- नासा का आर्टेमिस-2 मिशन 1972 के बाद पहली बार चंद्रमा के करीब इंसानों को ले जाने वाला है
- ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने पृथ्वी की निचली कक्षा से निकलकर चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है
- चार अंतरिक्ष यात्री लगभग चार लाख किलोमीटर की दूरी तय कर चंद्रमा के पीछे से लौटेंगे
इंसानियत ने एक बार फिर गहरे अंतरिक्ष की असीमित गहराइयों में कदम रख दिया है. नासा के 'आर्टेमिस-2' रॉकेट अब पृथ्वी की निचली कक्षा से निकलकर चांद की ओर कूच कर गया है. इस दौरान मिशन की इकलौती महिला क्रू और पहली बार चांद की ओर जाने वाली महिला क्रिस्टीना कोच ने खुद को नया नाम दिया है. क्रिस्टीना ने अपना नाम स्पेस प्लंबर बताया है. दरअसल रॉकेट के बाथरूम में तकनीकी खामी आने पर उन्हें उसकी मरम्मत करनी पड़ी थी, इसी वजह से उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज को खुद को अंतरिक्ष का प्लंबर बताया है.
“I'm the space plumber, I'm proud to call myself the space plumber.”
— NASA (@NASA) April 3, 2026
Mission specialists like @Astro_Christina train for all roles so they can jump in wherever they're needed. Sometimes that means fixing vital machinery, like the spacecraft toilet. pic.twitter.com/RGBWkwRgX7
जब पृथ्वी की कक्षा से चांद की ओर निकला नासा का ओरियन स्पेसक्राफ्ट
भारतीय समयानुसार सुबह 6:19 बजे ओरियन स्पेसक्राफ्ट का मेन इंजन पूरे 5 मिनट 49 सेकंड तक काम करते रहे और चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की ओर धकेल दिया. 1972 में अपोलो-17 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चांद के इतने करीब पहुंचने वाला है.
अब ओरियन कैप्सूल अपनी करीब 3.84 लाख किलोमीटर लंबी यात्रा पर निकल चुका है. खास बात यह है कि इस सफर में एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच वह पहली महिला बनने जा रही हैं, जो चंद्रमा के पास से उड़ान भरेंगी.
मिशन कंट्रोल रूम से 'गो' का सिग्नल मिलते ही ओरियन ने अपनी ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न (TLI) की प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद कैप्सूल की गति इतनी बढ़ गई कि यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए चांद की ओर बढ़ गया.
It's not a straight shot to the far side of the Moon! 🌕
— NASA (@NASA) April 2, 2026
Over approximately 10 days, the Artemis II astronauts will orbit Earth twice before looping around the far side of the Moon in a figure eight and returning home. pic.twitter.com/udjejhxgVx
अपोलो-13 का टूटेगा रिकॉर्ड
लॉन्चिंग के ठीक 25 घंटे बाद हुए इस 'इग्निशन' ने तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री को गहरे अंतरिक्ष के उस सफर पर डाल दिया है, जहां दशकों से कोई नहीं गया.
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
आर्टेमिस-2 एक 'U-टर्न' मिशन है. मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के पीछे से चक्कर लगाकर सीधे धरती की ओर वापस लौटेंगे. इस दौरान वे करीब 4 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेंगे.
मिशन मैनेजमेंट के अनुसार, अभी तक कोई बड़ी तकनीकी खराबी सामने नहीं आई है. बीच में टॉयलेट को लेकर आई एक छोटी सी समस्या को भी इंजीनियरों ने सफलतापूर्वक सुलझा लिया है. इसके बाद क्रू का सफर अब काफी आरामदायक है.

आर्टेमिस-2 एक 'U-टर्न' मिशन है. मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के पीछे से चक्कर लगाकर सीधे धरती की ओर वापस लौटेंगे.
Photo Credit: NASA
कब होगी वापसी?
आर्टेमिस-2 के ये चारों यात्री इस 9 दिवसीय मिशन के दौरान कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग भी करेंगे. वे यह जांचेंगे कि ओरियन स्पेसक्राफ्ट गहरे अंतरिक्ष के रेडिएशन और वातावरण में इंसानों के लिए कितना सुरक्षित है. यह पूरी यात्रा एक तरह का 'टेस्ट रन' है. ये भविष्य में चांद की सतह पर उतरने वाले आर्टेमिस-3 मिशन का रास्ता साफ करेगी.
इस तरह अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो यह दल 10 अप्रैल को धरती पर वापस लौटेगा. वापसी के दौरान जब ओरियन वायुमंडल में प्रवेश करेगा, तो इसकी गति अब तक की सबसे तेज गति हो सकती है.
फिलहाल, ये चारों यात्री उन जंजीरों को तोड़ चुके हैं जिन्होंने दशकों से हमें धरती के इर्द-गिर्द बांध रखा था और अब पूरी दुनिया की नजरें चांद के उस पार होने वाले इस ऐतिहासिक फ्लाई-बाय पर टिकी हैं.
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