भारतीय रेलवे की साइड लोअर बर्थ और सीट बदलने का पुराना झगड़ा. इस बार इस बहस में एक नया और मजेदार ट्विस्ट आया है जो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. पूजा नाम की एक लड़की ने दिल्ली से लखनऊ जाने वाली अयोध्या एक्सप्रेस की अपनी कहानी शेयर की है.
लगातार दो रात जागकर परीक्षा देने और तीन घंटे बस का सफर करने के बाद पूजा बुरी तरह थक चुकी थीं. दिल्ली से ट्रेन निकली, तो उन्होंने राहत की सांस ली और सेकेंड एसी की अपनी साइड लोअर बर्थ पर चादर तानकर सो गईं. लेकिन हापुड़ स्टेशन आते ही उनकी नींद में खलल पड़ गया. जब आंख खुली तो देखा कि दो आंटियों ने उनकी बर्थ को किटी पार्टी का अड्डा बना रखा था. हद तो तब हो गई जब पूजा पानी लेने बाहर गईं और पीछे से दो आंटियों ने बिना पूछे उनका बैग उठाकर अपर बर्थ पर फेंक दिया.
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सीट हथियाने का खेल शुरू
इसके बाद शुरू हुआ सीट हथियाने का असली खेल. आंटियों ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए कहा, "बेटा, हम बुजुर्ग हैं, ऊपर नहीं चढ़ सकते. तुम ऊपर चली जाओ." पूजा थक कर चूर थीं, तभी उन्हें इंटरनेट पर पढ़ी एक तरकीब याद आई. उन्होंने तपाक से कहा, "आंटी, मैंने यह सीट एजेंट से ₹3,200 में ली है. आप मुझे ₹3,200 दे दीजिए, मैं अभी ऊपर चली जाऊंगी."
यह सुनते ही वहां ऐसा सन्नाटा पसरा मानो ट्रेन ही रुक गई हो. आंटियां तुरंत जगह खाली कर अपनी बर्थ पर चली गईं और बड़बड़ाने लगीं, "आजकल के बच्चे. ट्रेन का टिकट लिया है या हवाई जहाज का?" पूजा बिना कुछ कहे चुपचाप पर्दा गिराकर सो गईं.
Two aunties took over my 2AC Side Lower, and then asked me to give up my own seat.
— Pooja (@poojaofficial5) September 28, 2026
But little did they know, I had a small trick I had read on the internet.
I was travelling on the Delhi-Lucknow Ayodhya Express (14206).
Because of my exams, I had not slept properly for two… pic.twitter.com/XGbfHF2Tv4
इंटरनेट पर छिड़ी बहस, लोग बोले- थोड़ी दया दिखानी चाहिए
इस घटना पर पर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई. एक यूजर ने सलाह दी कि बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के प्रति हमें थोड़ा दयालु होना चाहिए. वहीं, एक शातिर यूजर ने लिखा कि वह सीट बचाने के लिए पैर में नकली पट्टी बांध लेते हैं. एक यूजर ने याद दिलाया कि रात 10 बजे से पहले साइड लोअर को साइड अपर वाले के साथ शेयर करना नियम है. लेकिन राजीव नाम के यूजर की बात सबसे पते लिखी. उसने लिखा, "बिना लड़े अपनी दयालुता की कीमत बढ़ा देना, खुद को परेशान किए बिना सम्मान से जीने का सबसे बेहतरीन तरीका है." वैसे अगर आप पूजा की जगह होते, तो क्या करते? सीट छोड़ देते या अपनी जिद पर अड़े रहते?
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