VIRAL VIDEO: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है. 'राजू शाह नाम के एक यूजर (@iamshah0786) ने एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया. दावा है कि एक शख्स जब 20 साल बाद अपने घर लौटा, तो उसे अपने दादाजी का रखा हुआ घी का एक डिब्बा मिला. उसके दादाजी का निधन साल 2006 में ही हो चुका था. जब इस डिब्बे को खोला गया, तो अंदर घी बिल्कुल वैसा ही था. अब लोग हैरान हैं कि भाई, 20 साल तक घी भला कैसे ठीक रह सकता है?
ग्रोक से पूछा- तो मिला ये जवाब
जब राजू ने एआई टूल 'Grok' से इस बारे में पूछा, तो जवाब मिला कि शुद्ध घी में पानी और दूध के ठोस कण (मिल्क सॉलिड्स) नहीं होते. इसलिए इसमें बैक्टीरिया नहीं पनपते. अगर इसे ठंडी और अंधेरी जगह पर एयरटाइट डिब्बे में रखा जाए, तो यह 10 से 20 साल या उससे भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सकता है. आयुर्वेद में तो 10 साल से पुराने घी को 'पुराण घृत' यानी दवा माना गया है. हालांकि, इसे इस्तेमाल करने से पहले सूंघकर और चखकर देखना जरूरी है. अगर इसमें से साबुन जैसी गंध या कड़वा स्वाद आए, तो इसे न खाएं. वीडियो में भी डिब्बे के ऊपर जमी फंगस बाहरी थी, जबकि अंदर का घी बिल्कुल ठोस और साफ था.
एक आदमी 20 साल बाद अपने घर लौटा था, उसके दादा ने एक डिब्बे मे घी रखा था। 2006 में उसके दादा जी मर गए थे जब वो 20 साल बाद आया और डब्बे को खोला तो घी बिल्कुल सही था। @grok बताओ क्या इतने साल तक घी खराब नही होता है क्या? https://t.co/mmDwc66HMk
— Raju shah (@iamshah0786) November 1, 2026
इसके पीछे का विज्ञान क्या है?
विज्ञान कहता है कि घी बनाते समय मक्खन को अच्छे से उबाला जाता है, जिससे उसकी नमी (पानी) पूरी तरह खत्म हो जाती है. बैक्टीरिया को पनपने के लिए नमी की जरूरत होती है, जो घी में होती ही नहीं. दूसरा, इसमें से प्रोटीन और लैक्टोज को छानकर अलग कर दिया जाता है, जिससे इसके सड़ने का खतरा टल जाता है. अगर डिब्बा पूरी तरह सील बंद हो, तो हवा न मिलने के कारण यह दशकों तक सुरक्षित रह सकता है. हां, समय के साथ इसका रंग सफेद हो सकता है और स्वाद तथा सुगंध में बदलाव आ सकता है. इसमें से थोड़ी तीखी या खट्टी गंध आ सकती है, इसलिए यह आम खाने लायक तो नहीं रहता, लेकिन खराब भी नहीं होता.
आयुर्वेद में तो यह खजाना है
हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में 20 साल पुराने घी को बेहद कीमती माना गया है. 10 से 15 साल पुराने घी को 'कुम्भसर्पि' कहते हैं. आयुर्वेद के मुताबिक, घी जितना पुराना होता जाता है, उसके औषधीय गुण उतने ही ताकतवर होते जाते हैं. इस पुराने घी का इस्तेमाल खाने के लिए नहीं, बल्कि मिर्गी, मानसिक रोग, घाव भरने, याददाश्त बढ़ाने और त्वचा से जुड़ी बीमारियों के इलाज की दवाइयां बनाने में किया जाता है.
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चीज या घी: इंटरनेट यूजर के बीच छिड़ी बहस
इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की बेहद दिलचस्प और मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिसमें कुछ लोग इसे पुराना घी मान रहे हैं तो कुछ इसे चीज (Cheese) बता रहे हैं. रजनीश पारीक ने लिखा कि शुद्ध शहद और शुद्ध घी हजारों वर्षों के बाद भी खराब नहीं होते, जिसका प्रमाण मिस्र की कब्रों से भी मिलता है. वहीं अर्णव सिंह ने आयुर्वेद का संदर्भ देकर बताया कि 10 साल से पुराना घी 'पुराण घृत' के रूप में दवा का काम करता है, बशर्ते उसमें बासी या कड़वा स्वाद न हो, साथ ही उन्होंने वीडियो में दिख रहे मोल्ड को बाहरी बताते हुए अंदर के घी को बिल्कुल साफ और ठोस करार दिया. एक अन्य यूजर खंडानी हकीम चाचा ने एक मंदिर का जिक्र किया जहां 200 साल से भी अधिक पुराना घी सालों के हिसाब से मटकों में संजोकर रखा गया है.
इसके विपरीत, कुछ यूजर्स ने इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं; इकबाल और केशव ग्रोवर ने तीखा तंज कसते हुए इसे घी नहीं बल्कि तुर्की का "Tulum cheese" करार दिया और ओरिजिनल वीडियो का कैप्शन पढ़ने की सलाह दी. इस बात का समर्थन करते हुए रानी वाई ने कहा कि इसमें मिल्क सॉलिड्स साफ दिख रहे हैं, इसलिए यह निश्चित रूप से घी नहीं है, जबकि बोल ने इसे नकली चीज बताते हुए वीडियो की प्रामाणिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए.
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