अमेरिका में लोकतांत्रिक व्यवस्था को उसकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. हालांकि, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका के हस्तक्षेप और उसकी विदेश नीति को लेकर लगातार बहस होती रही है. अमेरिकी समाज और राजनीति में अलग-अलग विचारों और समूहों के बीच मतभेद भी हमेशा रहे हैं. यही विविधता अमेरिकी लोकतंत्र की खासियत भी है और चुनौती भी.
मौजूदा समय में अमेरिका के मिडटर्म चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं. ये चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में होते हैं. इन्हें मौजूदा सरकार के लिए यह एक तरह से जनमत होता है.
क्या राष्ट्रपति चुनाव से अलग है मिडटर्म इलेक्शन
मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव से अलग होते हैं. इनमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्यों का चुनाव होता है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव होता है. इन सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है. इन चुनावों के जरिए अमेरिकी मतदाता राष्ट्रपति के शुरुआती दो सालों के कामकाज पर अपनी राय देते हैं.
इसलिए मिडटर्म इलेक्शन को एक तरह से राष्ट्रपति का राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड माना जा सकता है. इन चुनावों से यह संकेत मिलता है कि जनता मौजूदा सरकार की नीतियों और उसके कामकाज से कितनी संतुष्ट या असंतुष्ट है.
राष्ट्रपति ट्रंप के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं चुनाव
मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत को चुनौती देने का अवसर है. अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस के किसी सदन में मजबूत स्थिति हासिल करते हैं, तो वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले करना मुश्किल बना सकते हैं. मसलन, न्यायाधीशों की नियुक्ति, कैबिनेट में नियुक्तियां और सरकार के महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
इसलिए मिडटर्म चुनाव सिर्फ सांसद चुनने का चुनाव नहीं है. यह तय कर सकता है कि राष्ट्रपति अपने बचे हुए दो सालों में कितनी आसानी से अपना राजनीतिक और विधायी एजेंडा आगे बढ़ा पाएंगे.
जनता के लिए 'मिड-टर्म रिव्यू'है यह चुनाव
मिडटर्म चुनाव को अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में मध्यावधि समीक्षा की तरह देखा जा सकता है. मतदाता यह तय कर सकते हैं कि कांग्रेस और सीनेट पर किस पार्टी का नियंत्रण होना चाहिए. अगर जनता राष्ट्रपति की नीतियों से असंतुष्ट होती है तो वह विपक्षी पार्टी को ज्यादा सीटें देकर सत्ता के संतुलन को बदल सकती है. इस तरह मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति और सत्तारूढ़ पार्टी के लिए कोर्स करेक्शन का संकेत भी बन सकते हैं.

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यह व्यवस्था अमेरिकी शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने का काम करती है. राष्ट्रपति को यह समझना पड़ता है कि जनता उसके कामकाज को किस नजर से देख रही है.
ईरान युद्ध और डोनाल्ड ट्रंप की चुनौती
मौजूदा परिस्थितियों में ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ युद्ध और उससे जुड़ी नीतियां भी चुनावी रूप से महत्वपूर्ण हो सकती हैं. ट्रंप प्रशासन को उम्मीद थी कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में सफलता से रिपब्लिकन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में फायदा मिलेगा. लेकिन ईरान के प्रतिरोध के कारण ऐसी स्पष्ट जीत मिलती हुई अभी दिखाई नहीं दे रही है. अगर राष्ट्रपति की विदेश नीति और युद्ध संबंधी फैसलों से जनता असंतुष्ट होती है, तो उसका असर चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है.
मिडटर्म चुनाव के नतीजे यह संकेत देंगे कि अमेरिकी जनता ट्रंप की MAGA (Make America Great Again) और America First नीतियों का समर्थन कर रही है या उन्हें खारिज कर रही है.
अमेरिका की संघीय व्यवस्था में राज्यों के गवर्नरों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. वे अपने राज्यों में प्रशासन और कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर प्रभाव रखते हैं. राज्य स्तर पर न्यायाधीशों और अन्य महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति में भी उनकी भूमिका हो सकती है. इसलिए मिडटर्म चुनाव केवल राष्ट्रपति और कांग्रेस के बारे में नहीं होते. इनके जरिए राज्यों में भी राजनीतिक शक्ति का संतुलन बदल सकता है.
मीडिया के साथ राष्ट्रपति ट्रंप का विवाद
राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी मुख्यधारा के मीडिया की भी लगातार आलोचना करते रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार देश को अच्छी तरह चला रही है, लेकिन मीडिया सरकार के कामकाज को सही तरीके से जनता के सामने नहीं रख रहा है. बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ट्रंप प्रशासन की ईरान संबंधी सैन्य कार्रवाई से असंतुष्ट हैं और युद्ध को ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का एक महत्वपूर्ण कारण मानते हैं.
डेमोक्रेटिक पार्टी उन क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. अगर डेमोक्रेट्स इन क्षेत्रों में सेंध लगाने में सफल होते हैं तो कांग्रेस में शक्ति संतुलन बदल सकता है.
इस बीच चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं. कुछ राज्यों में चुनावी जिलों की सीमाओं को इस तरह बदलने के प्रयासों के आरोप लगे हैं जिससे किसी एक राजनीतिक दल को फायदा मिल सके. इसे रीडिस्ट्रिक्टिंग कहा जाता है. अल्पसंख्यक समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी अमेरिका में यह मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है.
ट्रंप के लिए खतरे की घंटी क्या है
अमेरिकी राजनीति का इतिहास बताता है कि कई बार राष्ट्रपति की पार्टी को मिडटर्म चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है. इसलिए नवंबर 2026 के चुनाव ट्रंप के लिए भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा हो सकते हैं. अगर रिपब्लिकन पार्टी को इन चुनावों में बड़ा नुकसान होता है तो पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ सकते हैं. ट्रंप की नीतियों और उनके व्यापक राजनीतिक एजेंडे को भी चुनौती मिल सकती है.
दूसरी ओर, अगर रिपब्लिकन पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो यह ट्रंप की नीतियों के लिए जनता के समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा सकता है. इससे राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के बाकी दो सालों में कानून और नीतियां लागू करने में अधिक राजनीतिक ताकत मिल सकती है.
इसलिए तीन नवंबर 2026 को होने वाला मिडटर्म चुनाव केवल सीटों का चुनाव नहीं हैं. यह चुनाव यह बताएगा कि अमेरिकी जनता राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले दो सालों के कामकाज को किस नजर से देखती है और अगले दो सालों के लिए वह किस तरह का राजनीतिक संतुलन चाहती है.
कुल मिलाकर, ये चुनाव ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट और एमएजीए राजनीति के लिए जनमत संग्रह जैसे संकेत दे सकते हैं. अगर रिपब्लिकन पार्टी कमजोर पड़ती है तो ट्रंप के लिए अपने कार्यकाल के अंतिम दो सालों में राजनीतिक और विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है.
(डिस्क्लेमर: लेखक नई दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में अंतरराष्ट्रीय संबंध और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बारे में पढ़ाते हैं. इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहम होना जरूरी नहीं है.)