- NASA का Artemis II मिशन पांच दशकों बाद पहला ऐसा मिशन है जो इंसानों को चंद्रमा की कक्षा में ले जाएगा
- इस मून मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री हैं और अंतरिक्ष यान का नाम ओरियन है
- चंद्रमा के दूसरी तरफ से गुजरते समय लगभग 40 मिनट तक कम्युनिकेशन सिस्टम बाधित रहेगा
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का चांद को लेकर 5 दशकों बाद पहला मिशन Artemis II जैसे-जैसे चांद की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इंसान की अंतरिक्ष उड़ान का नया अध्याय खुल रहा है. इस मिशन का मकसद अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से इतनी दूर ले जाना है, जितनी दूर अपोलो युग के बाद से कोई भी इंसान कभी नहीं गया है. इंटीग्रिटी नाम के ओरियन अंतरिक्ष यान में 4 अंतरिक्ष यात्री- रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टियान कोच और कनाडा के जेरेमी हेनसेन हैं. ये सभी यात्री 1970 में अपोलो 13 मिशन के दौरान बने दूरी के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए तैयार हैं.
ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल टीमों ने हाल ही में एक सटीक 'आउटबाउंड करेक्शन बर्न' किया. यह इंजन को कुछ समय के लिए चालू करने की एक छोटी लेकिन बेहद जरूरी प्रक्रिया थी, जिसने ओरियन के रास्ते को और बेहतर बनाया. यह बर्न सिर्फ 17.5 सेकंड का था लेकिन इसने यह तय कर दिया कि Artemis II एक 'फ्री-रिटर्न' रास्ते पर बना रहे. इसकी मदद से अंतरिक्ष यान चांद के चारों ओर चक्कर लगाकर बिना किसी बड़े प्रपल्शन के अपने आप पृथ्वी की ओर लौट आता है. इसे पहले भी कई बार परखा जा चुका है और इसे सबसे सुरक्षित माना जाता है.
Artemis II की क्रू के लिए यह सिर्फ एक सफर ही नहीं है, बल्कि यह अब तक की तैयारियों का टेस्ट भी है. सबसे पहले चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने मिशन का एक अहम मकसद पूरा किया और वह था ओरियन क्रू सर्वाइवल सिस्टम (OCSS) सूट का टेस्ट. क्रू ने सूट पहने और उन्हें प्रेशराइज किया, लीक की जांच की, सीट पर बैठने और उससे बाहर निकलने की प्रैक्टिस की और सूट पहने-पहने चलने-फिरने के साथ-साथ खाने-पीने की प्रैक्टिस भी की. इस सूट को यात्रियों को उड़ान के समय डायनामिक फेज में बचाने और केबिन का प्रेशर कम होने या पानी में उतरने के बाद बचाव कार्यों के दौरान मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है.
We're going farther than ever before 🚀
— NASA (@NASA) April 6, 2026
Today, the Artemis II crew will break the record for how far humans have traveled from Earth as they fly around the far side of the Moon.
Coverage begins at 1 p.m. EDT (1700 UTC). Watch Artemis II make history:… pic.twitter.com/hCOVQPkxUF
जैसे-जैसे ओरियन चांद के करीब पहुंचेगा, वैसे-वैसे वह पल भी नजदीक आता जाएगा जिसका इंतजार हर किसी को है और वह होगा चांद के दूसरी तरफ से गुजरना. जब अंतरिक्ष यान चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी पूरी तरह से नजर से ओझल हो जाएगी और साथ ही सभी संचार भी बंद हो जाएंगे. लगभग 40 मिनट तक चांद खुद ओरियन और पृथ्वी के बीच खड़ा होगा, जिससे कम्युनिकेशन सिस्टम पूरी तरह से ठप हो जाएगा. इस दौरान NASA के मिशन कंट्रोल से किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाएगा.
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NASA का कहना है कि यह कोई रिस्की या अलार्मिंग सिचुएशन नहीं है. मून मिशन के दौरान कम्युनिकेशन ठप होना एक आम बात है और पहले के मिशनों में भी ऐसा हो चुका है. Artemis II एक 'फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्ट्री' पर चल रहा है और कम्युनिकेशन सिस्टम का ठप पड़ना आम है.
इस 40 मिनट के दौरान अंतरिक्ष यात्री क्या कुछ करेंगे, यह सब पहले से तय है. इस दौरान सबसे अहम काम होगा चांद के सबसे दूर के हिस्से का अवलोकन करना. एक ऐसा हिस्सा जो पृथ्वी से दूर रहता है और जमीन से कभी दिखाई नहीं देता. अक्सर इसे 'डार्क साइड' समझ लिया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है. रोबोटिक कैमरों की बजाय अपनी आंखों से अंतरिक्ष यात्री चांद के इस उबड़-खाबड़ और गड्डों से भरे हिस्से का अवलोकन करेंगे. अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह चांद के उन हिस्सों को देखने का एक दुर्लभ अवसर है, जिन्हें कुछ ही इंसानों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा है.
These four astronauts are currently on a mission to fly around the Moon—and soon they'll break the record for how far humans have traveled from Earth!
