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अमेरिका ने खुफिया जानकारी जुटाने और प्रशिक्षण के लिए सैनिकों के साथ नाइजीरिया में ड्रोन भेजे

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, बोको हरम के विद्रोह की शुरुआत के बाद से नाइजीरिया में 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. विश्लेषकों का कहना है कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है.

अमेरिका ने खुफिया जानकारी जुटाने और प्रशिक्षण के लिए सैनिकों के साथ नाइजीरिया में ड्रोन भेजे
एमक्यू-9 ड्रोन को बेहद शक्तिशाली और खतरनाक माना जाता है.
  • नाइजीरिया की सेना सुरक्षा संकट से जूझ रही है, जिसके मद्देनजर अमेरिका ने वहां एमक्यू-9 ड्रोन तैनात किए हैं
  • एमक्यू-9 ड्रोन 40,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और 30 घंटे तक हवाई निगरानी कर सकते हैं
  • अमेरिकी सैनिक नाइजीरियाई सशस्त्र बलों को खुफिया सहायता, परामर्श और लक्षित प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं

एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने सोमवार को बताया कि पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजीरिया की सेना कई तरह के सुरक्षा संकट से जूझ रही है, ऐसे में अमेरिका ने प्रशिक्षण और खुफिया जानकारी प्रदान करने के लिए वहां ड्रोन तैनात किए हैं. एमक्यू-9 ड्रोन, जिन्हें रीपर के नाम से भी जाना जाता है, पिछले महीने नाइजीरिया पहुंचे 200 अमेरिकी सैनिकों के साथ तैनात किए गए हैं. ये ड्रोन 40,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और 30 घंटे से अधिक समय तक मंडरा सकते हैं. अमेरिकी सेना और सीआईए दोनों ही वर्षों से मध्य पूर्व में, अफगानिस्तान, इराक और अब यमन में अमेरिकी बमबारी अभियान के दौरान इनका इस्तेमाल कर रहे हैं.

नाइजीरिया को कैसा संकट

अफ्रीका का सबसे अधिक आबादी वाला देश नाइजीरिया, विशेष रूप से देश के उत्तरी भाग में, एक जटिल सुरक्षा संकट से जूझ रहा है. नाइजीरिया में सक्रिय सबसे प्रमुख इस्लामी आतंकवादी समूहों में बोको हरम और उसका अलग हुआ गुट शामिल है, जो इस्लामिक स्टेट समूह से संबद्ध है और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस या आईएसडब्ल्यूएपी के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा, आईएस से जुड़ा लकुरावा और अन्य "डाकू" समूह भी हैं जो फिरौती के लिए अपहरण और अवैध खनन में माहिर हैं.

अमेरिकी अफ्रीका कमान (AFRICOM) के एक प्रवक्ता ने एपी को बताया कि अमेरिकी सैनिक नाइजीरियाई सशस्त्र बलों के समर्थन में खुफिया सहायता, परामर्श और लक्षित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अपने नाइजीरियाई समकक्षों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. प्रवक्ता ने बताया कि सैनिक और MQ-9 ड्रोन देश के उत्तर-पूर्व में स्थित नवनिर्मित हवाई अड्डे, बाउची हवाई अड्डे पर तैनात हैं. तैनात ड्रोनों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है. MQ-9 ड्रोनों की कीमत लगभग 30 मिलियन डॉलर प्रति ड्रोन है, ये 40,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और इनके भूमि और समुद्र के लिए अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं. इनका उपयोग हवाई हमले करने के लिए भी किया जा सकता है, लेकिन AFRICOM का कहना है कि नाइजीरिया में इनका उपयोग केवल खुफिया जानकारी जुटाने और प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा. यह तैनाती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाइजीरिया के सुरक्षा संकट में ईसाइयों को निशाना बनाए जाने के आरोपों के बाद हुए एक नए सुरक्षा समझौते का हिस्सा है. अमेरिका ने 26 दिसंबर को आईएस बलों के खिलाफ हमले शुरू किए थे.

जुंटा ने अमेरिकी सैनिको को हटा दिया

इससे पहले अमेरिका पड़ोसी देश नाइजर में एक बड़ा ड्रोन बेस संचालित करता था, लेकिन सत्ताधारी सैन्य जुंटा द्वारा अमेरिकी सैनिकों को देश से निष्कासित किए जाने के बाद इसे बंद कर दिया गया. इसी महीने की शुरुआत में, बोर्नो राज्य की राजधानी मैदुगुरी में तीन संदिग्ध आत्मघाती बम विस्फोटों में कम से कम 23 लोग मारे गए और 108 अन्य घायल हो गए. किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन संदेह तुरंत बोको हरम पर गया, जिसने 2009 में पूर्वोत्तर नाइजीरिया में शरिया, या इस्लामी कानून की अपनी कट्टरपंथी व्याख्या को लागू करने के लिए विद्रोह शुरू किया था. हाल ही में यह संकट और भी गंभीर हो गया है क्योंकि इसमें पड़ोसी साहेल क्षेत्र के अन्य आतंकवादी भी शामिल हो गए हैं, जिनमें जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन भी शामिल है, जिसने पिछले साल नाइजीरियाई धरती पर अपने पहले हमले की जिम्मेदारी ली थी. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, बोको हरम के विद्रोह की शुरुआत के बाद से नाइजीरिया में 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. विश्लेषकों का कहना है कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है.

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