- अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज पहली बार चालीस लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो गया है जो अनुमान से भी तेजी से बढ़ा है
- अमेरिकी सरकार को बढ़ते कर्ज के कारण नए कर्ज पर उच्च ब्याज देना पड़ रहा है जो 2007 के बाद सबसे ज्यादा है
- विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी कर्ज और खर्च की स्थिति लंबे समय तक मैनेज करना मुश्किल होता जा रहा है
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश अपने इतिहास के अबतक के सबसे बड़े कर्ज में डूब गया है. उसके ऊपर 40 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा का कर्ज हो गया है. हां बात अमेरिका की हो रही है, जिसका कुल सरकारी कर्ज पहली बार इस आंकड़े को पार कर गया है. हैरानी की बात यह है कि यह आंकड़ा पहले लगाए गए अनुमान से भी ज्यादा तेजी से बढ़ा है. इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन टैरिफ नीतियों का भी कुछ असर माना जा रहा है, जिन्हें बाद में अमान्य कर दिया गया. बाकी ट्रंप पहले ही ईरान के महंगे जंग में सेना को लेकर पिछले 6 महीने से कूदे पड़े हैं.
अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को कामकाज खत्म होने तक अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज 40.05 लाख करोड़ डॉलर हो चुका था. अमेरिकी वित्त विभाग ने बुधवार को यह आंकड़ा जारी किया. इससे पहले अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के बजट कार्यालय ने अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष 2026 के अंत तक अमेरिका का कुल कर्ज 39.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचेगा. लेकिन कर्ज इस अनुमान से पहले ही आगे निकल गया.
ट्रंप सरकार के लिए यह आंकड़े रेड अलर्ट
मंगलवार को लंबे समय के लिए अमेरिकी सरकार को दिए जाने वाले कर्ज पर मिलने वाला ब्याज 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. इसकी एक वजह ईरान के साथ युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई की चिंता और अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर डर है. इस बढ़ते कर्ज की वजह से अमेरिकी सरकार को पुराने कर्ज को चुकाने या उसकी जगह नया कर्ज लेने के लिए अब ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है. 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी से पहले के समय के बाद यह ब्याज दर सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है.
हालांकि, अमेरिकी वित्त विभाग ने बुधवार सुबह लंबे समय के सरकारी कर्ज के बाजार को संभालने की कोशिश की. इसके बाद ब्याज दरों में कुछ गिरावट आई.
अमेरिका इतना कर्ज क्यों ले रहा है?
अमेरिकी सरकार जितना पैसा कमाती है, उससे ज्यादा खर्च करती है. इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती है. इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध पर होने वाले खर्च, टैक्स में कटौती और सरकार की दूसरी जरूरतों को पूरा करने में किया जाता है. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की बजट और टैक्स विशेषज्ञ जेसिका रीडल ने कहा कि काफी समय से यह पता था कि अमेरिका सरकार का खर्च और कर्ज ऐसी दिशा में जा रहा है, जिसे लंबे समय तक संभालना मुश्किल हो सकता है.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में अमेरिका को शांति और अच्छे आर्थिक दौर के दौरान भी हर साल करीब 2 लाख करोड़ डॉलर की कमी का सामना करना पड़ा है. पहले अगर किसी देश का सरकारी खर्च उसकी अर्थव्यवस्था के कुल आकार यानी जीडीपी के 3 से 4 फीसदी तक ज्यादा होता था, तो बाजार इसे लेकर चिंतित हो जाता था. लेकिन अब अमेरिका में यह अंतर करीब 6 से 7 फीसदी तक पहुंच गया है. रीडल ने कहा कि इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है.
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