
दूसरे यूजर ने चेतावनी दी कि हफ्ते में सिर्फ दो दिन भी ऑफिस जाना सुनने में आसान लगता है, लेकिन जब आप हर हफ्ते सफर करते हैं, तो आपकी ऊर्जा पूरी तरह निचोड़ जाती है. फिर न तो परिवार के लिए वक्त बचता है और न ही अपनी स्किल सुधारने के लिए.
तो असली सवाल यही है
क्या आप करियर की उस सीढ़ी पर हैं जहां आपको सिर्फ पैसा कमाना है, या आप उस मोड़ पर हैं जहां जिंदगी का सुकून और परिवार के साथ बिताया हर पल ज्यादा मायने रखता है? फैसला इस इंजीनियर को करना है घर का पक्का सुकून या बेंगलुरु की महंगी दौड़.
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