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इस साल गर्मी मचाएगी तबाही, समुद्र के नीचे NASA सैटेलाइट ने पकड़ी हलचल, वैज्ञानिकों का अल-नीनो को लेकर अलर्ट

अंतरिक्ष से समुद्र के जलस्तर की निगरानी कर रहे सेंटिनल-6 सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में एक बड़ी केल्विन वेव पकड़ी है. यह इस साल भीषण गर्मी पड़ने का संकेत है.

इस साल गर्मी मचाएगी तबाही, समुद्र के नीचे NASA सैटेलाइट ने पकड़ी हलचल, वैज्ञानिकों का अल-नीनो को लेकर अलर्ट
NASA El Nino Alert
  • नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच सैटेलाइट ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर और गर्म पानी की हलचल को रिकॉर्ड किया
  • समुद्र में केल्विन वेव नामक गर्म पानी की लहरें अल-नीनो चक्र के सक्रिय होने का प्रमुख संकेत
  • अल-नीनो के कारण कई देशों में सूखा, भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है
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भारत समेत दुनिया के कई देश भीषण गर्मी को झेल रहे हैं. वैज्ञानिक लगातार इस साल अल-नीनो को लेकर चिंता जता रहे हैं. इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी बेहद खतरनाक चेतावनी दी है. NASA के 'सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच' (Sentinel-6 Michael Freilich) सैटेलाइट ने समुद्र की गहराइयों में एक ऐसी हलचल को रिकॉर्ड किया है, जो आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम को पूरी तरह तहस-नहस कर सकती है. इस सैटेलाइट ने दक्षिण अमेरिका के तट से दूर समुद्र के बढ़ते जलस्तर को दर्ज किया है, जो बताता है कि वहां पानी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. NASA ने समुद्र में एक विशालकाय लहर को कैद किया है. वैज्ञानिकों की भाषा में 'केल्विन वेव' कही जाने वाली गर्म पानी की यह आहट इस बात का साफ और सीधा संकेत है कि इस साल के आखिर तक दुनिया एक बार फिर खतरनाक अल-नीनो (El-Nino) चक्र की चपेट में आ सकती है. यह अल-नीनो कई देशों में सूखे, भीषण गर्मी और बेमौसम मूसलाधार बारिश का तांडव ला सकता है.

साल 2020 में NASA द्वारा लॉन्च किया गया सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच सैटेलाइट हर 10 दिन में पूरे समुद्र के जलस्तर को मापता है और उसका नक्शा तैयार करता है. यह सैटेलाइट जलस्तर को इंच के भी बहुत छोटे हिस्से तक सटीकता से माप सकता है. अल नीनो की स्थिति में, यह सैटेलाइट उन लहरों पर नजर रखता है जिन्हें 'गर्म केल्विन लहरें' कहा जाता है.

क्या होती हैं 'गर्म केल्विन लहरें'?

समुद्र के भीतर अल नीनो को जन्म देने में इन लहरों की सबसे बड़ी भूमिका होती है. आमतौर पर भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर पूरब से पश्चिम की ओर पूर्वी हवाएं चलती हैं. लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तो उनकी जगह पश्चिमी हवाएं बहने लगती हैं. हवाओं के इस उलटफेर से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र का गर्म पानी पूरब की ओर बढ़ने लगता है. मई के मध्य तक, पेरू के आसपास के समुद्र का जलस्तर सामान्य औसत से 15 सेंटीमीटर से भी ज्यादा ऊपर उठ चुका है. जब कई महीनों तक एक के बाद एक ये केल्विन लहरें कोलंबिया, इक्वाडोर और पेरू के तटों पर गर्म पानी जमा कर देती हैं, तब अल नीनो पूरी तरह सक्रिय हो जाता है.

'तेजी से रफ्तार पकड़ रहा अल-नीनो'

NASA की 'जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी' में समुद्र के जलस्तर पर शोध करने वाले और इस सैटेलाइट प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक जोश विलिस ने बताया कि इस साल अल नीनो की शुरुआत, साल 2015 और 1997 के बड़े अल नीनो की तुलना में थोड़ी देर से हुई है, लेकिन अब यह तेजी से अपनी रफ्तार पकड़ रहा है. उन्होंने आगे कहा कि अब हमें यह देखना होगा कि यह कितना बड़ा रूप लेता है.

सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच सैटेलाइट से मिले डेटा से पता चलता है कि जनवरी के आखिर में माइक्रोनेशिया के आस-पास एक छोटी केल्विन लहर बनी थी, जो फरवरी के मध्य तक खत्म हो गई. इसके बाद मार्च की शुरुआत में एक नई लहर बनी, जो धीरे-धीरे पूरब की ओर बढ़ती गई. मई के मध्य तक, पेरू के आस-पास के समुद्र का जलस्तर, लंबे समय के औसत जलस्तर की तुलना में 5.9 इंच (15 सेंटीमीटर) से भी ज्यादा बढ़ गया था.

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