— NASA (@NASA) April 5, 2026
Meet our Artemis II crew 👇 pic.twitter.com/f3ETfqNKCr
इतिहास में इसके कई उदाहरण हैं. अपोलो 11 मिशन के दौरान जब नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद की सतह पर उतरे तो माइकन कॉलिन्स अकेले रह गए. हर बार जब वह चांद के पीछे से गुजरे तो कॉलिन्स को कम्युनिकेशन सिस्टम में रुकावट का सामना करना पड़ा, पृथ्वी से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया. Artemis II में भी ऐसा ही होगा. बस फर्क इतना होगा कि इस बार इस खास पल को चार अंतरिक्ष यात्री एक साथ साझा करेंगे.
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इसका एक उदाहरण भारत में भी है. 2014 में जब ISRO का मंगल मिशन 'मंगलयान' मंगल के ऑर्बिट में स्थापित किया गया था तब अंतरिक्ष यान मंगल के 'दूसरी तरफ' था. कई मिनटों तक कम्युनिकेशन सिस्टम पूरी तरह बंद रहा. भारत को मंगलयान की कामयाबी का पता तब चला, जब वह अंतरिक्ष यान मंगल के पीछे से बाहर निकला. यह पल भारत के अंतरिक्ष इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है. यह दिखाता है कि 'डीप-स्पेस' मिशनों के दौरान इस तरह का कम्युनिकेशन ब्लैकआउट कितना सामान्य है.

NASA यह मानता है कि भविष्य में इससे बचा जा सकता है. NASA आर्टेमिस मिशन के तहत चांद के चारों ओर रिले सैटेलाइट तैनात करने की योजना बना रहा है. ये रिले सिस्टम तब भी लगातार कम्युनिकेशन बनाए रखने में मदद करेंगे जब अंतरिक्ष यान चांद के पीछे होगा. हालांकि, Artemis II इस सिस्टम के लगने से पहले ही सफर पर चला गया है. दिलचस्प बात यह है कि चीन ने तब रिले सैटेलाइट तैनात किए थे, जब उसने चांद के दूसरी तरफ एक रोबोट उतारा था.
POV: You're flying by the Moon.
— NASA Solar System (@NASASolarSystem) April 5, 2026
This visualization is designed to show you what exactly the Artemis II astronauts will see outside their window during their lunar flyby.
Here, the seven-hour visualization is compressed into 28 seconds. ⬇ (1/4) pic.twitter.com/2OMAy37oht
अंतरिक्ष यात्रियों और इस मिशन से जुड़े सभी लोगों में भारी उत्साह है. Artemis II की क्रू के लिए यह उड़ान पांच दशकों में पहला ऐसा मौका है, जब इंसान चंद्रमा की कक्षा में घूमेंगे और उसकी 'दूसरी साइड' को सीधे अपनी आंखों से देखेंगे. यह भविष्य के उन मिशनों के लिए काफी अहम होगा, जो अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर उतारेंगे और आखिरकार मंगल ग्रह तक इंसानों के पहुंचने का रास्ता खोलेंगे.
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Artemis II की क्रू एक दुर्लभ 'सूर्य ग्रहण' का गवाह बनेगा, जो अंतरिक्ष से केवल उन्हें ही दिखाई देगा. जैसे ही ओरियन अंतरिक्ष यान चांद की दूसरी तरफ से गुजरेगा, चांद सूर्य को अंतरिक्ष यात्रियों की नजरों से पूरी तरह से ढक लेगा. इससे उन्हें सूर्य का बाहरी वातावरण 'कोरोना' अंतरिक्ष के गहरे अंधेरे के बीच चमकता हुआ दिखाई देगा. यह सूर्य ग्रहण पृथ्वी से दिखाई नहीं देगा. यह Artemis II की क्रू के लिए एक ऐसा पल होगा, जिसे इंसान की आंखों ने अब तक सिर्फ गहरे अंतरिक्ष से ही देखा है.
जैसे ही ओरियन चांद का चक्कर लगाएगा, वह पृथ्वी के सबसे करीब होगा और फिर बाहर की ओर बढ़ते हुए पृथ्वी से बहुत दूरी तर जाएगा. इस तरह वह 'अपोलो 13' का रिकॉर्ड तोड़ देगा. इसके तुरंत बाद अंतरिक्ष यान चांद के पीछे से फिर से बाहर निकलेगा और कम्युनिकेशन सिस्टम बहाल हो जाएगा और पृथ्वी एक बार फिर से नजर आने लगेगी.
Artemis II लूनर फ्लाईबाई की टाइमलाइन
रात 10:30 बजे (सोमवार): लूनर फ्लाईबाई का NASA+ पर सीधा प्रसारण शुरू होगा.
रात 11:26 बजे: Artemis II का क्रू पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी तय करने का Apollo 13 का रिकॉर्ड तोड़ देगा.
रात 11:40 बजे: क्रू दूरी का रिकॉर्ड तोड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया देगा. (सिर्फ ऑडियो)
रात 11:45 बजे: Orion केबिन को फ्लाईबाई ऑपरेशन के लिए तैयार करेगा.
रात 12:15 बजे (मंगलवार): चंद्रमा का अवलोकन शुरू होगा.
सुबह 4:14 बजे: जब Orion चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा, तो कम्युनिकेशन टूटने का अनुमान है.
सुबह 4:32 बजे: चंद्रमा के सबसे करीब पहुंचने का समय.
सुबह 4:37 बजे: Orion पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी पर होगा.
सुबह 4:55 बजे: पृथ्वी दिखने लगेगी और कम्युनिकेशन बहाल होगा.
सुबह 6:05–7:02 बजे: क्रू के नजरिए से सूर्य ग्रहण.
सुबह 6:50 बजे: चंद्रमा का अवलोकन खत्म होगा.
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